दुनिया के 10 में से 8 हीरे प्रोसेस करता है ये शहर, रोजाना 25 मिलियन मीटर कपड़ा; फिर भी क्यों मंडरा रहा खतरा

सूरत गुजरात का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और भारत का आठवां सबसे बड़ा शहरी केंद्र है. यह ताप्ती नदी के किनारे बसा है और अरब सागर के करीब स्थित है. कभी यह एक बड़ा बंदरगाह हुआ करता था, लेकिन आज यह कपड़ा और हीरा उद्योग का वैश्विक केंद्र बन चुका है. साल 2016 में सूरत दुनिया का चौथा सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर माना गया.

Budget 2026 Expectation from Surat Image Credit: Canva/Money9 live

Budget 2026 Expectation from Surat: सूरत सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत की मेहनत, हुनर और एंटरप्रेन्योरशिप की कहानी है. पिछले तीन दशकों में इस शहर ने देश को ग्लोबल ट्रेड मैप पर मजबूती से स्थापित किया है. गुजरात के इस औद्योगिक केंद्र ने कपड़ा, हीरा और अब तकनीक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा साड़ी ने भी सूरत की पहचान को गहरा किया है. पीढ़ियों से साड़ी महिलाओं की शान रही है, चाहे शादी हो, त्योहार हो या कोई खास अवसर. आज भी साड़ी पहली पसंद बनी हुई है.

यह शहर भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब है, जहां रोजाना करोड़ों मीटर कपड़ा बनता है. सूरत की गलियां करघों की आवाज से गूंजती हैं और यहां के कारीगर अपनी कला से देश-दुनिया को कपड़े भेजते हैं. अब यह शहर सिर्फ कपड़े तक सीमित नहीं रहा. नई टेक कंपनियां, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर उद्योग भी यहां पनप रहे हैं. सूरत तेजी से स्मार्ट और डिजिटल शहर बन रहा है.

सूरत, कपड़ा नगरी से स्मार्ट सिटी तक

सूरत गुजरात का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और भारत का आठवां सबसे बड़ा शहरी केंद्र है. यह ताप्ती नदी के किनारे बसा है और अरब सागर के करीब स्थित है. कभी यह एक बड़ा बंदरगाह हुआ करता था, लेकिन आज यह कपड़ा और हीरा उद्योग का वैश्विक केंद्र बन चुका है. साल 2016 में सूरत दुनिया का चौथा सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर माना गया. साल 2013 में इसे भारत का सर्वश्रेष्ठ शहर चुना गया था. साल 2015 में इसे स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शामिल किया गया. साल 2017 में यह भारत का चौथा सबसे स्वच्छ शहर बना.

सोर्स: SITA

भारत की सिल्क सिटी और टेक्सटाइल राजधानी

सूरत को भारत की सिल्क सिटी कहा जाता है. यह देश का सबसे बड़ा सिंथेटिक टेक्सटाइल उत्पादक शहर है. यहां लगभग 7,20,000 पावरलूम और हैंडलूम चलते हैं. हर दिन करीब 25 मिलियन मीटर कपड़ा तैयार होता है. देशभर के व्यापारी सूरत से कपड़ा खरीदते हैं. शादी, त्योहार और रोजमर्रा के कपड़ों के लिए सूरत प्रमुख आपूर्ति केंद्र है. यहां साड़ियों से लेकर ड्रेस मटीरियल तक सब कुछ मिलता है.

दुनिया की डायमंड राजधानी

कपड़े के साथ-साथ सूरत हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग का सबसे बड़ा केंद्र भी है. दुनिया के 10 में से 8 हीरे यहीं प्रोसेस होते हैं. शहर में 10,000 से ज्यादा डायमंड यूनिट्स हैं और 3,500 से अधिक प्रोसेसिंग यूनिट्स काम कर रही हैं. सालाना कारोबार करीब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. सूरत विशेष आर्थिक क्षेत्र में डायमंड पार्क भी स्थित है. आने वाले समय में सूरत डायमंड बोर्स 10,000 से ज्यादा दफ्तरों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा केंद्र बनेगा.

सूरत में कई बड़ी और भरोसेमंद डायमंड कंपनियां हैं. इनमें सबसे मशहूर है किरण जेम्स, जो दुनिया की सबसे बड़ी नैतिक (Ethical) हीरा बनाने वाली कंपनी है. इसके अलावा हरी कृष्णा डायमंड्स, वीनस ज्वेल, धर्मानंदन डायमंड्स, मीरा जेम्स और अंत्रिक्ष एक्सिम भी बड़े नाम हैं. इन कंपनियों का काम कच्चे हीरे खरीदना, उन्हें काटना, चमकाना और फिर दुनिया भर में बेचना है.

बढ़ती चुनौतियां और गिरते ऑर्डर

हाल के सालों में वैश्विक मंदी, शिपिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी और विकसित देशों के नए टैरिफ नियमों ने सूरत के निर्यातकों पर दबाव बढ़ा दिया है. CRISIL Intelligence के मुताबिक कई छोटे और मझोले टेक्सटाइल यूनिट्स में प्रोडक्शन 20-30 फीसदी तक घट गया है. निर्यातकों का कहना है कि ऑर्डर धीरे-धीरे वियतनाम, बांग्लादेश और तुर्की की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जहां लागत कम है और व्यापार शर्तें आसान हैं. डायमंड सेक्टर भी वैश्विक मांग में नरमी के कारण धीमापन महसूस कर रहा है, जिससे हजारों कारीगरों की नौकरी पर असर पड़ा है.

बजट से क्या उम्मीद?

अब इंडस्ट्री की नजर आगामी बजट पर है. सूरत के उद्योगपति चाहते हैं:

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए, तो सूरत की सप्लाई चेन स्थायी रूप से दूसरे देशों की ओर शिफ्ट हो सकती है और इसका असर लाखों परिवारों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा.

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