T20 वर्ल्ड कप का वो मैच, जिसमें पहली बार दिखी थी धोनी की टैक्टिकल समझ; पाकिस्तान को नए अंदाज में दी थी पटखनी

T20 World Cup: वर्ल्ड कप की शुरुआत 7 फरवरी से होगी, तो अभी कुछ दिनों का वक्त बाकी है. तो इस बीच चलिए उस मैच पर एक नजर डाल लेते हैं, जिसने पहले T20 वर्ल्ड कप का मिजाज सेट कर दिया था, क्योंकि मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया था.

टी-20 विश्व कप 2007 का रोमांचक मैच. Image Credit: Getty image

T20 World Cup: एक बार फिर से वर्ल्ड कप का खुमार फैंस पर छाने को बेताब है. स्टेडियम सजने लगे हैं, टिकटें बिकने लगी हैं और टीमों ने अपनी कमर कस ली है. आईसीसी T20 वर्ल्ड कप एक बार फिर लौट आया है. आईसीसी T20 वर्ल्ड 2026 भारत और श्रीलंका संयुक्त रूप से आयोजित कर रहे हैं. वर्ल्ड कप की शुरुआत 7 फरवरी से होगी, तो अभी कुछ दिनों का वक्त बाकी है. तो इस बीच चलिए उस मैच पर एक नजर डाल लेते हैं, जिसने पहले T20 वर्ल्ड कप का मिजाज सेट कर दिया था, क्योंकि मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया था.

इंटरनेशनल क्रिकेट में एक नया चैप्टर

T20 वर्ल्ड कप 2007 ने इंटरनेशनल क्रिकेट में एक नया चैप्टर शुरू किया था और इसके सबसे यादगार पलों में से एक 14 सितंबर, 2007 को भारत और पाकिस्तान के बीच ग्रुप स्टेज मैच के दौरान आया. दोनों देशों के बीच कड़ी टक्कर ने इसे एक बहुत ही रोमांचक मुकाबला बना दिया, और जो हुआ वो फैंस के दिलों-दिमाग में आज तक जवां हैं.

दोनों टीमों ने बनाए एक बराबर रन

दोनों टीमों ने अपने 20 ओवर की पारी 141 रन बनाकर टाई पर खत्म की. पहले बैटिंग करते हुए भारत ने 141/9 रन बनाए, जिसमें रॉबिन उथप्पा ने सबसे अधिक 50 रन बनाए, जबकि एमएस धोनी और इरफान पठान के योगदान से भारत एक अच्छा टोटल बनाने में कामयाब रहा. पाकिस्तान के मोहम्मद आसिफ सबसे सफल बॉलर रहे, जिन्होंने 18 रन देकर 4 विकेट चटाए.

जीत के लिए 142 रनों का पीछा करने उसरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत में ही मुश्किल में फंस गई, क्योंकि भारतीय गेंदबाजों की सधी हुई गेंदबाजी ने उन्हें स्कोरबोर्ड को सरपट दौड़ाने का मौका नहीं दिया.

बॉल-आउट में चला गया मैच

हालांकि, मिस्बाह-उल-हक ने 53 रनों की अहम पारी खेलकर पाकिस्तान को मैच में बनाए रखा, लेकिन 20 ओवरों में पाकिस्तान की टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई. एक रोमांचक आखिरी ओवर में श्रीसंत ने धैर्य बनाए रखते हुए आखिरी गेंद पर मिस्बाह को आउट कर दिया, जिससे पाकिस्तानी पारी 141/7 पर खत्म हो गई.

दोनों टीमों का स्कोर बराबर पर आ खड़ा हुआ और मैच टाई हो गया. चूंकी मैच का नतीजा निकलना था, तो बाउल-आउट की शुरुआत हुई. अब मैच एक रोमांचक मोड़ पर था, जिसमें विजेता का फैसला बॉल-आउट से होना था.

भारत ने ऐतिहासिक बॉल-आउट जीता

बाउल-आउट उस समय T20 क्रिकेट में इस्तेमाल किया जाने वाला एक दुर्लभ टाई-ब्रेकिंग तरीका था. इसमें दोनों टीमों के खिलाड़ियों को बल्लेबाज के बिना गार्ड वाले स्टंप्स पर गेंद फेंकनी होती थी और जो टीम सबसे अधिक बार स्टंप्स पर गेंद मारती, वह जीत जाती.

धोनी की टैक्टिकल समझ

यहीं पर MS धोनी की टैक्टिकल समझ काम आई. पाकिस्तान के उलट, जिसने अपने तेज गेंदबाजों पर भरोसा किया, धोनी ने वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और रॉबिन उथप्पा को चुनकर एक साहसिक फैसला लिया, इनमें से दो स्पेशलिस्ट गेंदबाज नहीं थे, लेकिन उनकी एक्यूरेसी बेहतर थी. यह चाल काम कर गई, क्योंकि तीनों ने अपनी गेंदों से स्टंप्स पर जमी गिल्लियां बिखेर दीं.

इसके उलट, पाकिस्तान के यासिर अराफात, उमर गुल और शाहिद अफरीदी विकेट को हिट करने में सफल नहीं हो पाए, जिससे भारत ने बाउल-आउट में 3-0 से जीत हासिल की. ​​इस तनावपूर्ण माहौल में धोनी की शांत लीडरशिप और समझदारी भरे फैसलों ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई.

जीतने के सफर की नींव

यह मैच न सिर्फ अनोखे बॉल-आउट के लिए मशहूर हुआ, बल्कि इसमें धोनी की टैक्टिकल समझ भी दिखी, जिसने बाद में उनकी कप्तानी को परिभाषित किया. बॉल-आउट में भारत की जीत ने पहले T20 वर्ल्ड कप जीतने के उनके सफर की नींव रखी. फ़ैंस के लिए, यह पाकिस्तान के साथ भारत की क्रिकेट राइवलरी के सबसे यादगार पलों में से एक है.