₹30 का प्रीमियम अंडा, क्या ₹8 वाले से ज्यादा पौष्टिक है? जानें किस बात के ज्यादा पैसे वसूल रहीं कंपनियां
भारत में प्रीमियम अंडे की कीमत 30 रुपये तक है. जानें सामान्य और महंगे अंडे में कितना अंतर है, ज्यादा प्रोटीन के दावे कितने सही हैं और अंडे खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें.
Highlights
- भारत में साल 2026 में 14,911 करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ.
- सामान्य 50-60 ग्राम के अंडे में करीब 6 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि 61-65 ग्राम के बड़े अंडे में करीब 7 ग्राम प्रोटीन हो सकता है.
- महंगे अंडे का मतलब जरूरी नहीं कि ज्यादा पोषण हो.
भारत में अंडे की कीमत और उसे खरीदने का तरीका बदल रहा है. बाजार में जहां सामान्य अंडा 8 से 10 रुपये में मिलता है, वहीं प्रीमियम अंडे की कीमत 30 रुपये प्रति पीस तक पहुंच जाती है. इन अंडों को ज्यादा प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D3 और बेहतर पोषण जैसे दावों के साथ बेचा जाता है. लेकिन क्या महंगा अंडा वाकई सामान्य अंडे से ज्यादा पौष्टिक होता है? इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. अंडे की कीमत बढ़ने के पीछे सिर्फ पोषण ही नहीं, बल्कि मुर्गियों को पालने का तरीका, उनका खाना, जमीन, मजदूरी और पैकेजिंग जैसे खर्च भी शामिल हैं.
भारत में 15,700 करोड़ अंडों का उत्पादन
देश में साल 2026 में करीब 14,911 करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ है. इनमें से करीब 93 फीसदी अंडे खुले में बेचे गए. वहीं, प्रीमियम और अतिरिक्त पोषण वाले अंडों की बाजार में हिस्सेदारी 3 फीसदी से कम है. हालांकि, यह सेगमेंट सालाना 15% से ज्यादा की दर से बढ़ रहा है, खासकर शहरों में.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अंडों की खरीदारी में अब सिर्फ कीमत ही मायने नहीं रखती. कुछ ग्राहक यह भी जानना चाहते हैं कि अंडा कहां से आया है, कितना ताजा है, मुर्गियों को किस तरह रखा गया और उसमें कौन-कौन से पोषक तत्व हैं. कंपनियां इसी बदलती मांग को देखते हुए सामान्य अंडों से अलग अपनी ब्रांडेड रेंज पेश कर रही हैं.
8 रुपये का सामान्य अंडा और ₹30 का प्रीमियम एग
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सामान्य अंडे की कीमत जहां 10 रुपये प्रति है, वहीं प्रीमियम अंडे की कीमत 14 से 30 रुपये तक हो सकती है. कुछ कंपनियां ओमेगा-3, विटामिन और ज्यादा प्रोटीन वाले अंडे बेच रही हैं. वहीं, फ्री-रेंज अंडों में मुर्गियों को खुले में घूमने की सुविधा देने पर जोर दिया जाता है.
लेकिन कीमत में अंतर का मतलब यह नहीं है कि महंगा अंडा सामान्य अंडे से उतना ही ज्यादा पौष्टिक भी होगा. रिपोर्ट के हवाले से अंडे की उत्पादन लागत बढ़ने के साथ मुर्गियों को पालने के तरीके और ब्रांडिंग पर होने वाला खर्च भी कीमत को प्रभावित करता है.
अंडे की उत्पादन लागत में फीड का हिस्सा करीब 75%
रिपोर्ट के मुताबिक, अंडे की उत्पादन लागत 5.50 रुपये प्रति अंडे से ज्यादा हो चुकी है और जल्द ही 6 रुपये से ऊपर जा सकती है. इसकी प्रमुख वजह मुर्गियों के खाने यानी फीड और दूसरी जरूरी चीजों की बढ़ती लागत है. अंडे की कुल उत्पादन लागत में फीड का हिस्सा करीब 75 फीसदी है.
इसके अलावा, मुर्गियों को रखने का तरीका बदलने से लागत 20 से 50 फीसदी तक बढ़ सकती है. यह बढ़ोतरी पालन के तरीके और उसके स्तर पर निर्भर करती है. फ्री-रेंज और केज-फ्री व्यवस्था में ज्यादा जमीन और मजदूरों की जरूरत पड़ सकती है. वहीं, पोषण बढ़ाने के लिए मुर्गियों को खास तरह का फीड दिया जाता है.
इसके अलावा विशेष फीड के साथ-साथ ब्रांडिंग और पैकेजिंग का खर्च भी काफी हो सकता है. ऐसे में ग्राहक जो अतिरिक्त कीमत चुकाते हैं, उसका पूरा हिस्सा पोषण बढ़ाने पर खर्च नहीं होता.
क्या महंगे अंडे में ज्यादा प्रोटीन होता है?
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है, अंडे में कुछ पोषक तत्वों की मात्रा मुर्गियों के फीड में बदलाव करके बढ़ाई जा सकती है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन A, D3 और E जैसे पोषक तत्व शामिल हैं. हालांकि, प्रोटीन के मामले में तस्वीर अलग है.
लेकिन, सिर्फ फीड बदलने से अंडे में प्रोटीन की मात्रा नहीं बढ़ती. बड़े आकार के अंडे में स्वाभाविक रूप से ज्यादा प्रोटीन हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, 50 से 60 ग्राम वजन वाले सामान्य अंडे में करीब 6 ग्राम प्रोटीन होता है. इसलिए अगर कोई कंपनी ज्यादा प्रोटीन का दावा करती है, तो यह देखना जरूरी है कि वह किस वजन वाले सामान्य अंडे से तुलना कर रही है. सिर्फ पैकेट पर लिखे दावे के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि अंडे में बहुत ज्यादा प्रोटीन है.
संतरे जैसी पीली जर्दी क्या ज्यादा पोषण की निशानी है?
अंडे की जर्दी का गहरा पीला या नारंगी रंग भी कई बार ग्राहकों को आकर्षित करता है. लेकिन ET की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्दी का रंग अपने आप में बेहतर पोषण का प्रमाण नहीं है. जर्दी का रंग मुर्गियों के खाने में मौजूद रंग देने वाले तत्वों पर निर्भर करता है. मक्का खाने वाली मुर्गियों के अंडों की जर्दी पीली हो सकती है, जबकि कैरोटिनॉयड से भरपूर चीजें खाने वाली मुर्गियों के अंडों की जर्दी ज्यादा नारंगी हो सकती है.
इसी तरह, भूरे रंग के छिलके वाला अंडा सफेद छिलके वाले अंडे से जरूरी नहीं कि ज्यादा पौष्टिक हो. छिलके का रंग मुख्य रूप से मुर्गी की नस्ल से तय होता है, न कि अंडे के पोषण स्तर से.
क्या फ्री-रेंज अंडे ज्यादा सेहतमंद होते हैं?
फ्री-रेंज अंडों की कीमत ज्यादा होने की एक वजह मुर्गियों को खुले में घूमने की सुविधा देना है. इसके लिए ज्यादा जगह, मजदूरी और पालन की अलग व्यवस्था की जरूरत हो सकती है. ऐसे अंडे खरीदने वाले कुछ ग्राहक पशु कल्याण को भी महत्व देते हैं.
हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि मुर्गियों को खुले में घूमने की सुविधा देने का मतलब यह नहीं है कि उनके अंडे जरूरी तौर पर ज्यादा पौष्टिक होंगे. फ्री-रेंज व्यवस्था में अतिरिक्त कीमत का संबंध जमीन, मजदूरी, मुर्गियों को कम घनत्व में रखने और उत्पादन के दौरान संभावित नुकसान से भी है. इसलिए ग्राहक को यह समझना चाहिए कि वह अतिरिक्त कीमत किस चीज के लिए चुका रहा है. बेहतर पशु कल्याण और ज्यादा पोषण दो अलग-अलग बातें हैं.
अंडे के पैकेट पर लिखे दावों की जांच जरूरी
प्रीमियम अंडों के पैकेट पर प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन, ताजगी और मुर्गियों को पालने के तरीके से जुड़े दावे किए जाते हैं. लेकिन कई बार यह साफ नहीं होता कि सामान्य अंडे के मुकाबले उस अंडे में पोषक तत्वों की मात्रा कितनी ज्यादा है. रिपोर्ट में जानकारों ने कहा कि पैकेट पर पोषण की जानकारी ऐसी होनी चाहिए, जिससे ग्राहक सामान्य और प्रीमियम अंडे के बीच सही तुलना कर सकें. उदाहरण के लिए, अगर ज्यादा प्रोटीन का दावा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि अंडे का वजन कितना है और सामान्य अंडे के मुकाबले उसमें कितना अतिरिक्त प्रोटीन मिलता है.
महंगे अंडों के बीच सामान्य अंडे खरीदना भी मुश्किल
एक तरफ ब्रांडेड कंपनियां प्रीमियम अंडे बेच रही हैं, तो दूसरी तरफ सामान्य अंडों की बढ़ती कीमतों का असर आम परिवारों पर भी पड़ रहा है. ET की रिपोर्ट में सितंबर में LocalCircles के एक सर्वे का हवाला दिया गया है. इसके मुताबिक, 48 फीसदी लोगों ने कीमतें बढ़ने के बाद अंडे खरीदने की मात्रा या उनकी खरीदारी की आवृत्ति कम कर दी. वहीं, 62% लोगों ने छह महीने के दौरान कीमतों में 10 से 50% की बढ़ोतरी बताई.
जानकारों का कहना है कि भारत में प्रोटीन की जरूरत को पूरा करने के लिए सामान्य और किफायती अंडों की उपलब्धता बढ़ाना ज्यादा अहम है. रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत में प्रति व्यक्ति अंडों की उपलब्धता 106 सालाना बताई गई है.
अंडे खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
ग्राहकों के लिए अंडे की पैकिंग और एक्सपायरी तारीख, साफ और बिना दरार वाला छिलका, सही तरीके से रखा जाना और उसके सोर्स की जानकारी देखना जरूरी है. इसके साथ ही, पोषण संबंधी जानकारी में यह स्पष्ट होना चाहिए कि हर अंडे से कितना पोषक तत्व मिलता है.
कुल मिलाकर, 30 रुपये का अंडा खरीदने का मतलब यह नहीं है कि वह 8 रुपये के अंडे से पांच गुना ज्यादा पौष्टिक होगा. प्रीमियम अंडे की अतिरिक्त कीमत बेहतर पालन व्यवस्था, खास फीड, पैकेजिंग या कुछ पोषक तत्वों की बढ़ी मात्रा के लिए हो सकती है. इसलिए खरीदारी से पहले यह देखना जरूरी है कि कंपनी का दावा क्या है और उसके समर्थन में कितनी स्पष्ट जानकारी दी गई है.
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