अब ATF में ब्लेंड होंगे सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन, जानें क्या है यह नई तकनीक और क्यों लिया गया फैसला
सरकार का यह कदम एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. ATF में सिंथेटिक फ्यूल को शामिल करने से भारत फ्यूचर की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होगा. साथ ही, यह कदम पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
ATF New Rules India: भारत में एविएशन सेक्टर को लेकर एक बड़ा बदलाव किया गया है. सरकार ने अब प्लेन के फ्यूल यानी Aviation Turbine Fuel (ATF) में सिंथेटिक फ्यूल मिलाने की इजाजत दे दी है. इस फैसले का मकसद बदलती ऊर्जा जरूरतों और वैकल्पिक फ्यूल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साफ नियम तय करना है.
क्या है नया नियम?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ATF से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए इसकी परिभाषा को अपडेट किया है. अब ATF सिर्फ पारंपरिक हाइड्रोकार्बन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन का मिश्रण भी शामिल किया जा सकेगा.
इस बदलाव के तहत:
- ATF अब IS 1571 स्टैंडर्ड के साथ-साथ IS 17081 के तहत सिंथेटिक ब्लेंड भी शामिल करेगा.
- यह संशोधन Aviation Turbine Fuel (Regulation of Marketing) Order, 2001 में किया गया है.
- नया नियम सरकारी गजट में प्रकाशित होते ही लागू हो जाएगा.
सिंथेटिक फ्यूल क्या होता है?
सिंथेटिक फ्यूल ऐसा ईंधन होता है जो प्राकृतिक कच्चे तेल से नहीं, बल्कि केमिकल प्रोसेस के जरिए तैयार किया जाता है. इसमें बायोफ्यूल, गैस-टू-लिक्विड या दूसरे तकनीकों से बने फ्यूल शामिल हो सकते हैं.
इसका फायदा यह है कि:
- यह पारंपरिक फ्यूल पर निर्भरता कम करता है.
- पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जाता है.
- लंबे समय में एविएशन सेक्टर को स्थिरता देता है.
सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है. खासतौर पर ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पकड़ मजबूत करने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर असर पड़ रहा है. ऐसे में भारत वैकल्पिक फ्यूल की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के सप्लाई संकट से बचा जा सके.
कानूनी और नियमों में क्या बदलाव हुए?
सरकार ने सिर्फ फ्यूल की परिभाषा ही नहीं बदली, बल्कि नियमों को भी अपडेट किया है. अब इस ऑर्डर के तहत तलाशी और जब्ती के मामलों में Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 की धारा 103 लागू होगी. पुराने नियमों में मौजूद कुछ संदर्भ जैसे “IBP Co. Limited” को हटा दिया गया है. इसका मकसद नियमों को आधुनिक बनाना और लागू करने में स्पष्टता लाना है.
इसे भी पढ़ें- इन 4 कंपनियों के ऑर्डर बुक के सामने बौना पड़ गया मार्केट कैप! Indian Railway है क्लाइंट, 1450% तक उछले शेयर
Latest Stories
टाटा ग्रुप के इस शेयर पर ब्रोकरेज है बुलिश, जानें- कितना दिया टारगेट; चौथी तिमाही में रहा जोरदार प्रदर्शन
HSBC ने भारतीय इक्विटीज की रेटिंग घटाकर ‘अंडरवेट’ की, तेल की बढ़ती कीमतों को बताया खतरा
पहली बार प्राइवेट सेक्टर के लिए खुल सकता है BSNL CMD का पद, सरकार बाहरी विकल्प पर कर रही विचार
