गाजियाबाद–जेवर रैपिड रेल फिर पटरी पर, रूट में नहीं होगा कोई बदलाव; NCR को मिलेगा हाई-स्पीड कनेक्शन

गाजियाबाद से जेवर तक प्रस्तावित रैपिड रेल परियोजना एक बार फिर पूरी तरह पटरी पर आ गई है. YEIDA ने स्पष्ट किया है कि रूट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और परियोजना अपने मूल एलाइनमेंट पर ही आगे बढ़ेगी. यह कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, नोएडा और जेवर एयरपोर्ट को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देगा.

रैपिड रेल Image Credit: Sakib Ali/HT via Getty Images

Ghaziabad Jewar RRTS: गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर तक प्रस्तावित रैपिड रेल कॉरिडोर एक बार फिर पूरी तरह पटरी पर आ गया है. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने अस्थायी रूप से रोके जाने के बाद अब यह परियोजना अपने मूल रूट पर ही आगे बढ़ेगी. YEIDA के अधिकारियों ने साफ किया है कि गाजियाबाद–जेवर रूट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. इस परियोजना को उत्तर प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2025 में मंजूरी दी थी और अब इसे दिल्ली की ओर डायवर्ट करने का विचार पूरी तरह खारिज कर दिया गया है. 29 दिसंबर को हुई बैठक में अंतिम फैसला लिया गया कि गाजियाबाद–जेवर रूट को ही बरकरार रखा जाएगा.

क्यों अहम है गाजियाबाद–जेवर रूट

YEIDA के मुताबिक यह कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहरों, नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट को हाई-स्पीड एयरपोर्ट कनेक्टिविटी देगा. इसके साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हो रहे रिहायशी, शहरी और औद्योगिक सेक्टरों को भी सीधा लाभ मिलेगा. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पहले से तैयार DPR में किसी तरह के बदलाव का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है.

कैसा होगा रैपिड रेल कॉरिडोर

DPR के अनुसार यह एक एलिवेटेड रैपिड रेल-कम-मेट्रो कॉरिडोर होगा, जिसमें कुल 22 स्टेशन प्रस्तावित हैं. इनमें से आधे स्टेशन रैपिड रेल और आधे मेट्रो सेवाओं के लिए होंगे. यह लाइन दिल्ली–मेरठ कॉरिडोर के गाजियाबाद RRTS स्टेशन से शुरू होकर सिद्धार्थ विहार, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, नॉलेज पार्क 5, सूरजपुर और अल्फा-1 से होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक जाएगी. परियोजना की अनुमानित लागत करीब 20,360 रुपये करोड़ है और इसे 5 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

मेट्रो लाइनों का होगा इंटीग्रेशन

इस कॉरिडोर में नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन के एक्सटेंशन का करीब 10 किलोमीटर हिस्सा भी शामिल किया जाएगा. चार मूर्ति चौक पर एक इंटीग्रेटेड स्टेशन प्रस्तावित है. इसके अलावा YEIDA सेक्टर 21 से एयरपोर्ट तक प्रस्तावित लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम को भी भविष्य में RRTS नेटवर्क में जोड़ा जा सकता है.

केंद्र सरकार की आपत्तियां और जवाब

इससे पहले मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स ने DPR पर कुछ आपत्तियां जताई थीं. इनमें दिल्ली से सीधे कनेक्शन की कमी और मेट्रो व रैपिड रेल को एक ही कॉरिडोर पर चलाने को लेकर सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं. YEIDA का कहना है कि यह प्रोजेक्ट मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन पर आधारित है और आने वाले समय में यह दिल्ली–मेरठ RRTS, रेड लाइन मेट्रो, एक्वा लाइन और भविष्य की हाई-स्पीड रेल से जुड़ेगा.

नए नामो भारत कॉरिडोर की तैयारी

जेवर के अलावा NCR में नए नामो भारत कॉरिडोर भी प्रस्तावित हैं. दिल्ली–गुरुग्राम–बावल और दिल्ली–पानीपत–करनाल कॉरिडोर से सड़कों पर करीब 2 लाख वाहन कम होने का अनुमान है. अधिकारियों के मुताबिक, इससे न सिर्फ यात्रा समय घटेगा, बल्कि प्रदूषण और ट्रैफिक जाम में भी बड़ी राहत मिलेगी.

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