पोस्ट ऑफिस में देश के कितने लोगों का कितना पैसा है जमा? सामने आए हैरान करने वाले आंकड़े, देखें डिटेल्स

देशभर में पोस्ट ऑफिस सेविंग्स खातों में करीब 22 लाख करोड़ रुपये जमा हैं और ऐसे खातों की संख्या लगभग 38 करोड़ तक पहुंच चुकी है. सरकारी गारंटी, आसान पहुंच और भरोसे के कारण ग्रामीण से लेकर शहरी परिवार तक बड़ी संख्या में अपनी बचत डाकघरों में रख रहे हैं.

पोस्ट ऑफिस और जमा राशि Image Credit: @GettyImages

India Post Office Accounts and Deposits: भारत में पोस्ट ऑफिस सिर्फ चिट्ठियां भेजने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि अब यह देश के करोड़ों लोगों के लिए भरोसेमंद बैंकिंग विकल्प बन चुका है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट्स में लोगों की कुल जमा राशि करीब 22 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. देशभर में ऐसे खातों की संख्या लगभग 38 करोड़ है, जो यह दर्शाती है कि ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पोस्ट ऑफिस पर लोगों का भरोसा बेहद मजबूत है.

बेटियों के भविष्य के लिए भी बड़ा फंड

सिर्फ सामान्य बचत ही नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में भी लोगों ने बड़ी रकम जमा की है. खास तौर पर सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) जो बेटियों की पढ़ाई और भविष्य के लिए बनाई गई बचत योजना है, उसमें करीब 3.8 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं. सोमवार यानी 23 फरवरी को ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि SSY जैसे खातों में कुल जमा राशि लगभग 2.27 लाख करोड़ रुपये है. इससे साफ है कि परिवार अपनी बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए इस योजना को बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं.

ग्रामीण भारत में पोस्ट ऑफिस की बड़ी भूमिका

देश के दूरदराज इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं की कमी होने पर पोस्ट ऑफिस ही लोगों की आर्थिक जरूरतों का मुख्य आधार बना हुआ है. ग्रामीण डाक सेवकों के जरिए गांव-गांव तक वित्तीय सेवाएं पहुंच रही हैं और बड़ी मात्रा में बचत राशि जुटाई जा रही है. देशभर में करीब 1.65 लाख पोस्ट ऑफिस और लगभग 4.5 लाख कर्मचारी इस नेटवर्क को संभाल रहे हैं. पहले बड़ी संख्या में ऐसे पोस्ट ऑफिस थे जहां कोई लेनदेन नहीं होता था, लेकिन लगातार निगरानी और सुधार के कारण अब ऐसे कार्यालयों की संख्या घटकर करीब 1,500 रह गई है.

आधुनिक तकनीक से बदल रहा पोस्ट ऑफिस

डाक विभाग अपने नेटवर्क को तेजी से आधुनिक बना रहा है. पार्सल और मेल सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कन्वेयर सिस्टम, वैज्ञानिक सॉर्टिंग, RFID, बारकोड और QR कोड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी डिलीवरी तेज करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया जाएगा.

खर्च ज्यादा, कमाई कम

हालांकि डाक विभाग अभी भी वित्तीय संतुलन की चुनौती से जूझ रहा है. राज्य संचार मंत्री चंद्रशेखर पम्मसानी ने कहा कि विभाग का वार्षिक खर्च लगभग 35,000 करोड़ है, जबकि इनकम करीब 13,000 करोड़ रुपये के आसपास है. कुछ राज्यों में तो खर्च आय से कई गुना ज्यादा है. उदाहरण के तौर पर, एक राज्य में पिछले साल 1,800 करोड़ रुपये खर्च के मुकाबले सिर्फ 600 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि इस साल आय बढ़कर करीब 850 करोड़ रुपये हो गई है.

क्यों खास है पोस्ट ऑफिस बचत

पोस्ट ऑफिस की योजनाएं सरकारी गारंटी के साथ आती हैं, इसलिए जोखिम कम माना जाता है. यही वजह है कि बुजुर्ग, ग्रामीण परिवार और छोटे निवेशक बड़े पैमाने पर यहां पैसा जमा करते हैं. कुल मिलाकर, 22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की जमा राशि यह साबित करती है कि पोस्ट ऑफिस आज भी देश की वित्तीय व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ है. खासकर उन लोगों के लिए, जिन्हें सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश विकल्प चाहिए, पोस्ट ऑफिस अभी भी पहली पसंद बना हुआ है.

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