कैश की कमी से जूझ रहे हैं? जानें PPF, NSC, ELSS और बीमा पॉलिसी कैसे बन सकते हैं आपका वित्तीय सहारा, समझे नियम
अगर आपने ओल्ड टैक्स रिजीम चुना है और धारा 80C के तहत निवेश किया है, तो ये निवेश सिर्फ टैक्स बचत तक सीमित नहीं हैं. जरूरत पड़ने पर आप PPF, NSC, ELSS और पारंपरिक बीमा पॉलिसियों के जरिए लोन या आंशिक निकासी कर अस्थायी कैश की कमी से राहत पा सकते हैं. जानिए किन शर्तों पर कितना पैसा निकाल सकते हैं और कैसे बिना निवेश तोड़े लिक्विडिटी की समस्या दूर कर सकते हैं.
80C Rule Investment Credit Crunch: अगर आपने ओल्ड टैक्स रिजीम चुना है तो धारा 80C के तहत अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की टैक्स छूट पाने के लिए आपको कुछ निवेश या भुगतान करने होते हैं. इनमें कुछ खर्च ऐसे होते हैं जिनमें पैसा वापस नहीं मिलता, जैसे टर्म लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम या बच्चों की ट्यूशन फीस. वहीं कुछ निवेश ऐसे होते हैं जिनमें आपकी राशि एक निश्चित अवधि तक लॉक रहती है और बाद में ब्याज या बढ़त के साथ वापस मिलती है. जरूरत पड़ने पर इन्हीं निवेशों का इस्तेमाल आप अस्थायी कैश की कमी यानी क्रेडिट क्रंच से निपटने के लिए कर सकते हैं. नीचे ऐसे प्रमुख विकल्पों को विस्तार से समझाया गया है.
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)
धारा 80C के तहत आप अपने, जीवनसाथी या बच्चे के नाम पर पीपीएफ खाते में सालाना अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक जमा कर टैक्स छूट ले सकते हैं. पीपीएफ खाते की कुल अवधि 15 वर्ष होती है और पूरी अवधि समाप्त होने के बाद, 1 अप्रैल से मैच्योरिटी राशि मिलती है. हालांकि यह लंबी अवधि का निवेश है, फिर भी इसमें जरूरत पड़ने पर कुछ सुविधाएं उपलब्ध हैं. खाता खुलने वाले वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के एक साल बाद और पांच साल पूरे होने से पहले तक आप इस खाते से लोन ले सकते हैं. लोन की राशि उस वर्ष से दो साल पहले के खाते के बैलेंस का अधिकतम 25 फीसदी तक सीमित होती है. उदाहरण के लिए, अगर आप तीसरे साल लोन के लिए आवेदन करते हैं तो आपको दो साल पहले के बैलेंस का 25 फीसदी तक मिल सकता है.
इसके अलावा, पहली जमा के पांच वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद आप आंशिक निकासी भी कर सकते हैं और इस निकाली गई राशि को वापस चुकाने की जरूरत नहीं होती. निकासी की सीमा चौथे वर्ष के अंत के बैलेंस या निकासी से ठीक पिछले वर्ष के अंत के बैलेंस में से जो कम हो, उसका अधिकतम 50 फीसदी तक होती है. इस तरह पीपीएफ सीमित दायरे में सही, लेकिन जरूरत के समय उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है.
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)
एनएससी भी धारा 80C के तहत टैक्स बचत का एक प्रमुख साधन है. इसकी अवधि पांच वर्ष होती है. सामान्य परिस्थितियों में एनएससी को मैच्योरिटी से पहले भुनाया नहीं जा सकता. हालांकि अगर आपको अस्थायी नकदी की जरूरत है तो आप एनएससी के बदले बैंक या एनबीएफसी से लोन ले सकते हैं. आमतौर पर बैंक एनएससी के फेस वैल्यू का 70 से 80 फीसदी तक लोन प्रदान करते हैं. ब्याज दर संबंधित बैंक और उस समय के ब्याज दर चक्र पर निर्भर करती है. उदाहरण के तौर पर, भारतीय स्टेट बैंक वर्तमान में एनएससी के बदले 11.20 फीसदी की दर से लोन दे रहा है. इस तरीके से आप अपने निवेश को तोड़े बिना उस पर लोन लेकर अपनी लिक्विडिटी की समस्या दूर कर सकते हैं और साथ ही टैक्स लाभ भी जारी रख सकते हैं.
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS)
ईएलएसएस म्यूचुअल फंड की एक टैक्स सेविंग स्कीम है, जिसमें धारा 80C के तहत निवेश पर छूट मिलती है. इसमें निवेश की लॉक-इन अवधि तीन वर्ष होती है. तीन साल पूरे होने के बाद आप कभी भी अपनी यूनिट्स रिडीम कर सकते हैं, लेकिन रिडेम्प्शन का निर्णय बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है. अगर तीन साल बाद बाजार में रिटर्न अनुकूल नहीं है, तो आप तुरंत निकालने के बजाय इंतजार भी कर सकते हैं. एक अहम बात यह है कि आप अपने पुराने ईएलएसएस निवेश को रिडीम कर उसी दिन दोबारा निवेश कर सकते हैं. इस प्रक्रिया से आप बिना अतिरिक्त धन लगाए धारा 80C के तहत दोबारा टैक्स लाभ के पात्र बन सकते हैं. इसके अलावा कुछ बैंक इन निवेशों की एनएवी के आधार पर लोन की सुविधा भी देते हैं. इस प्रकार ईएलएसएस आपको रिडेम्प्शन और लोन दोनों विकल्प उपलब्ध कराता है.
बीमा पॉलिसियां
अगर आपके पास पारंपरिक जीवन बीमा पॉलिसी है, तो आप उसके खिलाफ लोन ले सकते हैं, बशर्ते उसमें पेड-अप वैल्यू बन चुकी हो. आमतौर पर नियमित प्रीमियम वाली पॉलिसियों में पांच वर्ष पूरे होने के बाद लोन की सुविधा मिलती है. यह लोन पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू के आधार पर दिया जाता है. ध्यान रखने वाली अहम बात यह है कि टर्म लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर कोई लोन उपलब्ध नहीं होता, क्योंकि यह केवल शुद्ध बीमा उत्पाद है और इसमें बचत या निवेश का कोई हिस्सा शामिल नहीं होता.
लेखक एक टैक्स और इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट हैं. यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं. आप उन्हें jainbalwant@gmail.com पर या ट्विटर हैंडल @jainbalwant पर संपर्क कर सकते हैं.
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