पांच साल में सड़क हादसे में 7.78 लाख मौतें, 43% रहे बाइक सवार, सड़क सुरक्षा पर सख्त रुख अपनाएगी सरकार

देश में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है, खासकर दो-पहिया वाहनों से जुड़े हादसों को लेकर. हाल के आंकड़ों और सरकार के रुख ने इस मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है. आने वाले समय में नियमों और सख्ती से जुड़े फैसले इस तस्वीर को बदल सकते हैं.

Road Accident Image Credit: Canva

भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले चुकी हैं. खास तौर पर दो-पहिया वाहन हादसों में होने वाली मौतें चिंता का सबसे बड़ा कारण बन गई हैं. 2019 से 2023 के बीच देश में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों में करीब आधे दो-पहिया वाहन सवार थे. सरकार इस बढ़ते खतरे को देखते हुए सड़क सुरक्षा को लेकर बड़े बदलावों की तैयारी में है.

पांच साल में 7.78 लाख मौतें, हर दूसरा व्यक्ति दो-पहिया सवार

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 से 2023 के बीच देश में सड़क दुर्घटनाओं में कुल 7.78 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें करीब 3.35 लाख (43 फीसदी) मौतें दो-पहिया वाहन हादसों में हुईं. 2023 में ही सड़क हादसों में मरने वालों में 45 प्रतिशत यानी 77,539 लोग दो-पहिया वाहन चला रहे थे. इनमें से लगभग 50 हजार लोग ऐसे थे जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था. राजधानी दिल्ली में भी सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले दो-पहिया सवारों का हिस्सा करीब 38 प्रतिशत रहा.

देश में दो-पहिया वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि कुल सड़क दुर्घटनाओं में दो-पहिया सवारों की मौतों की हिस्सेदारी 2014 में 30 प्रतिशत थी, जो 2023 तक बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई. यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि अगर हालात नहीं बदले, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.

सरकार की तैयारी, ABS और हेलमेट पर सख्ती

इस बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. मंत्री Nitin Gadkari ने बताया कि 1 जनवरी 2026 के बाद बनने वाले सभी दो-पहिया वाहनों में, चाहे उनकी इंजन क्षमता 125cc से कम ही क्यों न हो, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम यानी ABS अनिवार्य होगा. इसके अलावा अब हर दो-पहिया वाहन के साथ डीलर को दो BIS-प्रमाणित हेलमेट देना भी जरूरी कर दिया गया है.

हर साल 1.8 लाख मौतें, नया रोड सेफ्टी बिल प्राथमिकता

नितिन गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.8 लाख लोगों की जान जाती है. इनमें से 66 प्रतिशत मौतें 18 से 34 साल की उम्र के युवाओं की होती हैं. उन्होंने माना कि यह स्थिति बेहद गंभीर है और इसी वजह से 2026 में नया रोड सेफ्टी बिल लाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.

विशेषज्ञों की राय, कानून और व्यवहार दोनों जिम्मेदार

SaveLIFE Foundation के संस्थापक पियूष तिवारी ने पीटीआई के हवाले से कहा है कि दो-पहिया सवार सबसे ज्यादा असुरक्षित होते हैं, क्योंकि उन्हें किसी वाहन ढांचे की सुरक्षा नहीं मिलती. 2023 में दो-पहिया सवारों की 70 प्रतिशत मौतें हेलमेट न पहनने की वजह से हुईं. इसके अलावा ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना और लेन अनुशासन की कमी भी हादसों की बड़ी वजह हैं.

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Society of Indian Automobile Manufacturers का कहना है कि देश में हर साल करीब दो करोड़ दो-पहिया वाहन बिकते हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत 125cc से कम क्षमता वाले होते हैं. ऐसे में सख्त नियमों के साथ जागरूकता भी जरूरी है. वहीं International Road Federation ने दो-पहिया वाहनों के लिए अलग लेन, सख्त कानून और हेलमेट पर जीएसटी शून्य करने की मांग की है. इस संबंध में प्रधानमंत्री Narendra Modi को भी पत्र लिखा गया है.