बजट के बाद बदली ITR फाइलिंग की डेडलाइन, FY27 में कब होगी आखिरी तारीख, कब तक भर पाएंगे रिवाइज्ड रिटर्न, कितनी लगेगी पेनाल्टी

Budget 2026 में सरकार ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है. इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव न होने के बावजूद ITR और रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समयसीमा बढ़ा दी गई है. साथ ही टैक्स चोरी से जुड़े मामलों में जेल के प्रावधान को खत्म किया गया है, जिससे कंप्लायंस प्रक्रिया पहले से आसान होगी.

ITR Processing Deadline Extended Image Credit: Canva/ Money9

ITR Filing Deadline: Budget 2026 में भले ही इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया हो, लेकिन आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने से जुड़े नियमों में अहम बदलाव करते हुए सरकार ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है. सरकार ने रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समयसीमा बढ़ा दी है और टैक्स चोरी के मामलों में जेल भेजने के प्रावधान को भी खत्म कर दिया है.

मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी असेसमेंट ईयर के लिए टैक्सपेयर्स को 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अनुमति थी. हालांकि, 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए कानून के तहत यह समयसीमा तीन महीने बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है. यानी अब टैक्सपेयर्स वित्त वर्ष की समाप्ति के 12 महीने तक अपना रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकेंगे.

हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर पहले की तरह फाइलिंग फीस देनी होगी. यह फीस टैक्सपेयर्स की आय के आधार पर तय की जाएगी, जो 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक हो सकती है.

ITR फाइलिंग की डेडलाइन में क्या बदलाव हुआ?

सामान्य टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की अंतिम तिथि में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पहले की तरह ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स को 31 जुलाई तक ही रिटर्न दाखिल करना होगा.

वहीं, बिजनेस या कंपनी से आय प्राप्त करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए सरकार ने बड़ी राहत देते हुए ITR फाइल करने की समयसीमा को 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया है.

रिवाइज्ड रिटर्न के मामले में भी टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त समय दिया गया है. पहले जहां वित्त वर्ष समाप्त होने के 9 महीने के भीतर रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य था, अब इसे बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है.

रिवाइज्ड रिटर्न पर कितनी देनी होगी फीस?

सरकार के नियमों के मुताबिक:

टैक्सपेयर्स के लिए क्या है संदेश?

समयसीमा बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को अपनी गलतियों को सुधारने का अतिरिक्त मौका मिलेगा और अनजाने में हुई त्रुटियों को ठीक करना आसान होगा. हालांकि, फाइलिंग फीस बरकरार रखने से यह भी सुनिश्चित किया गया है कि टैक्स कंप्लायंस में अनुशासन बना रहे.