₹20000 के SIP से कितने वर्षों में बनेगा ₹1 करोड़, 10, 12 और 15% रिटर्न का समझ लीजिए गणित
20000 रुपेया मासिक SIP से 1 करोड़ रुपेया का कॉर्पस बनने में कितना समय लगता है, इसका पूरा गणित दिया गया है. अलग-अलग वार्षिक रिटर्न 10 फीसदी, 12 फीसदी और 15 फीसदी पर निवेश की अवधि कैसे बदलती है, यह समझना हर नए निवेशक के लिए जरूरी है. कंपाउंडिंग का प्रभाव लम्बी अवधि में रिटर्न को तेज बनाता है, जिससे कॉर्पस तेजी से बढ़ता है.
1 crore SIP plan: कई निवेशक ऐसे हैं जो 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस तैयार करना चाहते हैं. कई युवा निवेशक यह सवाल पूछते हैं कि यदि वे हर माह 20000 रुपये एक Systematic Investment Plan यानी SIP में लगाते हैं, तो अलग-अलग वार्षिक रिटर्न दरों पर उन्हें यह लक्ष्य हासिल करने में कितना समय लग सकता है. मौजूदा बाजार वातावरण और लॉन्ग टर्म कंपाउंडिंग को ध्यान में रखते हुए फाइनेंस एक्सपर्ट बताते हैं कि 10 फीसदी, 12 फीसदी और 15 फीसदी जैसे अनुमानित रिटर्न रेंज में निवेशकों का सफर काफी अलग दिखता है.
10 फीसदी वार्षिक रिटर्न
यदि कोई निवेशक हर माह 20000 रुपये SIP में लगाता है और उसे औसतन 10 फीसदी का वार्षिक रिटर्न मिलता है, तो लगभग 17 साल में उसका निवेश 1 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है. कंपाउंडिंग का प्रभाव इस अवधि में साफ नजर आता है, जहां कुल निवेश की राशि 40 लाख 80 हजार के आसपास होती है, वहीं रिटर्न का योगदान करीब 61 लाख 70 हजार रुपये तक पहुंच जाता है. फाइनेंस एक्सपर्ट मानते हैं कि 10 फीसदी को एक ‘संतुलित लेकिन सुरक्षित’ अनुमान माना जा सकता है, जिसे दीर्घकाल में इक्विटी-बेस्ड हाइब्रिड फंड भी दे सकते हैं.
| वर्ष | कुल निवेश (₹) | कुल रिटर्न (₹) | कुल मूल्य (₹) |
|---|---|---|---|
| 5 | 12,00,000 | 3,92,000 | 15,92,000 |
| 10 | 24,00,000 | 20,48,000 | 44,48,000 |
| 15 | 36,00,000 | 60,57,000 | 96,57,000 |
| 17 | 40,80,000 | 61,70,000 | 1,02,50,000 |
12 फीसदी वार्षिक रिटर्न
अगर वही निवेश 12 फीसदी के रिटर्न से बढ़ता है, तो कॉर्पस बनने की गति तेज हो जाती है. 20000 रुपये मासिक निवेश के साथ 1 करोड़ रुपये तक पहुंचने में लगभग 15 साल का समय लगता है. इस स्थिति में कंपाउंडिंग तेज होती है और अंत में रिटर्न का हिस्सा निवेश राशि की तुलना में काफी अधिक हो जाता है. लंबी अवधि में कई डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स और लार्ज-मिडकैप कैटेगरी ऐतिहासिक रूप से 12 फीसदी से अधिक रिटर्न देते रहे हैं, हालांकि यह सुनिश्चित नहीं है.
| वर्ष | कुल निवेश (₹) | कुल रिटर्न (₹) | कुल मूल्य (₹) |
|---|---|---|---|
| 5 | 12,00,000 | 4,87,000 | 16,87,000 |
| 10 | 24,00,000 | 28,37,000 | 52,37,000 |
| 15 | 36,00,000 | 87,45,000 | 1,23,45,000 |
15 फीसदी वार्षिक रिटर्न
यदि बाजार का प्रदर्शन मजबूत हो और निवेशक को 15 फीसदी का औसत रिटर्न मिलता है, तो 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाने में करीब 13 साल का समय लगता है. इस अवस्था में निवेशक का कुल निवेश करीब 33.60 लाख होता है, लेकिन कंपाउंडिंग के कारण रिटर्न 71.34 लाख से ज्यादा हो सकता है. यह दिखाता है कि लंबे समय में ज्यादा रिटर्न का छोटा-सा फर्क भी कुल कॉर्पस को बेहद तेजी से बढ़ाता है.
| वर्ष | कुल निवेश (₹) | कुल रिटर्न (₹) | कुल मूल्य (₹) |
|---|---|---|---|
| 5 | 12,00,000 | 6,12,000 | 18,12,000 |
| 10 | 24,00,000 | 39,84,000 | 63,84,000 |
| 13 | 31,20,000 | 71,02,000 | 1,02,22,000 |
| 14 | 33,60,000 | 89,15,000 | 1,22,75,000 |
कंपाउंडिंग क्यों है गेम-चेंजर
म्यूचुअल फंड SIP में कंपाउंडिंग की प्रक्रिया सबसे बड़ा हथियार है. जितना लंबा निवेश का समय होता है, उतना ही रिटर्न पर रिटर्न जुड़ता जाता है. यही वजह है कि 10 फीसदी से 15 फीसदी तक रिटर्न दर में सिर्फ 5 फीसदी का अंतर होने पर भी कुल अवधि में लगभग 4 साल की कमी आ जाती है.
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