₹1.86 लाख करोड़ से बदलेगा ग्रीन एनर्जी का नेटवर्क! जानें क्या है PM DHARA योजना

केंद्र सरकार ने 1,86,405 करोड़ रुपये की PM-DHARA योजना को मंजूरी दी है. इसका मकसद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करके 135 GW तक रिन्यूएबल एनर्जी की निकासी करना है. योजना में 50 GWh बैटरी स्टोरेज के लिए 50,000 करोड़ रुपये और राज्य के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये रखे गए हैं.

ग्रीन एनर्जी Image Credit: Canva/ Money9

Highlights

  • PM DHARA का उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही सौर और पवन ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है.
  • भारत में तेजी से बढ़ रही रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के बीच ट्रांसमिशन की कमी एक बड़ी समस्या बन रही है.
  • रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन मुख्य रूप से उन इलाकों में होता है जहां सूरज और हवा जैसे प्राकृतिक संसाधन ज्यादा उपलब्ध हैं.

PM DHARA Scheme: केंद्र सरकार ने देश में रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने और उसे ग्रिड तक पहुंचाने के लिए PM-DHARA (PM-Developing Harmonized and Accelerated Renewable-energy Access) योजना को मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई. इसका मकसद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में Intra-State Transmission System को मजबूत करना और 135 GW तक की रिन्यूएबल एनर्जी की निकासी की सुविधा तैयार करना है.

₹1.86 लाख करोड़ का प्रोजेक्ट

PM-DHARA योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए कुल 1,86,405 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट खर्च तय किया गया है. इसमें 1,36,378 करोड़ रुपये ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज -III के तहत Intra-State Transmission Systems विकसित करने पर खर्च किए जाएंगे. वहीं 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

135 GW ग्रीन एनर्जी को ग्रिड तक पहुंचाने की तैयारी

PM-DHARA योजना के जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिन्यूएबल एनर्जी की ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. इससे 135 GW तक की रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. इसका मकसद रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली को बेहतर तरीके से ग्रिड में शामिल करना और राज्यों के भीतर बिजली की निकासी की क्षमता बढ़ाना है.

50 GWh की बैटरी स्टोरेज क्षमता

योजना के तहत 50 GWh Battery Energy Storage Systems लगाए जाएंगे. इन्हें रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर या बिजली उत्पादक के स्तर पर या ग्रिड के लिए महत्वपूर्ण दूसरी जगहों पर लगाया जा सकेगा. इस बैटरी स्टोरेज का इस्तेमाल रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव, ट्रांसमिशन पर बढ़ते दबाव और पीक आवर्स के दौरान बिजली में कटौती जैसी समस्याओं को संभालने के लिए किया जाएगा.

इसके अलावा, जब सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होगी, तब स्टोरेज सिस्टम बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करेगा. इससे रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में बेहतर तरीके से शामिल करने में मदद मिलेगी.

₹54,082 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय मदद

सरकार PM-DHARA योजना के लिए कुल 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता भी देगी. इस सहायता का इस्तेमाल राज्यों के भीतर ट्रांसमिशन शुल्क के बोझ को कम करने में मदद के लिए किया जाएगा. इससे बिजली की लागत को कम रखने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिसका फायदा आखिरकार बिजली उपभोक्ताओं को मिल सकता है.

नई और पुरानी ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए अलग व्यवस्था

PM-DHARA के तहत नई यानी ग्रीन फिल्ड परियोजनाओं को Tariff Based Competitive Bidding (TBCB) के जरिए लागू किया जाएगा. वहीं मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करने और उसमें सुधार से जुड़े Brownfield काम Cost Plus Basis (CPB) पर किए जाएंगे. इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी State Transmission Utilities की होगी. वहीं TBCB के तहत चुने गए Transmission Service Providers Build-Own-Operate-Maintain (BOOM) मॉडल के जरिए परियोजनाओं का निर्माण, स्वामित्व, संचालन और रखरखाव करेंगे.

2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य

PM-DHARA योजना का उद्देश्य भारत के 2035 तक 900 GW की स्थापित गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करना भी है. सरकार के मुताबिक, इस योजना से देश की लंबे समय की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ाने से देश के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.

रोजगार के भी बढ़ेंगे मौके

PM-DHARA योजना से बिजली, मैन्युफैक्चरिंग और निर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. इसके अलावा, BESS के निर्माण और इस्तेमाल के बढ़ने से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं. वहीं इन सिस्टम के संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन से राज्यों में लंबे समय के लिए कुशल रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

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