Nifty में आएगी 10% गिरावट, 22660 का टच करेगा लेवल; ICICI Securities ने दी चेतावनी

कच्चे तेल की कीमतें अगर लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा दबाव पड़ सकता है. ICICI Securities के अनुसार ऐसी स्थिति में Nifty 50 अपने प्री-कॉन्फ्लिक्ट स्तर से करीब 10 प्रतिशत तक गिर सकता है और 22,660 के आसपास पहुंच सकता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई में रुकावट की आशंका के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ी है.

निफ्टी50 का आउटलुक. Image Credit: canva/money9live

Nifty 50 Outlook: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है. ब्रोकरेज हाउस ICICI Securities ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो Nifty 50 में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. ब्रोकरेज के अनुसार ऐसी स्थिति में Nifty 50 अपने प्री-कॉन्फ्लिक्ट लेवल से करीब 10 प्रतिशत तक गिर सकता है.

एक सप्ताह में करीब 4 फीसदी टूटा Nifty

हाल के दिनों में बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली है. Nifty 50 पिछले 1 सप्ताह में 3.98 फीसदी गिर चुका है, जबकि पिछले 1 महीने में इसमें 8.83 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और बढ़ती जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण बाजार दबाव में है.

होर्मुज स्ट्रेट संकट से बढ़ी तेल की कीमतें

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं. इसकी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई में आई रुकावट है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई मार्गों में से एक है.

22,700 के नीचे जा सकता है Nifty

ICICI Securities के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट विनोद कार्की के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं, तो Nifty 50 करीब 22,660 के स्तर तक गिर सकता है. यह गिरावट प्री-कॉन्फ्लिक्ट लेवल 25,178 से करीब 10 फीसदी कम होगी. कार्की के मुताबिक यह कोविड के बाद सबसे निचले स्तरों के करीब है.

तेल महंगा होने से बढ़ता है भारत का आयात बिल

एक्सपर्ट का कहना है कि 100 डॉलर से ऊपर कच्चे तेल की कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं. इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई पर भी दबाव पड़ेगा. इसका असर अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है. अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो कई सेक्टरों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.

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