Self-Construction Home Loan: अपने प्लॉट पर घर बनाने से पहले जानें लोन और टैक्स के नियम, कहां मिलता है फायदा

अगर आप अपने प्लॉट पर खुद घर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो होम लोन की शर्तें, EMI की टाइमिंग और सेक्शन 80C व 24(b) के टैक्स फायदे समझना बेहद जरूरी है. सही जानकारी आपको भविष्य में टैक्स नुकसान और फाइनेंशियल गलतियों से बचा सकती है.

कंस्ट्रक्शन वाला घर और लोन टैक्स के नियम Image Credit: @Canva/Money9live

Self Construction Home Loan Tax Rules: “रोटी, कपड़ा और मकान”- इस कहावत से साफ है कि अपना घर हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों में शामिल है. एक घर बनाना सिर्फ भावनात्मक सपना नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी फाइनेंशियल कमिटमेंट्स में से एक होता है. लोग अपनी सालों की बचत और भविष्य की कमाई का बड़ा हिस्सा इसमें लगाते हैं. पहले जहां लोग रिटायरमेंट के बाद घर बनाते थे, वहीं आज आसान होम लोन की उपलब्धता ने युवाओं को भी कम उम्र में अपना घर बनाने का मौका दे दिया है. अगर आप अपने प्लॉट पर खुद घर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो होम लोन और टैक्स नियमों को सही तरीके से समझना बेहद जरूरी है. यहां हम दो अहम पहलुओं पर बात करेंगे- पहला, सेल्फ-कंस्ट्रक्शन के लिए होम लोन की व्यावहारिकता और दूसरा, इससे मिलने वाले टैक्स फायदे.

सेल्फ-कंस्ट्रक्शन के लिए होम लोन: क्या हैं नियम?

रेडी-टू-मूव घर या अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के लिए होम लोन लेना अपेक्षाकृत आसान होता है, क्योंकि ज्यादातर बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां ऐसे मामलों में समान शर्तों पर लोन देती हैं. लोन की अवधि, ब्याज दर और पात्रता लगभग एक जैसी होती है. हालांकि, अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में लोन की राशि निर्माण की प्रगति के अनुसार चरणों में जारी की जाती है. लेकिन जब बात अपने प्लॉट पर खुद घर बनाने की आती है, तो लेंडर्स की संख्या कुछ हद तक सीमित हो जाती है.

ऐसे मामलों में आमतौर पर “कंपोजिट लोन” दिया जाता है, जिसमें प्लॉट की लागत और निर्माण लागत- दोनों शामिल होती हैं. बैंक या लेंडर पहले यह सुनिश्चित करता है कि आपने अपनी हिस्सेदारी (मार्जिन मनी) पूरी तरह से लगा दी है, उसके बाद ही वह अपनी ओर से रकम जारी करता है. लोन की रकम किस्तों में दी जाती है, जो निर्माण के अलग-अलग चरणों से जुड़ी होती हैं. इसके लिए आर्किटेक्ट या सिविल इंजीनियर का सर्टिफिकेट और निर्माण की तस्वीरें जमा करनी पड़ती हैं. कुछ मामलों में बैंक खुद भी अपना इंजीनियर या आर्किटेक्ट भेजकर साइट का निरीक्षण कर सकता है.

EMI कब से शुरू होती है?

अक्सर यह माना जाता है कि होम लोन की EMI घर पूरा होने के बाद ही शुरू होती है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. आमतौर पर नियमित EMI तब शुरू होती है, जब लोन की पूरी राशि डिस्बर्स हो जाती है, जो प्रायः निर्माण पूरा होने के आसपास होता है. हालांकि, निर्माण के दौरान जितनी रकम बैंक द्वारा जारी की जाती है, उस पर आपको ब्याज देना पड़ता है. इसे प्री-EMI इंटरेस्ट कहा जाता है. यानी भले ही आपकी फुल EMI शुरू न हुई हो, लेकिन ब्याज का भुगतान आपको पहले से करना पड़ सकता है.

टैक्स लाभ: किन बातों का रखें ध्यान?

सेक्शन 80C: प्रिंसिपल रीपेमेंट

होम लोन के प्रिंसिपल रीपेमेंट पर आप सेक्शन 80C के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की कटौती ले सकते हैं. यह कटौती अन्य निवेश विकल्पों जैसे PF, PPF, ELSS, ULIP, NSC आदि के साथ मिलकर मिलती है. ध्यान रखने वाली अहम बात यह है कि निर्माण पूरा होने से पहले जो EMI या भुगतान किया गया है, उसके प्रिंसिपल हिस्से पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती. साथ ही, यह छूट केवल पुराने टैक्स रिजीम में उपलब्ध है, नए टैक्स रिजीम में नहीं. अगर आप घर पूरा होने के पांच साल के भीतर उसे बेच देते हैं, तो सेक्शन 80C के तहत अब तक ली गई सारी कटौतियां उस साल की आय में जोड़ दी जाएंगी.

सेक्शन 24(b): ब्याज पर टैक्स छूट

होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट सेक्शन 24(b) के तहत मिलती है. इस छूट को आप उसी साल से क्लेम कर सकते हैं, जिस साल घर का निर्माण पूरा हो जाता है. हालांकि, निर्माण पूरा होने से पहले जो प्री-EMI इंटरेस्ट आपने चुकाया है, वह बेकार नहीं जाता. इसे आप निर्माण पूरा होने के बाद अगले पांच वर्षों में पांच बराबर किस्तों में क्लेम कर सकते हैं. सेल्फ-ऑक्यूपाइड (खुद रहने वाले) घर के लिए पुराने टैक्स रिजीम में अधिकतम 2 लाख रुपये तक ब्याज की छूट मिलती है. लेकिन अगर निर्माण लोन लेने के पांच साल के भीतर पूरा नहीं होता, तो यह सीमा घटकर 30,000 रुपये रह जाती है. नए टैक्स रिजीम में सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर ब्याज की कोई छूट नहीं है.

अगर घर किराए पर दिया है तो?

लेट-आउट प्रॉपर्टी के मामले में आप पूरे ब्याज की कटौती क्लेम कर सकते हैं, लेकिन पुराने टैक्स रिजीम में हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले अधिकतम 2 लाख रुपये तक के नुकसान को ही अन्य आय से सेट-ऑफ किया जा सकता है. नए टैक्स रिजीम में हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को अन्य आय से सेट-ऑफ करने की अनुमति नहीं है, यानी ब्याज की छूट सिर्फ किराए की आय तक सीमित रह जाती है. इससे इतर एक अहम बात और ध्यान रखने योग्य है. सेक्शन 24(b) के तहत ली गई ब्याज की छूट को घर बेचने की स्थिति में रिवर्स करने का कोई प्रावधान नहीं है, भले ही आप घर पूरा होने के पांच साल के भीतर ही उसे बेच दें.

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लेखक एक टैक्स और इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट हैं. यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं. आप उन्हें jainbalwant@gmail.com पर या ट्विटर हैंडल @jainbalwant पर संपर्क कर सकते हैं.