इलेक्ट्रिक क्रांति में चमकता कॉपर… क्यों बन रहा है 21वीं सदी का अहम धातु, जानें इसमें निवेश के 3 दमदार ETF
इलेक्ट्रिक कारों में सामान्य कारों की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा कॉपर लगता है. सोलर पैनल, विंड टर्बाइन और हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में भी इसका भारी इस्तेमाल होता है. डेटा सेंटर्स और 5G नेटवर्क भी कॉपर पर निर्भर हैं. मांग तेज है, लेकिन नई खदानें विकसित होने में 10-15 साल लग जाते हैं.
Investing in copper: कभी सिर्फ Construction और फैक्ट्रियों से जुड़ी मेटल माने जाने वाला कॉपर अब 21वीं सदी की सबसे बड़ी दो क्रांतियों के केंद्र में आ गया है. डिजिटलाइजेशन और Energy transition ने इसकी भूमिका पूरी तरह बदल दी है. आज इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर और विंड पावर, डेटा सेंटर्स और आधुनिक पावर ग्रिड बिना कॉपर के लगभग असंभव हैं.
इसी वजह से कॉपर की कीमतें कई बार 13000 डॉलर प्रति टन को पार कर चुकी हैं. अब कहानी ओवरसप्लाई के डर से बदलकर Long-term कमी की ओर शिफ्ट हो चुकी है. यही कारण है कि निवेशक कॉपर को महज एक Cyclic metal नहीं, बल्कि Strategic assets की तरह देखने लगे हैं.
क्यों अहम हो रहा है कॉपर
इलेक्ट्रिक कारों में सामान्य कारों की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा कॉपर लगता है. सोलर पैनल, विंड टर्बाइन और हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में भी इसका भारी इस्तेमाल होता है. डेटा सेंटर्स और 5G नेटवर्क भी कॉपर पर निर्भर हैं. मांग तेज है, लेकिन नई खदानें विकसित होने में 10-15 साल लग जाते हैं. इसलिए मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ रहा है. यही अंतर कॉपर को आकर्षक निवेश बना रहा है.
कॉपर में निवेश के 3 ETF
| 1. Global X Copper Miners ETF (COPX) यह सबसे बड़ा और भरोसेमंद कॉपर ETF माना जाता है. इसकी टोटल assets करीब 5.83 अरब डॉलर है और Expense ratio 0.65 प्रतिशत है. यह दुनिया की लगभग 40 बड़ी कॉपर माइनिंग कंपनियों में निवेश करता है. इनमें लुंडिन माइनिंग, KGHM, सदर्न कॉपर, फ्रीपोर्ट-मैकमोरन और ग्लेनकोर शामिल हैं. जनवरी 2026 के मध्य में इसकी नेट एसेट वैल्यू 81.94 डॉलर थी. पिछले एक साल में इस ETF ने लगभग 67 प्रतिशत रिटर्न दिया, जो कॉपर कीमतों और माइनिंग शेयरों की तेजी को दिखाता है. |
| 2. United States Copper Index Fund (CPER) यह ETF सीधे कॉपर फ्यूचर्स से जुड़ा है, यानी यह माइनिंग कंपनियों के बजाय रियल copper कीमतों को ट्रैक करता है. इसकी संपत्ति करीब 456 मिलियन डॉलर है. पिछले एक साल में इसने लगभग 38 प्रतिशत रिटर्न दिया. हालांकि इसका खर्च अनुपात 1 प्रतिशत से ज्यादा है और फ्यूचर्स आधारित होने के कारण इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव रहता है. इसलिए यह ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए बेहतर माना जाता है. |
| 3. iShares Copper and Metals Mining ETF (ICOP) यह साल 2023 में लॉन्च हुआ नया ETF है. यह केवल कॉपर नहीं बल्कि Comprehensive मेटल माइनिंग सेक्टर को कवर करता है. इसमें एंग्लो अमेरिकन, BHP, फ्रीपोर्ट-मैकमोरन और ग्रुपो मेक्सिको जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. साल 2025 में इस ETF ने करीब 78 प्रतिशत रिटर्न दिया, जो पूरे माइनिंग सेक्टर की मजबूत परफॉर्मेंस को दिखाता है. |
| ETF का नाम | यह क्या करता है | किसमें निवेश करता है | खर्च अनुपात | 1 साल का रिटर्न | किसके लिए सही |
|---|---|---|---|---|---|
| Global X Copper Miners ETF (COPX) | कॉपर माइनिंग कंपनियों में निवेश | दुनिया की बड़ी कॉपर कंपनियां | 0.65% | लगभग 67% | लंबी अवधि के निवेशक |
| US Copper Index Fund (CPER) | सीधे कॉपर की कीमत ट्रैक करता है | कॉपर फ्यूचर्स | 1% से ज्यादा | लगभग 38% | ज्यादा जोखिम लेने वाले |
| iShares Copper & Metals ETF (ICOP) | पूरे मेटल माइनिंग सेक्टर में निवेश | BHP, Anglo American जैसी कंपनियां | मध्यम | लगभग 78% (2025) | Extensive metal निवेश चाहने वाले |
भारतीय निवेशकों के लिए रास्ता
भारतीय निवेशक LRS यानी लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत इन ग्लोबल ETF में निवेश कर सकते हैं. कई ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म यह सुविधा देते हैं. हालांकि निवेश से पहले डॉलर-रुपया जोखिम, फंड खर्च, और LRS सीमा को समझना जरूरी है. साथ ही ध्यान रखें कि ज्यादातर ETF माइनिंग कंपनियों में निवेश करते हैं, न कि सीधे कॉपर में.
कॉपर अब भी एक Cyclical commodities है. मंदी में मांग गिर सकती है और कीमतें तेजी से नीचे आ सकती हैं. Geopolitical tensions और खनन नियम भी कीमतों को प्रभावित करते हैं. लेकिन लंबी अवधि में EV, रिन्यूएबल और इंफ्रा की मांग इसे मजबूत बनाए रखेगी.
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