RBI ने रुपये के ट्रेड पर कुछ पाबंदियों में दी ढील, ऑफशोर डेरिवेटिव पर लगी रोक हटाई

यह कदम RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​के उस बयान के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ये पाबंदियां हमेशा के लिए लागू नहीं रहेंगी. मार्च के आखिर में सेंट्रल बैंक ने रुपये की लगातार गिरती कीमत को नए निचले स्तरों पर जाने से रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए थे.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (फाइल फोटो) Image Credit: Getty image

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 20 अप्रैल को रुपये की अस्थिरता को रोकने के लिए, ऑफशोर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स मार्केट (NDF) में पोजीशन लेने वाले फॉरेक्स डीलरों पर लगाई गई कुछ पाबंदियों को हटा दिया. यह कदम RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​के उस बयान के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ये पाबंदियां हमेशा के लिए लागू नहीं रहेंगी. सेंट्रल बैंक ने कहा कि अब अधिकृत डीलरों को रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की पेशकश को, चाहे वे रेजिडेंट हों या नॉन-रेजिडेंट, सीमित करने की जरूरत नहीं होगी.

फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट

अब वे किसी यूजर को रुपये से जुड़े किसी भी फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने की अनुमति भी दे सकते हैं. हालांकि, RBI ने कहा कि अधिकृत डीलरों को संबंधित पक्षों के साथ रुपये में होने वाले फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट करने की इजाजत नहीं होगी. छूटें मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने या रोलओवर करने और गैर-संबंधित, नॉन-रेजिडेंट यूजर्स के साथ किए गए बैक-टू-बैक लेन-देन तक ही सीमित हैं.

RBI ने कहा कि ये उपाय तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं. बैंकों को हर कारोबारी दिन के आखिर में ऑनशोर डिलीवरेबल रुपया बाजार में अपनी नेट ओपन पोजीशन्स को $100 मिलियन तक सीमित रखना जारी रखना होगा.

रुपये में सुधार के लिए लिए गए थे सख्त फैसले

मार्च के आखिर में सेंट्रल बैंक ने रुपये की लगातार गिरती कीमत को नए निचले स्तरों पर जाने से रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए थे, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बिगड़ते हालात की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल के पार चली गई थी. 10 अप्रैल तक बैंकों ने ऑफशोर NDF मार्केट में लगभग $40 अरब के सट्टेबाजी वाले सौदों को खत्म कर दिया, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 95.21 से उबरकर वापस ऊपर आ गया.

अस्थायी थे कदम

अपनी दो महीने की पॉलिसी समीक्षा में मल्होत्रा ​​ने कहा कि ये कदम अस्थायी थे, क्योंकि RBI ने मार्च में आर्बिट्रेज मार्केट में सट्टेबाजी की पोजीशन्स बनते देखी थीं और उसे अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर रोक लगानी पड़ी थी. RBI ने कहा कि ये बाजार में हुए कुछ खास घटनाक्रमों पर प्रतिक्रियाएं थीं और साथ ही यह भी कहा कि वह व्यापक बाजारों के अंतर्राष्ट्रीयकरण और उन्हें और गहरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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