सरकार ने डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स घटाया, पेट्रोल पर ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं
डीजल एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की कुल दर अब 20 रुपये प्रति लीटर से घटकर 16 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी. वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध के बीच ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 'विंडफॉल टैक्स' लगाया गया था.
Highlights
- पेट्रोल एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 0.5 रुपये प्रति लीटर ही रखी गई है.
- ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 'विंडफॉल टैक्स' लगाया गया था.
- पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना था.
सरकार ने बुधवार को डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल गेन्स टैक्स में कटौती की, जबकि 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए पेट्रोल पर इसे उसी स्तर पर बनाए रखा है.
कितनी घटेगी ड्यूटी?
डीजल एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की कुल दर अब 20 रुपये प्रति लीटर से घटकर 16 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी. ATF एक्सपोर्ट पर SAED को मौजूदा 15 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
अगले दो हफ्तों के लिए पेट्रोल एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 0.5 रुपये प्रति लीटर ही रखी गई है. वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि बदली हुई ड्यूटी दरें 1 अक्टूबर से लागू होंगी.
कब लगाई गई थी ड्यूटी?
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, सरकार ने 27 मार्च को डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी और हर दो हफ्ते में इसकी दर में बदलाव किया था. 16 मई से पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर भी यह लेवी (टैक्स) लगाई गई थी.
मंत्रालय ने यह भी कहा कि घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
क्यों लगाया गया था विंडफॉल टैक्स?
वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध के बीच ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘विंडफॉल टैक्स’ लगाया गया था. इसका मकसद एक्सपोर्टर्स को कीमतों के अंतर का गलत फायदा उठाने से रोकना भी था, खासकर इसलिए क्योंकि संघर्ष शुरू होने के बाद ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गई थीं.
इस टैक्स का मकसद वेस्ट एशिया संकट के दौरान एक्सपोर्ट को कम करके पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना था.
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