बढ़ते मेडिकल खर्च की रफ्तार में आपका हेल्थ कवर कितना मजबूत?

2013 से 2025 तक मेडिकल खर्च के आंकड़ों के एक अध्ययन में, यह पता चला है कि सर्जरी की लागत में 250 से 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, इसी तरह किडनी ट्रांसप्‍लांट का भी खर्च बढ़ा है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या महंगाई के इस दौर में आपका हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पर्याप्‍त है या नहीं.

डेटा में हेरफेर कर ऐसे होता है बड़ा फ्रॉड रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई मामलों में स्कैम करने वाले गैंग मृत लोगों की पहचान और दस्तावेजों का भी इस्तेमाल करते हैं. अपने फायदे के लिए पर्सनल डेटा में बदलाव कर बीमा क्लेम निकालने की कोशिश की जाती है. इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है. Image Credit: Money9

सिद्धार्थ सिंघल: कुछ समय पहले तक 10 लाख रूपये के कवरेज वाली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर्याप्त मानी जाती थी, लेकिन अब समय बदल गया है, इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2013 में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लगभग 5 लाख रुपये की जरूरत होती थी, जिसके लिए अब 18 लाख रुपये से अधिक लागत की आवश्यकता होती है. एक दशक पहले लगभग 9.8 लाख रुपये की लागत में होने वाले हार्ट ट्रांस्प्लांट के लिए अब लगभग 34 लाख रुपये खर्च करने पड़ते है.

वास्तव में, 2013 से 2025 तक मेडिकल खर्च के आंकड़ों के एक अध्ययन में, यह पता चला है कि सर्जरी की लागत में 250 से 300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और इसमें पोस्ट-ऑपरेटिव केयर या लंबे समय तक चलने वाला इलाज भी शामिल नहीं है. यह सिर्फ मामूली बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में बड़ा और स्थायी बदलाव आ चुका है। इस गतिशील बदलाव के प्रभाव को सही तरीके से समझने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का खुद से यह सवाल करना जरूरी है कि क्या मेरा हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है?

इन्फलेशन Vs मेडिकल इन्फलेशन

जब तक हम में से अधिकांश लोग 40 के दशक के मध्य में पहुंचते हैं, तब तक हम आमतौर पर सभी फाइनेन्शियल प्लानिंग से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले ले चुके होते हैं जैसै होम लोन लेना, टर्म कवर खरीदना और निश्चित रूप से, हेल्थ इंश्योरेंस को लेना. इसमें संभवतः परिवार के लिए 10-15 लाख रुपये की हेल्थ पॉलिसी शामिल है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह हे कि मेडिकल सर्विस की लागत बढ़ गई है, लेकिन हमारी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का कवरेज वही है। इसका कारण यह है कि हमारे देश में मेडिकल इन्फलेशन सामान्य इन्फलेशन से काफी अधिक है. वर्तमान में, भारत की रिटेल इन्फलेशन दर 3.34 प्रतिशत है. यह काफी कम है, लेकिन औसतन यह 5-6 प्रतिशत के आसपास रहती है। दूसरी ओर, शहरी भारत में मेडिकल इन्फलेशन पिछले कुछ समय से लगभग 14% रही है.

यह सच है कि नए जमाने की सर्जिकल टेक्नोलॉजी परिणामों में सुधार कर रही हैं, लेकिन वे मेडिकल केयर की लागत को भी बढ़ा रही हैं. उदाहरण के लिए, 10 साल पहले जो एंजियोप्लास्टी 70,000 रुपये में होती थी, अब उसकी लागत लगभग 2.5 लाख रुपये है। एक घुटने के ट्रांसप्लांट में आपका 5-6 लाख रुपये का खर्च आ सकता है। इस बीच, कैंसर के उपचार की लागत भी अलग-अलग होती है, लेकिन एक बात तय है – इंश्योरेंस के बिना ये हमारी जेब पर वित्तिय बोझ को बढ़ा सकती है.

सबसे ज्यादा खर्च सिर्फ सर्जरी में नहीं होता है. यह डायग्नोस्टिक, अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद की केयर, आईसीयू में भर्ती होने का खर्च, दवाईयां और लंबे समय तक फॉलो-अप इन सभी चीजों में खर्च होता है. स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां अकेले नहीं आती है, इसलिए आपका इंश्योरेंस भी ऐसा होना चाहिए जो सभी चीजों के लिए पर्याप्त कवरेज प्रदान करे। 10 लाख रूपये के कवरेज वाली इंश्योरेंस पॉलिसी पर्याप्त महसूस होती है, लेकिन सिर्फ तब तक जब तक आपकों किसी प्रकार की सर्जरी से ना गुजरना पड़े। जब हेल्थ इंश्योरेंस की बात आती है, तो हम अक्सर 2015 के समय के हिसाब से इंश्योरेंस लेते हैं। लेकिन अगर बढ़ते हुए मेडिकल इन्फलेशन के साथ आपके इंश्योरेंस का कवरेज नहीं बढ़ता है तो वह आपके लिए एक वित्तिय बोझ बन सकता है.

1 करोड़ का कवर अब 10 लाख हो गया है

बढ़ती मेडिकल खर्चों के साथ अब 1 करोड़ रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस नया स्टैंडर्ड बनता जा रहा है। आजकल ज़्यादातर बीमा कंपनियां कम प्रीमियम पर 1 करोड़ रुपये का हेल्थ कवर दे रही हैं.

उदाहरण के लिए, 30 की उम्र के आस-पास का एक स्वस्थ कपल सिर्फ़ 2000-2500 रुपये के मासिक प्रीमियम पर 1 करोड़ रुपये की फ़ैमिली-फ़्लोटर पॉलिसी खरीद सकता है। और ये पॉलिसी बिना किसी सब-लिमिट या कमरे के किराए की लिमिट के कॉम्प्रिहेंसिव कवरेज के साथ आती हैं। इनमें से ज़्यादातर पॉलिसी आधुनिक समय के लाभों के साथ भी आती हैं जैसे कि जैसे बीमा राशि की रीस्टोर सुविधा, डेकेयर प्रक्रियाओं के लिए कवरेज और यहां तक कि कुछ मामलों में ओपीडी और मेंटल हेल्थ कंस्लटेशन भी। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये इन पॉलिसी की कीमत इतनी कम है कि आप शायद वीकेंड में खाने या ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन पर इससे ज़्यादा खर्च कर देते हैं – लेकिन ये आपको महंगे इलाज से निश्चिंत रहने और बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं पाने की सुविधा देती हैं।

ऐसा कहने के बाद, आपको यह याद रखना चाहिए कि सभी 1 करोड़ रुपये की पॉलिसी एक जैसी नहीं होती हैं। पॉलिसी खरीदते समय आपको कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओं पर ध्यान देना चाहिए। अगर आप या आपके परिवार के किसी सदस्य को पॉलिसी के तहत कवर किया जाना है, और वह पहले से मौजूद किसी बीमारी से पीड़ित हैं। तो ऐसे मामलों में, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके द्वारा चुनी गई पॉलिसी में पहले दिन से ही पहले से मौजूद बीमारियों के लिए कवरेज हो. आपको यह भी पता लगाना चाहिए कि आप जिस पॉलिसी पर विचार कर रहे हैं, उसके तहत कैशलेस अस्पतालों का नेटवर्क कितना है। एक व्यापक नेटवर्क बेहतर देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करता है. और अगर आप किसी विशिष्ट अस्पताल को प्राथमिकता देते हैं, तो चेक कर लें कि वह अस्पताल नेटवर्क का हिस्सा है या नहीं.

हेल्थ एक ऐसा पहलू है जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. अलग-अलग अध्ययनों से पता चला है कि भारत में पुरानी बीमारियां बढ़ रही हैं. अनुमान है कि भारत में अब चार में से एक व्यक्ति की मृत्यु हृदय संबंधी बीमारियों से होती है, साथ ही कैंसर के मामले भी बढ़ रहे हैं। और ये असामान्यताएं नहीं हैं; ये पैटर्न हैं। और इनका इलाज अधिक महंगा होता जा रहा है. इनमें से अधिकांश बीमारियों के लिए लाइफ सेविंग प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है, जिसके लिए प्रोपर्टी बेचना, रिटायरमेंट सेविंग को खत्म करना या कर्ज लेना पड़ सकता है। इसके लिए एकमात्र विकल्प पर्याप्त कवरेज वाला हेल्थ इंश्योरेंस लेना है। हम अक्सर इंश्योरेंस को एक ऐसा उत्पाद मानते हैं जिसे आप एक बार खरीदते हैं और भूल जाते हैं। इसलिए अगर आपने कुछ साल पहले कोई पॉलिसी खरीदी थी, तो उसे फिर से खरीदने का यह अच्छा समय है। पिछले पांच सालों में हेल्थकेयर का हाल पहले के बीस सालों से भी ज्यादा बदल गया है। इसलिए ज़रूरी है कि आपकी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान आज की मेडिकल जरूरतों के हिसाब से हो.

लेखक पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में हेड-हेल्थ इंश्योरेंस हैं. प्रकाशित विचार उनके निजी हैं.

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