Stablecoins: बैंक में ज्यादा ब्याज मिलने से धीमी पड़ती है डिजिटल डॉलर की ग्रोथ, रिपोर्ट मे बड़ा खुलासा
Bank for International Settlements (BIS) की एक स्टडी के मुताबिक, अमेरिकी बैंकों में डिपॉजिट पर ब्याज दर बढ़ने से Stablecoins की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है. जनवरी 2019 से जून 2025 तक के आंकड़ों पर आधारित इस रिसर्च में पाया गया कि ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी का असर अगले 10 हफ्तों में दिखाई दे सकता है. स्टडी में Tether के USDT और Circle के USDC पर असर का भी एनालिसिस किया गया है.
Highlights
- BIS की स्टडी में बैंक डिपॉजिट की ब्याज दरों और Stablecoins की ग्रोथ के बीच संबंध मिला.
- अनुमान के तरीके के आधार पर एक बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से अगले 10 हफ्तों में ग्रोथ करीब 3 से 9 फीसदी अंक धीमी हुई.
- USDC ने USDT के मुकाबले अमेरिकी बैंक ब्याज दरों में बदलाव पर ज्यादा प्रतिक्रिया दिखाई.
बैंकों में जमा पैसे पर ब्याज बढ़ने से क्या डिजिटल डॉलर यानी Stablecoins की मांग धीमी पड़ सकती है? बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (BIS) की एक स्टडी में इसके संकेत मिले हैं. अमेरिका के जनवरी 2019 से जून 2025 तक के साप्ताहिक आंकड़ों के एनालिसिस में पाया गया कि जब बैंक डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो Stablecoins की ग्रोथ धीमी हो सकती है. यह स्टडी ऐसे समय में अहम है, जब Stablecoins का बाजार तेजी से बढ़ा है और दुनिया भर के रेगुलेटर इनके बैंकिंग सिस्टम पर असर को लेकर चर्चा कर रहे हैं.
Stablecoins क्या हैं और क्यों बढ़ रहा है इनका इस्तेमाल?
Stablecoins ऐसी डिजिटल करेंसी या टोकन हैं, जिनकी कीमत किसी स्थिर एसेट से जोड़ी जाती है. अमेरिकी डॉलर से जुड़े Stablecoins का लक्ष्य एक टोकन की कीमत एक डॉलर के आसपास बनाए रखना होता है. Tether का USDT और Circle का USDC इसके प्रमुख उदाहरण हैं.
इनका इस्तेमाल क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री, डिजिटल ट्रांसफर और पैसे को डिजिटल रूप में रखने के लिए किया जाता है. इन्हें इंटरनेट के जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जा सकता है. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, Stablecoins का कुल बाजार 2019 में 5 अरब डॉलर से कम था, जो जून 2025 तक बढ़कर 220 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया.
हालांकि, बैंक डिपॉजिट और Stablecoins में एक बड़ा अंतर है. बैंक बचत खाते या दूसरी जमा योजनाओं पर ब्याज दे सकते हैं, जबकि Stablecoins आम तौर पर अपने धारकों को सीधे ब्याज नहीं देते. ऐसे में बैंक जमा पर मिलने वाला बेहतर रिटर्न लोगों के पैसे रखने के फैसले को प्रभावित कर सकता है.
Stablecoins की ग्रोथ क्यों धीमी होती है?
BIS की स्टडी का मुख्य सवाल यही था कि जब बैंक ग्राहकों को जमा पर ज्यादा ब्याज देने लगते हैं, तो क्या Stablecoins की ग्रोथ पर असर पड़ता है. स्टडी के नतीजों के मुताबिक, इसका जवाब हां है.
जब बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज बढ़ाते हैं, तो ग्राहकों के लिए बैंक में पैसा रखना पहले के मुकाबले आकर्षक हो सकता है. इसके उलट, ऐसे Stablecoins जिन पर सीधे ब्याज नहीं मिलता, उनमें पैसा रखने का तुलनात्मक फायदा कम हो सकता है. इससे Stablecoins में आने वाला नया पैसा धीमा पड़ सकता है.
यहां यह समझना जरूरी है कि स्टडी Stablecoins के बाजार में हर बार गिरावट आने की बात नहीं करती. इसका निष्कर्ष है कि बैंक डिपॉजिट की ब्याज दर बढ़ने पर Stablecoins की ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो सकती है.
ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी का कितना असर?
स्टडी में पाया गया कि बैंक डिपॉजिट की औसत ब्याज दर में एक बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद अगले 10 हफ्तों में Stablecoins की ग्रोथ करीब 3 फीसदी अंक धीमी हुई. शोधकर्ताओं की पसंदीदा अनुमान पद्धति के तहत यह असर करीब 9 फीसदी अंक तक रहा.
एक बेसिस पॉइंट का मतलब एक फीसदी अंक का सौवां हिस्सा यानी 0.01 फीसदी अंक होता है. उदाहरण के लिए, अगर ब्याज दर 4.00 फीसदी से बढ़कर 4.01 फीसदी होती है, तो यह एक बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी है.
इस असर को मापने के लिए शोधकर्ताओं ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बेंचमार्क ब्याज दर और बैंकों की डिपॉजिट दरों के बीच संबंध का इस्तेमाल किया. स्टडी के मुताबिक, जब फेड की दर करीब 3 फीसदी से नीचे होती है, तो बैंक डिपॉजिट पर ब्याज बढ़ाने में कम बदलाव करते हैं. इस स्तर से ऊपर बैंक जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं. शोधकर्ताओं ने इस अंतर का इस्तेमाल ब्याज दरों में बदलाव के असर का आकलन करने के लिए किया.
USDC पर USDT से ज्यादा असर क्यों दिखा?
स्टडी में Circle के USDC ने Tether के USDT के मुकाबले बैंक डिपॉजिट की ब्याज दरों में बदलाव पर ज्यादा प्रतिक्रिया दिखाई. रिपोर्ट में इसकी एक वजह दोनों Stablecoins के इस्तेमाल के तरीके में अंतर बताया गया है.
USDC का इस्तेमाल अमेरिकी संस्थानों और Decentralised Finance यानी DeFi प्लेटफॉर्म पर अपेक्षाकृत ज्यादा होता है. वहीं, USDT का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय बाजारों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भी बड़े स्तर पर होता है. इसलिए अमेरिकी बैंकों की ब्याज दरों में बदलाव का असर दोनों पर एक जैसा होना जरूरी नहीं है.
स्टडी के मुताबिक, 2022 से 2023 के दौरान अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की थी. इस अवधि में Stablecoins का कुल बाजार मूल्य करीब 30 फीसदी गिरा था. हालांकि, इस गिरावट के पीछे TerraUSD और FTX के पतन जैसे दूसरे घटनाक्रम भी थे. इसलिए पूरी गिरावट को केवल ब्याज दरों से जोड़ना सही नहीं होगा.
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बैंकों और क्रिप्टो बाजार के लिए क्या है इसका मतलब?
BIS की स्टडी इस बात के शुरुआती सबूत देती है कि Stablecoins सिर्फ क्रिप्टो कारोबार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बैंक जमा के विकल्प के रूप में भी काम कर सकते हैं. अगर इनका बाजार आगे और बड़ा होता है, तो बैंकों के डिपॉजिट और उनकी फंडिंग पर इनके संभावित असर को समझना महत्वपूर्ण होगा.
बैंक आम तौर पर जमा राशि का इस्तेमाल कर्ज देने समेत अपनी कारोबारी गतिविधियों के लिए करते हैं. यदि बड़ी मात्रा में पैसा बैंक जमा से बाहर जाने लगे, तो बैंकों की फंडिंग की लागत और कर्ज देने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. हालांकि, स्टडी के नतीजे अपने आप यह साबित नहीं करते कि Stablecoins की बढ़ोतरी से बैंकों का कर्ज देना घट ही जाएगा.
रेगुलेटर के सामने भी सवाल हैं कि Stablecoins जारी करने वाली कंपनियों के रिजर्व कहां रखे जाने चाहिए और क्या इन टोकन पर ब्याज देने की अनुमति होनी चाहिए. कुल मिलाकर, BIS की स्टडी बताती है कि अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का असर अब पारंपरिक बैंकिंग के साथ-साथ डिजिटल डॉलर के बाजार पर भी पड़ सकता है.
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