कम ब्याज वाली FD छोड़िए… सरकार दे रही 7.7% गारंटीड रिटर्न; जानें क्यों सेफ है NSC का दांव
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट एक छोटी बचत योजना है, जिसे डाकघर के जरिए से ऑपरेट किया जाता है. यह 5 साल की अवधि के लिए निवेश का सेफ ऑप्शन है. इसमें निवेश किया गया पैसा सरकार की गारंटी में रहता है.
NSC vs FD: महंगाई के दौर में सेफ बचत और बेहतर रिटर्न हर निवेशक की पहली जरूरत बन गई है. पिछले एक साल में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा बार-बार रेपो रेट में कटौती के बाद कई बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD की ब्याज दरें घटा दी हैं. ऐसे में सरकार की छोटी बचत योजनाएं आम लोगों के लिए ज्यादा बेहतर ऑप्शन बनती जा रही हैं. इन्हीं में से एक है नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी NSC. यह पूरी तरह सरकारी गारंटी वाली स्कीम है, जिसमें आपका पैसा सुरक्षित रहता है और तय ब्याज भी मिलता है.
वर्तमान में NSC पर सरकार 7.7 प्रतिशत सालाना ब्याज दे रही है, जो कई बड़े बैंकों की 5 साल की FD से ज्यादा है. यही कारण है कि मध्यम वर्ग और वेतनभोगी वर्ग के बीच NSC की मांग तेजी से बढ़ रही है. खास बात यह है कि पुराने टैक्स नियम यानी ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वालों को इसमें धारा 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है. इसलिए NSC अब केवल बचत का साधन नहीं, बल्कि टैक्स प्लानिंग का भी एक मजबूत जरिया बन चुका है.
क्या है NSC योजना
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट एक छोटी बचत योजना है, जिसे डाकघर के जरिए से ऑपरेट किया जाता है. यह 5 साल की अवधि के लिए निवेश का सेफ ऑप्शन है. इसमें निवेश किया गया पैसा सरकार की गारंटी में रहता है, इसलिए जोखिम लगभग जीरो होता है. सरकार हर तिमाही में इसकी ब्याज दरों की समीक्षा करती है, ताकि यह बाजार की स्थिति के अनुरूप बनी रहे.
न्यूनतम और अधिकतम निवेश सीमा
NSC में न्यूनतम निवेश 1,000 रुपये है और उसके बाद आप 100 रुपये के गुणक में निवेश कर सकते हैं. इसमें अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है. वहीं FD में न्यूनतम राशि अलग-अलग बैंकों में 1,000 से 10,000 रुपये तक हो सकती है. सामान्य FD में भी अधिकतम निवेश की कोई सीमा तय नहीं है.
NSC vs FD में ब्याज दर तुलना
जनवरी से मार्च 2026 तिमाही के लिए NSC पर 7.7 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है, जो सालाना कंपाउंड होता है. इसके मुकाबले अधिकतर बैंक 5 साल की FD पर 6 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे हैं. सरकारी बैंकों की बात करें तो SBI 5 साल की FD पर 6.05 प्रतिशत ब्याज देता है, पंजाब नेशनल बैंक 6.10 प्रतिशत और केनरा बैंक 6.25 प्रतिशत ब्याज देता है. निजी बैंकों में HDFC बैंक 6.4 प्रतिशत, ICICI बैंक 6.5 प्रतिशत और Yes Bank 6.75 प्रतिशत ब्याज दे रहा है. साफ है कि NSC कई बैंकों से बेहतर रिटर्न दे रहा है.
प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंकों की 5 साल की FD ब्याज दरें
| बैंक का नाम | 5 साल की ब्याज दर (%) |
|---|---|
| HDFC Bank | 6.4 |
| ICICI Bank | 6.5 |
| IDFC FIRST Bank | 7.0 |
| IndusInd Bank | 6.65 |
| Jammu & Kashmir Bank | 6.6 |
| IDBI Bank | 6.25 |
| Karnataka Bank | 6.15 |
| Kotak Mahindra Bank | 6.25 |
| YES Bank | 6.75 |
पब्लिक सेक्टर बैंक (Public Sector Banks)
| बैंक का नाम | 5 साल की ब्याज दर (%) |
|---|---|
| Canara Bank | 6.25 |
| Central Bank of India | 6.0 |
| Punjab National Bank | 6.1 |
| State Bank of India | 6.05 |
ब्याज कैसे मिलता है
NSC में ब्याज हर साल जुड़ता जाता है और पूरा पैसा 5 साल बाद मैच्योरिटी पर मिलता है. इसे cumulative योजना कहा जाता है. FD में आपको दो ऑप्शन मिलते हैं. आप चाहें तो ब्याज हर तिमाही ले सकते हैं या फिर उसे जोड़कर मैच्योरिटी पर ले सकते हैं. NSC में पांच साल का लॉक-इन होता है और सामान्य तौर पर समय से पहले पैसा नहीं निकाला जा सकता. केवल मृत्यु, अदालत के आदेश या विशेष परिस्थितियों में ही निकासी संभव है. टैक्स-सेवर FD में भी पांच साल का लॉक-इन होता है, जबकि सामान्य FD समय से पहले तोड़ी जा सकती है, लेकिन उस पर पेनल्टी लगती है.
टैक्स बेनिफिट
NSC में किया गया निवेश पुराने टैक्स नियम के तहत धारा 80C में 1.5 लाख रुपये तक कटौती के लिए एलिजिबल है. हालांकि, NSC पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल है. इसी तरह FD पर मिलने वाला ब्याज भी आपकी Income tax slabs के अनुसार टैक्सेबल होता है. अगर आप सेफ निवेश चाहते हैं और बेहतर ब्याज भी, तो मौजूदा समय में NSC कई बैंक FDs से बेहतर ऑप्शन साबित हो रहा है. खासकर टैक्स बचत चाहने वालों के लिए यह एक मजबूत और भरोसेमंद साधन है.
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