USA Israel Iran War: ‘युद्ध क्षेत्र’ वाले 8 देशों में रहते हैं 90 लाख भारतीय, हर साल भेजते हैं इतने लाख करोड़, सबसे ज्यादा इस देश से आता है पैसा

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के बीच खाड़ी देशों में लाखों भारतीय फंसे हुए हैं. यूएई, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे देशों में बड़ी भारतीय आबादी रहती है जो भारत को हर साल अरबों डॉलर रेमिटेंस भेजती है. युद्ध बढ़ने पर इन प्रवासियों की सुरक्षा और भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है.

अमेरिका ईरान इजरायल युद्ध, Image Credit: canva

USA Israel Iran War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने मिडिल ईस्ट को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है. इस संघर्ष का असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति या तेल बाजार तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा प्रभाव उन लाखों भारतीयों पर भी पड़ सकता है जो खाड़ी और आसपास के देशों में काम कर रहे हैं. ये प्रवासी भारतीय न केवल वहां की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी कमाई का स्रोत हैं. ईरान, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और इराक में युद्ध और हमलों के कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है. आइये जानते हैं कि इन देशों (‘वॉरजोन’) में कितने अप्रवासी भारतीय (NRI) रहते हैं?

NRIs के आंकड़ें

दरअसल, खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यूएई में करीब 35.68 लाख भारतीय, सऊदी अरब में 24.63 लाख, कुवैत में करीब 9.95 लाख, कतर में 8.36 लाख, ओमान में 6.86 लाख और बहरीन में करीब 3.27 लाख भारतीय रहते हैं. इसके अलावा इजरायल में करीब 1.05 लाख भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं, जबकि ईरान में लगभग 10,765 भारतीय रह रहे हैं. मौजूदा युद्ध जैसे हालात के कारण इन भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

देशएनआरआई (NRI)पीआईओ (PIO)कुल
बहरीन3.23 लाख3,8993.27 लाख
सऊदी अरब24.60 लाख2,90624.63 लाख
कतर8.35 लाख1,6098.36 लाख
यूएई35.54 लाख14,57435.68 लाख
कुवैत9.93 लाख2,2449.95 लाख
ओमान6.84 लाख1,8646.86 लाख
ईरान10,32044510,765
इजरायल20,00085,0001.05 लाख

कुल 89.91 लाख भारतीय

सोर्स: विदेश मंत्रालय

NRIs से आता है कितना रेमिटेंस

अगर खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख देशों में भारतीयों की मौजूदगी देखें तो साफ होता है कि गल्प कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों में रहने वाले भारतीय दुनिया भर में बसे भारतीय प्रवासियों का लगभग आधा हिस्सा हैं. यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष भारत के लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन जाता है. प्रवासी भारतीयों का भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान मुख्य रूप से रेमिटेंस (विदेश से भेजी जाने वाली कमाई) के जरिए होता है. भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों में शामिल है. हर साल भारत को करीब 135 अरब डॉलर (लगभग ₹11 लाख करोड़) से ज्यादा की रकम विदेशों में काम कर रहे भारतीयों से मिलती है.

किस खड़ी देश से कितना रेमिटेंस

आरबीआई के रेमिटेंस सर्वे 2025 के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में भारत को कुल 118.7 अरब डॉलर की रेमिटेंस प्राप्त हुई. इसमें सबसे बड़ा योगदान अमेरिका का रहा, जिसकी हिस्सेदारी 27.7% है. इसके बाद यूएई 19.2% के साथ दूसरे स्थान पर है. वहीं, खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में सऊदी अरब 6.7%, कतर 4.1%, कुवैत 3.9% और ओमान 2.9% योगदान देते हैं. जो करीब 4 लाख करोड़ रुपये रकम होती है.

देशप्रतिशत हिस्सेदारीअनुमानित राशि (अरब डॉलर में)
अमेरिका27.7%32.88
यूएई19.2%22.79
सऊदी अरब6.7%7.95
कतर4.1%4.87
कुवैत3.9%4.63
ओमान2.9%3.44

क्या पड़ सकता है असर

इसका मतलब है कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष और बढ़ता है और वहां काम कर रहे भारतीयों के रोजगार या आय पर असर पड़ता है, तो इसका असर भारत में आने वाले रेमिटेंस पर भी पड़ सकता है. इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, घरेलू खपत और कई राज्यों की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं.

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