NSE ने मेगा IPO के लिए 20 इन्वेस्टमेंट बैंकों को किया शॉर्टलिस्ट, पब्लिक ऑफर के और करीब पहुंचा ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म
26 फरवरी को NSE ने एक RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी किया था और IPO पिच के लिए कई इन्वेस्टमेंट बैंकों और लॉ फर्म को इनवाइट किया था. 6 फरवरी को हुई NSE बोर्ड मीटिंग के बाद, मौजूदा शेयरहोल्डर्स द्वारा ऑफर फॉर सेल के जरिए IPO को मंजूरी दी गई.
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने मेगा IPO के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, जेएम फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज और मॉर्गन स्टेनली समेत करीब 20-21 इन्वेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया है. मनीकंट्रोल ने इंडस्ट्री के कई जानकार सूत्रों के हवाले से इस बारे में अपनी रिपोर्ट में लिखा. सूत्रों के अनुसार, इस बंपर इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है और जल्द ही ऑफिशियल अनाउंसमेंट की उम्मीद है.
इस महीने हो सकता है फाइनल सेट पर फैसला
इससे पहले 26 फरवरी को NSE ने एक RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) जारी किया था और IPO पिच के लिए कई इन्वेस्टमेंट बैंकों और लॉ फर्म को इनवाइट किया था और एडवाइजर के फाइनल सेट पर फैसला मार्च के बीच तक हो सकता है.
NSE ने मनीकंट्रोल को पहले दिए एक बयान में बताया था कि IPO कमेटी ने टेक्निकल और कमर्शियल प्रपोज़ल के आधार पर अलग-अलग एजेंसियों से मिलने के बाद, IPO प्रोसेस की देखरेख के लिए रॉथ्सचाइल्ड को एक इंडिपेंडेंट एडवाइजर के तौर पर चुना था.
रॉथ्सचाइल्ड पर IPO की जिम्मेदारी
रॉथ्सचाइल्ड पर NSE के बयान में आगे कहा गया, ‘काम के दायरे की समरी इस तरह है, एडवाइजर NSE के IPO के लिए BRLMs, लीगल काउंसल और दूसरे इंटरमीडियरीज को चुनने के लिए एक ट्रांसपेरेंट, गवर्नेंस से चलने वाले प्रोसेस को लीड करेगा. जिम्मेदारियों में एक ऑब्जेक्टिव इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क बनाना, साफ सिलेक्शन क्राइटेरिया तय करना और सिलेक्शन प्रोसेस के सभी स्टेज को मैनेज करना शामिल है, डॉक्यूमेंटेशन और क्लैरिफिकेशन से लेकर बैक-ऑफ कोऑर्डिनेशन और इंटरनल स्टेकहोल्डर्स के इवैल्यूएशन फ़ीडबैक को एक साथ लाना. यह रोल जानकारी में बराबरी, स्टेकहोल्डर से लगातार कम्युनिकेशन और फैसलों का पूरा डॉक्यूमेंटेशन भी सुनिश्चित करता है.’
ऑफर फॉर सेल
6 फरवरी को हुई NSE बोर्ड मीटिंग के बाद, मौजूदा शेयरहोल्डर्स द्वारा ऑफर फॉर सेल के जरिए IPO को मंजूरी दी गई. LIC, SBI और सिंगापुर की टेमासेक फर्म के कुछ इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स में से हैं.
इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म
NSE 1992 में बना था और 1994 में भारत के पहले इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज के तौर पर काम करना शुरू किया था. यह इक्विटी, डेट, कमोडिटी, करेंसी और उनके डेरिवेटिव, और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) जैसे एसेट क्लास में एक हाई-स्पीड, टेक्नोलॉजी वाला प्लेटफॉर्म देता है.
2025 के लिए एक्सचेंज की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, इसके 11.3 करोड़ यूनिक रजिस्टर्ड इन्वेस्टर (सालाना 23 फीसदी ज्यादा) और लगभग 22 करोड़ इन्वेस्टर अकाउंट थे, और इसके प्लेटफॉर्म पर 2,720 कंपनियां लिस्टेड थीं. कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल के मामले में, कुल रेवेन्यू 19,177 करोड़ रुपये (सालाना 17 प्रतिशत फीसदी) और टैक्स के बाद प्रॉफिट 12,188 करोड़ रुपये (सालाना 47 प्रतिशत ज्यादा) था.
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