रुपया पहली बार 94 के पार, डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोरी जारी, बाजार में बढ़ी चिंता
भारतीय रुपया पहली बार 94 के पार पहुंच गया. डॉलर के मुकाबले इसमें लगातार कमजोरी बनी हुई है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक तनाव इसके मुख्य कारण हैं. गोल्डमैन सैक्स ने भारत की रेटिंग घटाई जबकि बॉन्ड यील्ड 6.94% तक पहुंची. इससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है.
भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है शुक्रवार, 27 मार्च को रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर को पार कर गया जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया है. अमेरिका-इजरायल और ईरान में जारी जंग के चलते वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ते कच्चे तेल के दाम और विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बीच रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है.
डॉलर के मुकाबले 94.15 पर खुला रुपया
शुक्रवार को करेंसी मार्केट खुलते ही रुपया डॉलर के मुकाबले 94.15 पर खुला, जबकि बुधवार को यह 93.97 पर बंद हुआ था. कारोबार के दौरान यह और कमजोर होकर 94.26 तक पहुंच गया. गुरुवार को बाजार बंद था, ऐसे में बुधवार की कमजोरी का असर शुक्रवार को भी देखने को मिला. इससे साफ है कि रुपये में गिरावट का ट्रेंड अभी जारी है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए दबाव बढ़ा दिया है. यही वजह है कि रुपये में लगातार गिरावट देखी जा रही है.
गोल्डमैन सैक्स ने भारतीय बाजार पर अपनी रेटिंग घटाई
इसी बीच, वैश्विक ब्रोकरेज गोल्डमैन सैक्स ने भारतीय बाजार पर अपनी रेटिंग घटाकर “ओवरवेट” से “मार्केटवेट” कर दी है. साथ ही निफ्टी 50 के टारगेट में भी कटौती की गई है. ब्रोकरेज का मानना है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ेगी, जिससे आर्थिक विकास दर (GDP) पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा 2026 में रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में दो बार 25-25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना भी जताई गई है.
बॉन्ड मार्केट पर असर
रुपये की कमजोरी का असर बॉन्ड मार्केट में भी देखने को मिला है. सरकार के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 6.94% तक पहुंच गई है, जो बुधवार के 6.86% के स्तर से अधिक है और 7% के करीब पहुंच रही है. कुल मिलाकर, रुपये में गिरावट और बढ़ती यील्ड यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है. निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है.
इसे भी पढ़ें: IOC में सबसे ज्यादा गिरावट, ONGC में तेजी, एक्साइज ड्यूटी कट के बावजूद ऑयल स्टॉक्स दबाव में
Latest Stories
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटी, क्या सस्ता होगा तेल; जानें पूरी डिटेल
डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर फिर लगा विंडफॉल टैक्स, तेल मार्केट में संकट के बीच सरकार ने किया बड़ा बदलाव
कंस्ट्रक्शन पड़ेगा महंगा! सीमेंट की कीमत में ₹60 तक इजाफा संभव, सप्लाई में दिक्कत और बढ़ती लागत से बढ़ा दबाव
