रुपये ने हासिल की 12 साल की सबसे बड़ी बढ़त, RBI के एक्शन के बाद मजबूत हुई करेंसी; जानें- आगे कैसा रहेगा हाल
यह बढ़त ज्यादातर क्षेत्रीय करेंसीज में व्यापक कमजोरी के बावजूद हासिल हुई, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्राइमटाइम संबोधन में ईरान युद्ध से बाहर निकलने के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई. केंद्रीय बैंक रुपये को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
Indian Rupee: भारतीय रुपये ने 12 साल से भी अधिक समय अवधि की अपनी सबसे बड़ी बढ़त 2 अप्रैल को दर्ज की है. यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा करेंसी में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए अतिरिक्त उपाय लागू करने के ठीक एक दिन बाद हुआ, जबकि बैंक अपनी ऑफशोर लॉन्ग डॉलर पोजीशन्स को कम करना जारी रखे हुए थे.
कितना मजबूत हुआ रुपया?
गुरुवार को दो दिन के ब्रेक के बाद करेंसी ट्रेडिंग फिर से शुरू होने पर रुपया 1.8 फीसदी तक बढ़कर 93.1413 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे ज्यादा है. यह बढ़त ज्यादातर क्षेत्रीय करेंसीज में व्यापक कमजोरी के बावजूद हासिल हुई, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्राइमटाइम संबोधन में ईरान युद्ध से बाहर निकलने के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई.
रिजर्व बैंक का एक्शन
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार देर रात कहा कि अधिकृत डीलरों को निवासी या अनिवासी यूजर्स को रुपये से जुड़े कुछ नॉन-डिलीवरेबल कॉन्ट्रैक्ट्स देने से मना किया गया है. बैंक अभी भी हेजिंग के लिए डिलीवरेबल FX कॉन्ट्रैक्ट्स दे सकते हैं, लेकिन यूजर्स उन ट्रेड्स को विदेश में ली गई पोजीशन्स से ऑफसेट नहीं कर सकते. बैंक ने यह बात एक बयान में कही.
भारतीय रुपया गुरुवार को 173 पैसे की बढ़त के साथ 93.10 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि सोमवार को यह 94.83 पर बंद हुआ था.
रिजर्व बैंक की कोशिश
केंद्रीय बैंक रुपये को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, इसके लिए वह रुपये के खिलाफ दांव लगाने के कुछ सबसे लोकप्रिय तरीकों को खत्म कर रहा है. ऐसा तब किया जा रहा है जब बाजार में सीधे दखल देने के बावजूद रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से नहीं रुका.
ट्रेडर्स आम तौर पर शॉर्ट पोजीशन्स बनाने के लिए नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स के नाम से जाने जाने वाले ऑफशोर डेरिवेटिव्स और आर्बिट्रेज ट्रेड्स, यानी देश के अंदर डॉलर खरीदना और उन्हें NDF बाजार में बेचना, का इस्तेमाल करते रहे हैं.
रुपये का आउटलुक
HDFC Securities के रिसर्च एनालिस्ट, दिलीप परमार ने आज के करेंसी परफॉर्मेंस पर अपनी राय दी है. उन्होंने कहा कि RBI ने कुछ रणनीतिक कदम उठाए हैं, जिनका मकसद सट्टेबाजी की होड़ को रोकना और रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करना है. असली जोखिम कम करने वालों के लिए एक बाजार को प्राथमिकता देकर, सेंट्रल बैंक इस सिद्धांत को मजबूत कर रहा है कि करेंसी होल्डिंग्स का इस्तेमाल पूरी तरह से वित्तीय जोखिमों से बचाव (hedge) के तौर पर ही किया जाना चाहिए.
ये कदम रुपये के लिए फायदेमंद हैं. हमें उम्मीद है कि थोड़े समय के लिए रुपये की कीमत बढ़ेगी, भले ही इसकी आगे की चाल काफी हद तक ग्लोबल डॉलर लिक्विडिटी, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बदलते भू-राजनीतिक हालात पर ही निर्भर रहेगी.
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हमें उम्मीद है कि USD-INR, हाल ही में कीमत और उतार-चढ़ाव में आई तेजी के बाद, 92.30 से 93.50 की एक तय सीमा के अंदर ही स्थिर रहेगा.
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