नए साल में मनोरंजन पर पड़ेगी महंगाई की मार! 10% तक बढ़ सकती है इस चीज की कीमत; जानें वजह

नए साल 2026 की शुरुआत में टीवी खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं को झटका लग सकता है. जनवरी से टेलीविजन की कीमतों में 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना है. मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत और रुपये के 90 प्रति डॉलर के पार जाने से टीवी कंपनियों की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ने वाला है.

बढ़ सकती है टीवी की कीमत Image Credit: @Canva/Money9live

TV Prices Surges From 2026 January: नए साल यानी 2026 की शुरुआत में टीवी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को झटका लग सकता है. जनवरी से टेलीविजन की कीमतों में 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की संभावना है. इसकी दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं- मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें और रुपये की कमजोरी, जो हाल ही में पहली बार 90 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है. आइए विस्तार से इस विषय की जानकारी देते हैं.

कमजोर रुपया और इंपोर्ट पर निर्भरता बनी बड़ी समस्या

पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी इंडस्ट्री इस समय दबाव में है, क्योंकि भारत में बनने वाले एलईडी टीवी में घरेलू वैल्यू एडिशन सिर्फ करीब 30 फीसदी ही होता है. बाकी के अहम पार्ट्स जैसे ओपन सेल, सेमीकंडक्टर चिप्स और मदरबोर्ड विदेशों से आयात किए जाते हैं. ऐसे में रुपये के कमजोर होते ही कंपनियों की लागत सीधे बढ़ जाती है, जिसका असर कीमतों पर पड़ना तय है. इसके साथ ही दुनिया भर में मेमोरी चिप की भारी किल्लत भी टीवी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा रही है. दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्वर के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की मांग तेजी से बढ़ी है. इसके चलते चिप निर्माता ज्यादा मुनाफे वाले AI चिप्स पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे टीवी जैसे डिवाइस के लिए इस्तेमाल होने वाली DRAM और फ्लैश मेमोरी की सप्लाई सख्त हो गई है और दाम आसमान छूने लगे हैं.

कंपनियों ने बढ़ोतरी के दिए संकेत

पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में हायर अप्लायंसेज इंडिया के प्रेसिडेंट एनएस सतीश के हवाले से कहा कि मेमोरी चिप की कमी और रुपये की गिरावट के चलते एलईडी टीवी की कीमतों में करीब 3 फीसदी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है. कुछ टीवी कंपनियों ने तो अपने डीलर्स को पहले ही आने वाली कीमत बढ़ोतरी की जानकारी दे दी है. सुपर प्लास्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (SPPL), जो थॉमसन, कोडक और ब्लाउपंक्ट जैसे ग्लोबल ब्रांड्स के टीवी बनाती है, ने भी हालात को गंभीर बताया है.

कितनी बढ़ सकती है कीमत?

कंपनी के सीईओ अवनीत सिंह मारवाह के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में मेमोरी चिप की कीमतें करीब 500 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं. ऐसे में जनवरी से टीवी के दाम 7 से 10 फीसदी तक बढ़ सकते हैं. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अगले दो तिमाहियों तक चिप्स की कीमतों में राहत नहीं मिली, तो आगे और भी महंगाई देखने को मिल सकती है.

GST में कटौती का फायदा हो सकता है कम

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाली यह कीमत बढ़ोतरी, हाल ही में GST में कटौती से मिले फायदे को काफी हद तक खत्म कर सकती है. सरकार ने 32 इंच और उससे बड़े टीवी पर GST 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया था, जिससे करीब 4,500 रुपये तक की राहत मिली थी. लेकिन अब दाम बढ़े तो यह फायदा सीमित रह सकता है. घरेलू ODM कंपनी वीडियोटेक्स, जो डाइवा ब्रांड के साथ-साथ कई बड़े ब्रांड्स के लिए स्मार्ट टीवी बनाती है, ने भी स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताया है. कंपनी के डायरेक्टर अर्जुन बजाज के मुताबिक, फ्लैश मेमोरी और DDR4 चिप्स की कीमतें 1,000 फीसदी तक बढ़ गई हैं, क्योंकि सप्लाई का बड़ा हिस्सा AI डेटा सेंटर्स की ओर चला गया है.

कब तक रह सकता है दबाव?

वीडियोटेक्स का कहना है कि यह दबाव कम से कम अगले साल की दूसरी तिमाही (Q2) तक बना रह सकता है. रुपये की कमजोरी ने आयात लागत और बढ़ा दी है. जैसे-जैसे पुराना स्टॉक खत्म होगा, इसका असर बाजार में साफ नजर आएगा. हालांकि कंपनी प्रोडक्शन शेड्यूल और इन्वेंट्री मैनेजमेंट के जरिए असर कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले इस चक्र में पूरी लागत खुद झेल पाना मुश्किल है.

स्मार्ट टीवी की मांग भी हुई धीमी

काउंटरपॉइंट रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, Q2 2025 में भारत में स्मार्ट टीवी की शिपमेंट सालाना आधार पर 4 फीसदी घट गई. इसकी वजह छोटे स्क्रीन सेगमेंट में बाजार का संतृप्त होना, नए डिमांड ट्रिगर की कमी और ग्राहकों के खर्च में सुस्ती बताई गई है. इसके बावजूद भारत का टीवी बाजार 2024 में 10-12 अरब डॉलर का रहा है और आने वाले सालों में इसमें अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है. स्मार्ट टीवी की बढ़ती लोकप्रियता, लोगों की बढ़ती आमदनी, बड़े स्क्रीन की मांग और OTT कंटेंट का चलन इस सेक्टर को आगे बढ़ाने वाले बड़े फैक्टर बने रहेंगे.

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