RBI ने बैंकों में डाले 1 लाख करोड़ रुपये, त्योहारों से पहले क्यों बढ़ी पैसों की जरूरत?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में 1 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी डाली है. त्योहारों से पहले नकदी की मांग बढ़ने और बैंकों के फंडिंग दबाव के बीच यह कदम उठाया गया. RBI ने 7 दिन के वैरिएबल रेट रेपो (VRR) ऑपरेशन के जरिए यह रकम उपलब्ध कराई, जिससे बैंकों को तत्काल फंडिंग में राहत मिल सकती है.
Highlights
- RBI ने बैंकों में एक लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी डाली
- त्योहारी सीजन से पहले बैंकों पर बढ़ा फंडिंग का दबाव
- VRR के जरिए बैंकों को सात दिनों के लिए मिले पैसे
त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही देश के बैंकिंग सिस्टम में पैसों की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ गया है. इसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को राहत देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी उपलब्ध कराई है. RBI ने यह पैसा 7 दिन के वैरिएबल रेट रेपो (VRR) ऑपरेशन के जरिए सिस्टम में डाला है. यह जुलाई के बाद RBI का पहला बड़ा लिक्विडिटी इन्फ्यूजन है.
अचानक क्यों पड़ी पैसों की जरूरत?
पिछले कुछ हफ्तों में RBI बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त पैसा निकाल रहा था. विदेशी मुद्रा से जुड़े कार्यक्रमों में भारी फंड आने के बाद सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी बढ़ गई थी. इसके अलावा टैक्स भुगतान, कैश रिजर्व रेशियो (CRR) की जरूरत और त्योहारों के दौरान कर्ज की बढ़ती मांग ने बैंकों पर फंडिंग का दबाव बढ़ा दिया.
इसका असर रातोंरात होने वाली उधारी की दर यानी वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) पर भी दिखा. यह दर 5.67% तक पहुंच गई, जबकि RBI की पॉलिसी रेपो रेट 5.50% है. यानी बैंकों के बीच कम अवधि के लिए पैसे उधार लेने की लागत बढ़ गई थी.
बैंकों को कैसे मिलेगी राहत?
VRR के जरिए RBI बैंकों को कुछ समय के लिए पैसा उपलब्ध कराता है. इसके बदले बैंक सरकारी सिक्योरिटीज को गिरवी रखते हैं. इस तरह बैंकों के पास तत्काल इस्तेमाल के लिए ज्यादा फंड उपलब्ध हो जाता है. 1 लाख करोड़ रुपये की इस नीलामी में बैंकों की ओर से करीब 1.50 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं. इससे संकेत मिलता है कि बैंकिंग सिस्टम में फंड की मांग काफी मजबूत थी.
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
लिक्विडिटी बढ़ने से बैंकों को तत्काल फंडिंग दबाव से राहत मिल सकती है. इससे शॉर्ट टर्म ब्याज दरों में ज्यादा तेजी पर लगाम लग सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि होम लोन या पर्सनल लोन की ब्याज दरें तुरंत कम हो जाएंगी. RBI की मौद्रिक नीति अभी भी महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त रुख की ओर है. त्योहारी सीजन में कर्ज की मांग बढ़ने के बीच RBI का यह कदम बैंकिंग सिस्टम में पैसों का प्रवाह सामान्य बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है.
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