पेट्रोल पंप पर फ्रॉड का न हो जाएं शिकार, सिर्फ 0 मीटर का चक्कर पड़ेगा भारी, तेल लेते समय ये चीज भी करें चेक
पेट्रोल और डीजल की क्वालिटी जांचने में डेंसिटी एक अहम पैमाना है जो फ्यूल की शुद्धता दिखाती है. यदि डेंसिटी तय लिमिट से बाहर हो तो मिलावट की आशंका होती है. सरकार ने 15 डिग्री तापमान पर मानक तय किए हैं जहां पेट्रोल 720 से 775 और डीजल 820 से 860 के बीच होना चाहिए.
Fuel Density: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसी वजह से देश में पेट्रोल और डीजल को लेकर पैनिक जैसा माहौल बन गया है. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि देश में फ्यूल की कोई कमी नहीं है. इसके बावजूद कई पेट्रोल पंप पर लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है.
ऐसे माहौल में जल्दबाजी के कारण लोग पेट्रोल पंप पर धोखाधड़ी का शिकार भी हो सकते हैं. अक्सर लोग केवल मीटर पर 0 देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, जबकि यह पर्याप्त नहीं है. पेट्रोल पंप पर एक और महत्वपूर्ण पैमाना होता है जिससे पेट्रोल- डीजल की क्वालिटी जांची जा सकती है, जिसे डेंसिटी कहा जाता है. यह मीटर पर ही दिखाई जाती है, लेकिन ज्यादातर लोग इस पर ध्यान नहीं देते. आइए जानते हैं कि डेंसिटी के जरिए पेट्रोल और डीजल की क्वालिटी कैसे पहचानी जा सकती है.
डेंसिटी क्या होती है और क्यों जरूरी है
डेंसिटी किसी भी मैटेरियल के घनत्व को बताती है यानी वह कितना भारी या हल्का है. पेट्रोल और डीजल में यह एक महत्वपूर्ण जांच का तरीका है. सही डेंसिटी होने पर फ्यूल सही माना जाता है. अगर इसमें बदलाव होता है तो इसका मतलब कुछ गड़बड़ी हो सकती है. इसलिए डेंसिटी को क्वालिटी का मुख्य संकेत माना जाता है. यह फ्यूल की असली पहचान बताने में मदद करती है.
मिलावट का पता कैसे चलता है
अगर पेट्रोल या डीजल में सस्ता तेल या कोई अन्य केमिकल मिलाया जाता है तो उसकी डेंसिटी बदल जाती है. यही बदलाव मिलावट का संकेत होता है. सामान्य लिमिट से ज्यादा या कम डेंसिटी होने पर जांच जरूरी हो जाती है. इस तरीके से आसानी से पता लगाया जा सकता है कि फ्यूल प्योर है या नहीं. यह तरीका काफी भरोसेमंद माना जाता है.
वाहन के प्रदर्शन पर असर
सही डेंसिटी वाला फ्यूल इंजन के बेहतर काम के लिए जरूरी है. अगर फ्यूल में मिलावट हो तो इंजन पर असर पड़ता है. इससे माइलेज कम हो सकता है और धुआ भी ज्यादा निकलता है. लंबे समय तक खराब फ्यूल इस्तेमाल करने से इंजन को नुकसान भी हो सकता है. इसलिए हमेशा मानक डेंसिटी वाला फ्यूल ही इस्तेमाल करना चाहिए.
सरकार द्वारा तय स्टैंडर्ड क्या हैं
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की डेंसिटी के लिए एक तय लिमिट रखी है. इसे 15 डिग्री तापमान पर मापा जाता है. पेट्रोल के लिए यह लिमिट 720 से 775 के बीच होती है. वहीं डीजल के लिए यह 820 से 860 के बीच तय की गई है. इन लिमिट के अंदर आने वाला फ्यूल सही माना जाता है. इससे बाहर होने पर जांच जरूरी हो जाती है.
तापमान का डेंसिटी पर असर
डेंसिटी तापमान के साथ बदलती रहती है. इसी कारण इसे एक तय तापमान यानी 15 डिग्री पर मापा जाता है. अगर तापमान ज्यादा या कम हो तो डेंसिटी भी बदल सकती है. इसलिए जांच के समय इस बात का खास ध्यान रखा जाता है. सही तापमान पर मापने से ही सटीक रिज्ट मिलते हैं.
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आम लोगों के लिए क्या है जरूरी
आम लोगों को भी फ्यूल की क्वालिटी के बारे में जागरूक होना चाहिए. पेट्रोल पंप पर डेंसिटी की जानकारी उपलब्ध होती है. इसे देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि फ्यूल सही है या नहीं. अगर कोई गड़बड़ी दिखे तो शिकायत भी कर सकते हैं. सही जानकारी से आप अपने वाहन और पैसे दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं.
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