अटक सकता है जियो का मेगा IPO, इस वजह से होगी देरी! जानें अब किस महीने में DRHP दाखिल करने की तैयारी में कंपनी

सरकारी नियमों में देरी के कारण मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms Limited का बहुप्रतीक्षित IPO टल सकता है. ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद ही कंपनी DRHP दाखिल करेगी. संभावित $170 अरब वैल्यूएशन के साथ यह भारत का सबसे बड़ा IPO बन सकता है.

जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ Image Credit: ChatGPT & Money9

भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी की डिजिटल कंपनी Jio Platforms Limited का बहुप्रतीक्षित IPO रेगुलेटरी देरी के कारण टल सकता है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा लिस्टिंग नियमों में बदलाव को औपचारिक मंजूरी देने में देरी हो रही है जिससे कंपनी की तय समयसीमा प्रभावित होने की आशंका है.

सरकार की मंजूरी का इंतजार

जियो की मूल कंपनी Reliance Industries Limited फिलहाल सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रही है. इसके बाद ही कंपनी बैंकर्स की औपचारिक नियुक्ति कर पाएगी और IPO के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकेगी. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी अब अप्रैल से पहले ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने की योजना बना रही है, जो पूरी तरह सरकारी मंजूरी पर निर्भर करेगा. कंपनी पिछले कई वर्षों से IPO की तैयारी कर रही है. हालांकि मुकेश अंबानी ने पहले संकेत दिया था कि जियो का IPO 2026 की पहली छमाही में लाया जा सकता है.

भारत का बन सकता है सबसे बड़ा IPO

जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस ग्रुप की सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में से एक है और यह भारत की सबसे बड़ी मोबाइल सेवा कंपनी का संचालन करती है. निवेश बैंकरों के मुताबिक कंपनी का संभावित मूल्यांकन करीब 170 अरब डॉलर तक हो सकता है. अगर यह IPO आता है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है और कंपनी न्यूनतम हिस्सेदारी बेचकर लगभग 4.3 अरब डॉलर जुटा सकती है.

नियमों में बदलाव का मामला

दरअसल Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने सितंबर में नियमों में बदलाव को मंजूरी दी थी. नए नियमों के अनुसार जिन कंपनियों का पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा, वे IPO में न्यूनतम 5% के बजाय 2.5% हिस्सेदारी भी बेच सकती हैं. हालांकि इन नियमों को लागू करने के लिए सरकार की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है.

नियमों में बदलाव का मामला

दरअसल Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने सितंबर में नियमों में बदलाव को मंजूरी दी थी. नए नियमों के अनुसार जिन कंपनियों का पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा, वे IPO में न्यूनतम 5% के बजाय 2.5% हिस्सेदारी भी बेच सकती हैं. हालांकि इन नियमों को लागू करने के लिए सरकार की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है. हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो और National Stock Exchange of India जैसे बड़े IPO भारतीय शेयर बाजार में नई एनर्जी ला सकते हैं. ऐसे मेगा इश्यू निवेशकों के लिए बड़े निवेश अवसर भी पैदा करते हैं और बाजार में नई पूंजी का प्रवाह बढ़ाते हैं.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.