जनवरी में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ 3 महीने के निचले स्तर पर, जानें क्या संकेत दे रहे आंकड़े?
हाल के जीडीपी आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. तीसरी तिमाही में यह सेक्टर सालाना आधार पर 13.3 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछली तिमाही के 13.2 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा है. फरवरी में मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.9 के चार महीने के हाई पर पहुंचा.
जनवरी महीने में भारत का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ घटकर 4.8 प्रतिशत रह गई, जो पिछले तीन महीने का निचला स्तर है. दिसंबर में यह दर 7.8 प्रतिशत थी. सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है. हालांकि यह गिरावट साल के आखिर में आई तेज उछाल के बाद सामान्य स्थिति में लौटने जैसी मानी जा रही है, न कि ट्रेंड में बड़ी कमजोरी के रूप में. अगर पूरे वित्त वर्ष 26 को देखें तो अप्रैल में ग्रोथ 2.57 प्रतिशत, मई में 1.87 प्रतिशत और जून में घटकर 1.52 प्रतिशत तक पहुंच गई थी.
साल के आखिर में दिखी थी जोरदार तेजी
नवंबर में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ 7.2 प्रतिशत रही थी. दिसंबर में यह बढ़कर 8 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो करीब एक साल की सबसे तेज रफ्तार थी. इसके मुकाबले जनवरी का 4.8 प्रतिशत का आंकड़ा थोड़ी बेहतर जरूर दिखाता है.
पूरे साल में रही उतार-चढ़ाव की स्थिति
पूरे वित्त वर्ष 26 में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अप्रैल में ग्रोथ 2.57 प्रतिशत, मई में 1.87 प्रतिशत और जून में घटकर 1.52 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. इसके बाद साल की दूसरी छमाही में रिकवरी शुरू हुई. जुलाई में 4.27 प्रतिशत और सितंबर में 4.63 प्रतिशत तक सुधार आया. हालांकि अक्टूबर में ग्रोथ एक बार फिर 0.53 प्रतिशत तक फिसल गई थी. नवंबर और दिसंबर में मजबूत उछाल के बाद जनवरी में थोड़ी नरमी दिखी है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ब्राइट स्पॉट
हाल के जीडीपी आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. तीसरी तिमाही में यह सेक्टर सालाना आधार पर 13.3 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछली तिमाही के 13.2 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा है. फरवरी में मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.9 के चार महीने के हाई पर पहुंचा, जिससे आने वाले महीनों में इंडस्ट्रियल एक्टिविटी में मजबूती का संकेत मिलता है.
चौथी तिमाही में हल्की सुस्ती के संकेत
सरकार ने जनवरी से मार्च तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया है, जो तीसरी तिमाही के 7.8 प्रतिशत अनुमान से थोड़ा कम है. इससे संकेत मिलता है कि चौथी तिमाही में रफ्तार थोड़ी नरम पड़ सकती है.
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