एथेनॉल कोटा बढ़ाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- एक बदलाव से देशभर में मुकदमों की बाढ़ आ सकती है
सुप्रीम कोर्ट ने ESY 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन में फिलहाल कोई बदलाव नहीं करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि इससे E20 ब्लेंडिंग नीति और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है. कोर्ट का यह फैसला कर्नाटक हाईकोर्ट के एक हालिया आदेश के बाद आया है.
‘E20’ (पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग) प्रोग्राम को पटरी से उतरने से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है. शीर्ष अदालत ने सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया है कि वे इथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY) 2025-26 के लिए मौजूदा इथेनॉल आपूर्ति आवंटन में कोई बदलाव न करें.
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कर्नाटक हाईकोर्ट के उस हालिया आदेश के बाद आया है, जिसमें एक निजी डिस्टिलरी के लिए एथेनॉल का कोटा बढ़ाने को कहा गया था.
नेशनल पॉलिसी को लग सकता था झटका: अटॉर्नी जनरल
ईटी रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने साफ कहा कि E20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम देश का एक बेहद महत्वपूर्ण और “चल रहा प्रयोग” है, जिसके पूरे परिणाम अगले साल तक स्पष्ट होंगे. उन्होंने कोर्ट को सचेत किया कि अगर कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को लागू किया गया, तो इससे 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग की राष्ट्रीय नीति पूरी तरह अस्थिर हो जाएगी.
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि ऐसी कई याचिकाएं देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में पेंडिंग हैं, इसलिए वे इन सभी मामलों को एक जगह ट्रांसफर करने की मांग करेंगे ताकि मुकदमों की बाढ़ को रोका जा सके.
क्यों खड़ी हुई यह कानूनी मुसीबत?
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने यह ‘यथास्थिति’ (Status quo) बनाए रखने का आदेश भारत पेट्रोलियम (BPCL) की अपील पर दिया. दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 16 जून को दिए एक आदेश में तेल कंपनियों से कहा था कि वे ‘विन्प डिस्टिलरीज एंड शुगर्स’ नाम की कंपनी की अर्जी पर विचार करें और उसका एथेनॉल कोटा बढ़ाएं.
विन्प डिस्टिलरीज ने साल 2022 में तेल कंपनियों के साथ एक लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट (LTOA) किया था और इसी के आधार पर उसने अपनी उत्पादन क्षमता का हवाला देकर ज्यादा कोटा मांगा था
सुप्रीम कोर्ट का दखल क्यों जरूरी था?
BPCL की तरफ से पैरवी कर रहे अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को आंकड़ों के जरिए पूरी स्थिति समझाई:
- कुल आवंटन: अक्टूबर 2025 में 378 सप्लायर्स को कुल 10.5 बिलियन लीटर एथेनॉल का कोटा फाइनल किया गया था.
- सप्लाई की स्थिति: इस तय कोटे में से 6.8 बिलियन लीटर एथेनॉल की सप्लाई जून 2026 तक पहले ही की जा चुकी है.
- सप्लाई चेन का खतरा: अगर कोर्ट के आदेश पर किसी एक सप्लायर का कोटा बढ़ाया जाता, तो देश भर के बाकी सप्लायर्स भी समानता के आधार पर कोर्ट पहुंच जाते. इससे पूरी सप्लाई चेन ठप हो जाती.
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रिपोर्ट में बताया गया है कि BPCL ने स्पष्ट किया कि कोई भी कंपनी सिर्फ अपने प्लांट की क्षमता के आधार पर तेल कंपनियों से ज्यादा कोटा छीनने का अधिकार नहीं रख सकती, क्योंकि आवंटन पहले ही नियमों के तहत सभी वेंडर्स में बांटा जा चुका है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने फिलहाल नीतिगत और कानूनी अराजकता पर विराम लगा दिया है.
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