Jio और NSE के IPO का रास्ता साफ, सरकार ने बदले पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम, जानें डिटेल

सरकार ने IPO को आसान बनाने के लिए पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. वित्त मंत्रालय ने सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन रूल्स 1957 में संशोधन करते हुए अलग- अलग आकार की कंपनियों के लिए नया स्ट्क्चर तय किया है. इसके तहत बड़ी कंपनियां IPO के समय कम फीसदी शेयर जनता को दे सकेंगी. बाद में तय समय के भीतर पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ानी होगी.

पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है. Image Credit:

IPO Rules: सरकार ने बड़े IPO को आसान बनाने के लिए पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. वित्त मंत्रालय ने सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन रूल्स 1957 में बदलाव किया है. नए नियमों के तहत बड़ी कंपनियों को IPO के समय कम फीसदी शेयर जनता को देने की छूट मिलेगी. माना जा रहा है कि इससे जियो और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसे बड़े IPO की राह आसान हो सकती है. सरकार ने अलग- अलग साइज की कंपनियों के लिए अलग स्ट्रक्चर तय किया है. साथ ही समय के साथ पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने की शर्त भी रखी गई है.

नियमों में बदलाव

नए नियमों के तहत कंपनियों को उनके पोस्ट इश्यू कैपिटल के आधार पर पब्लिक शेयरहोल्डिंग तय करनी होगी. जिन कंपनियों का पोस्ट इश्यू कैपिटल 1600 करोड़ रुपये तक है उन्हें कम से कम 25 फीसदी शेयर जनता को देने होंगे. 1600 करोड़ से 4000 करोड़ रुपये तक के इश्यू में कंपनियों को कम से कम 400 करोड़ रुपये के शेयर जनता को देने होंगे. सरकार का कहना है कि इससे मध्यम और बड़ी कंपनियों के लिए IPO लाना आसान होगा.

बड़ी कंपनियों को मिली ज्यादा छूट

4000 करोड़ से 50000 करोड़ रुपये तक के पोस्ट इश्यू कैपिटल वाली कंपनियों को कम से कम 10 फीसदी शेयर जनता को देने होंगे. हालांकि ऐसी कंपनियों को लिस्टिंग के तीन साल के अंदर पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25 फीसदी तक बढ़ानी होगी. वहीं 50000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक की कंपनियों को कम से कम 8 फीसदी शेयर जनता को देने होंगे और 5 साल के अंदर इसे 25 फीसदी तक बढ़ाना होगा.

बड़ी कंपनियों के लिए अलग नियम

1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये तक के पोस्ट इश्यू कैपिटल वाली कंपनियों को कम से कम 6250 करोड़ रुपये के शेयर जनता को देने होंगे और कम से कम 2.75 फीसदी हिस्सेदारी रखनी होगी. वहीं 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मार्केट कैप वाली कंपनियां कम से कम 15000 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर कर सकती हैं. अगर लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 फीसदी से कम है तो इसे पांच साल में 15 फीसदी और दस साल में 25 फीसदी करना होगा.

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नियम न मानने पर लगेगा पेनाल्टी

सरकार ने साफ किया है कि इन नियमों का पालन करना सभी कंपनियों के लिए जरूरी होगा. अगर कोई कंपनी तय पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का पालन नहीं करती है तो स्टॉक एक्सचेंज की तरफ से जुर्माना या पेनल्टी लगाई जा सकती है. सरकार का मानना है कि नए नियमों से बड़े IPO को बढ़ावा मिलेगा और शेयर बाजार में निवेशकों के लिए नए मौके बनेंगे.