रुपये का जोरदार कमबैक, 90 का टूटा बैरियर; डॉलर के मुकाबले 19 पैसे मजबूत होकर 89.96 पर बंद

भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 90.43 को छूने के बाद गुरुवार को जोरदार रिकवरी करते हुए डॉलर के मुकाबले 19 पैसे मजबूत होकर 89.96 पर बंद हुआ. डॉलर इंडेक्स में नरमी, RBI के संभावित हस्तक्षेप और कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से रुपये को सहारा मिला, हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से दबाव बना हुआ है.

भारतीय रुपया Image Credit: GettyImages

Rupee vs USD New Value: भारतीय रुपया गुरुवार को अपने अब तक के सबसे निचले स्तर से जबरदस्त रिकवरी करते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे मजबूत होकर 89.96 पर बंद हुआ. दिन की शुरुआत में रुपया भारी दबाव में नजर आया था और पहली बार 90.43 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया, लेकिन बाद में डॉलर में कमजोरी और रिजर्व बैंक की संभावित दखल की खबरों से इसमें सुधार देखने को मिला.

90.43 पर पहुंच गया था रुपया

फॉरेक्स बाजार में कारोबार की शुरुआत कमजोर रही. रुपया 90.36 पर खुला और शुरुआती सौदों में गिरते-गिरते सीधे 90.43 तक चला गया, जो इसका अब तक का सबसे निचला स्तर है. यह गिरावट विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण देखने को मिली. हालांकि, दिन चढ़ने के साथ हालात बदले और आखिरकार रुपया 89.96 पर बंद होने में कामयाब रहा.

डॉलर इंडेक्स में कैसे आई नरमी?

पीटीआई ने बाजार जानकारों के हवाले से लिखा है कि अमेरिकी डॉलर पर दबाव तब बढ़ गया जब ADP नॉन-फार्म पेरोल डेटा उम्मीद से काफी कमजोर रहा. इससे डॉलर इंडेक्स में नरमी आई और इसी का फायदा रुपये को मिला. डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को दर्शाता है, वह 0.01 प्रतिशत गिरकर 98.84 के स्तर पर आ गया. एक दिन पहले यानी बुधवार को रुपया पहली बार 90 के पार फिसलकर 90.15 पर बंद हुआ था, जिससे बाजार में भारी हलचल मच गई थी. हालांकि, गुरुवार की तेजी से निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली.

महंगाई और निर्यात पर नहीं कोई असर!

इस बीच, भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि रुपये की कमजोरी का फिलहाल न तो महंगाई पर कोई बड़ा असर दिख रहा है और न ही निर्यात पर. उन्होंने कहा कि कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इससे आयात महंगा जरूर हो जाता है. खास तौर पर जेम्स एंड ज्वेलरी, पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयात-निर्भर सेक्टरों पर लागत बढ़ने का दबाव पड़ सकता है, जिससे महंगाई की आशंका बढ़ सकती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.22 फीसदी बढ़कर 62.81 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें आम तौर पर रुपये पर दबाव बढ़ाती हैं, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है.

रुपये पर बना रह सकता है दबाव

मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और घरेलू बाजारों की कमजोर स्थिति के कारण रुपये पर फिलहाल दबाव बना रह सकता है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में रुपया 89.65 से 90.50 के दायरे में कारोबार कर सकता है. हालांकि, अगर डॉलर कमजोर रहता है और RBI किसी तरह का हस्तक्षेप करता है, तो रुपये को निचले स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है. फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि इक्विटी बाजार से विदेशी पूंजी का लगातार बाहर जाना, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल टेंशन जैसी कई वजहें निवेशकों के सेंटिमेंट को कमजोर कर रही हैं. वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका में कमजोर रोजगार के आंकड़े और दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती संभावना से डॉलर पर दबाव बना हुआ है, जिसका फायदा रुपये को मिल रहा है.

RBI मौद्रिक नीति बैठक पर नजर

मैक्रो फ्रंट की बात करें तो भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े फिलहाल मजबूत नजर आ रहे हैं. हाल ही में जारी HSBC इंडिया सर्विसेज PMI नवंबर में बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया, जो मजबूत मांग और नए ऑर्डर्स की ओर इशारा करता है. इसके अलावा, GDP ग्रोथ के आंकड़े भी उम्मीद से बेहतर रहे हैं. अब बाजार की नजरें पूरी तरह से RBI की मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हुई हैं, जिसकी घोषणा शुक्रवार को की जाएगी. यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब महंगाई में नरमी, GDP ग्रोथ में मजबूती, रुपया 90 के पार जाना और अंतरराष्ट्रीय तनाव—ये सभी बड़े फैक्टर एक साथ मौजूद हैं.

बाजार में दिखी हरियाली

घरेलू शेयर बाजार में भी गुरुवार को मजबूती देखने को मिली. सेंसेक्स 158 अंक चढ़कर 85,265 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 47 अंक की तेजी के साथ 26,033 पर बंद हुआ. हालांकि, एक दिन पहले यानी बुधवार को FII ने 3,206 करोड़ रुपये के शेयरों की नेट बिकवाली की थी, जो बाजार पर दबाव का बड़ा कारण बनी.

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