ईरान का बड़ा फैसला, होर्मुज मार्ग पर सिर्फ चीन और रूस के जहाजों को एंट्री, समर्थन के बदले मिली स्पेशल छूट
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा फैसला लिया है. तेहरान ने घोषणा की है कि अब इस अहम समुद्री मार्ग से केवल चीन के जहाज गुजर सकेंगे. अन्य सभी देशों के जहाजों पर रोक लगा दी गई है. ईरान ने इसे युद्ध के दौरान समर्थन देने वाले देशों के प्रति आभार बताया है.
Iran blockade: इजरायल और अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा फैसला लिया है. तेहरान ने घोषणा की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब अधिकतर देशों के जहाजों के लिए बंद रहेगा. केवल चीन के जहाजों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जाएगी. ईरान ने इसे बीजिंग के समर्थन के प्रति आभार बताया है. इस फैसले से ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है. दुनिया भर के बाजारों और सरकारों की नजर अब इस कदम पर टिकी है.
ईरान का बड़ा ऐलान
ईरान सरकार ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अब सिर्फ चीनी टैंकर गुजर सकेंगे. अन्य सभी देशों के जहाजों पर रोक लगा दी गई है. यह घोषणा सरकारी मीडिया के जरिये की गई. ईरान ने इसे रणनीतिक फैसला बताया है. सरकार का कहना है कि यह कदम मौजूदा युद्ध की स्थिति में लिया गया है.
चीन को विशेष छूट
ईरान ने साफ कहा है कि चीन ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका साथ दिया है. पश्चिमी प्रतिबंधों में शामिल न होने को भी वजह बताया गया है. इसी समर्थन के कारण से चीन के जहाजों को विशेष अनुमति दी गई है. यह कदम वैश्विक राजनीति में नया संदेश माना जा रहा है.
अन्य जहाजों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड को आदेश दिया गया है कि किसी भी अनधिकृत जहाज को रोका जाए. चेतावनी दी गई है कि नियम तोड़ने वाले जहाजों पर सीधी कार्रवाई हो सकती है. इस प्रतिबंध में तेल टैंकर, एलएनजी कैरियर और मालवाहक जहाज शामिल हैं. तटस्थ देशों और पड़ोसी देशों के जहाज भी इस रोक में शामिल हैं. इससे समुद्री तनाव बढ़ने की आशंका है.
ग्लोबल सप्लाई चेन पर खतरा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल ट्रांसपोर्ट का प्रमुख मार्ग है. यहां से दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई गुजरती है. बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई भी इसी रास्ते से होती है. जानकारों का मानना है कि इस फैसले से ग्लोबल एनर्जी संकट गहरा सकता है. तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है.
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नौसेना अलर्ट पर
अमेरिका की पांचवीं फ्लीट और उसके सहयोगी देशों की नौसेना अलर्ट पर बताई जा रही है. हालांकि अभी तक सीधे टकराव से बचने की कोशिश हो रही है. चीन और रूस के सामने भी संतुलन की चुनौती है. दोनों देश लाभ की स्थिति में हैं लेकिन उन पर मध्यस्थता का दबाव भी बढ़ सकता है. आने वाले दिनों में इस संकट का असर और साफ दिख सकता है.
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