रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 92.57 के स्तर से नीचे, तेल की बढ़ती कीमतों ने कमजोर किया सेंटीमेंट
मंगलवार को, घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले अपने पिछले सबसे निचले इंट्रा-डे स्तर 92.47 पर पहुंची थी, जिसके बाद यह 92.40 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुई. वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, फ्यूचर कारोबार में 0.19 फीसदी गिरकर 103.2 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
विदेशों में डॉलर के मजबूत होने और विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने के कारण बुधवार को रुपया 18 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.58 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया. फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार के सेंटीमेंट को और कमजोर कर दिया. इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 92.42 पर खुली और 92.46-92.47 की सीमा में बनी रही, जिसके बाद यह गिरकर 92.58 पर पहुंच गई.
सबसे निचले स्तर पर करेंसी
मंगलवार को, घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले अपने पिछले सबसे निचले इंट्रा-डे स्तर 92.47 पर पहुंची थी, जिसके बाद यह 92.40 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुई. फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों से पहले रुपया एक नए निचले स्तर पर पहुंच गया, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक ने 92.50 के स्तर को टूटने दिया.’
डॉलर इंडेक्स
इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह मुद्राओं की एक बास्ट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.05 फीसदी बढ़कर 99.62 पर कारोबार कर रहा था. वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, फ्यूचर कारोबार में 0.19 फीसदी गिरकर 103.2 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
क्रूड ऑयल की कीमतें में उछाल
रायटर्स के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 40% बढ़ गई हैं. तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहने से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ जाएगा और महंगाई को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारतीय मुद्रा अपने कई समकक्षों की तुलना में अधिक जोखिम में आ जाएगी.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% से ज्यादा हिस्सा आयात करता है. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भेजी जाने वाली रकम (रेमिटेंस) में कमी आने और उस क्षेत्र को होने वाले निर्यात को नुकसान पहुंचने का भी खतरा है. व्यापारियों ने बताया कि रुपया इतनी तेजी से इसलिए नहीं गिरा, क्योंकि केंद्रीय बैंक ने बुधवार सहित कई मौकों पर बाजार में हस्तक्षेप किया.
US फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग
US फेडरल रिजर्व ने 17 मार्च को अपनी दो-दिवसीय पॉलिसी मीटिंग शुरू की, जिसका नतीजा 18 मार्च को आने वाला है. यह मीटिंग US-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से पैदा हुई भारी अनिश्चितता के माहौल में हो रही है. बाजारों को पूरी उम्मीद है कि फेड मार्च 2026 की FOMC मीटिंग में ब्याज दरों को बिना किसी बदलाव के रखेगा.
28 फरवरी को शुरू हुए इस तनाव ने दुनिया भर में तेल की सप्लाई को बाधित किया है और कीमतों को बढ़ा दिया है. इससे फेड के 2 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई लगातार महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और साथ ही आर्थिक विकास पर भी खतरा मंडरा रहा है. इस स्थिति ने सेंट्रल बैंक को एक मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि उसे एक तरफ महंगाई पर काबू पाना है, तो दूसरी तरफ आर्थिक विकास को भी सहारा देना है.
