दिल्ली में महंगी हो सकती है बिजली! ₹30,000 करोड़ की वसूली का बोझ आम जनता पर पड़ने के आसार

दिल्ली में बिजली बिल में इजाफा होने की आशंका बढ़ गई है. APTEL ने ₹30,000 करोड़ बकाया चुकाने की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है. अब DERC को तय समय में वसूली करनी होगी, जिससे उपभोक्ताओं पर टैरिफ बढ़ने का दबाव बन सकता है.

दिल्ली में महंगी हो सकती है बिजली Image Credit: @Money9live

Delhi electricity bill hike news: दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर जल्द ही भारी बोझ पड़ने वाला है. राजधानी में सस्ती बिजली के दिन अब खत्म होते नजर आ रहे हैं. दरअसल, दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) को अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) से बड़ा झटका लगा है. न्यायाधिकरण ने करीब ₹30,000 करोड़ के बकाया भुगतान की समय सीमा बढ़ाने की DERC की याचिका को खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद अब यह लगभग साफ हो गया है कि आने वाले महीनों में दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ सकते हैं.

क्यों और कैसे फंसा है ₹30,000 करोड़ का पेच?

पूरा मामला दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के बकाया पैसे से जुड़ा है. लंबे समय से इन कंपनियों की बड़ी राशि बकाया है, जिसे वसूलने के लिए एक ‘लिक्विडेशन प्लान’ तैयार किया गया था. DERC ने कोर्ट से थोड़ा और वक्त मांगा था ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक से टैरिफ (दरों) का बोझ न पड़े. इंडिया टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायाधिकरण ने इस मामले में और मोहलत देने से इनकार कर दिया है. इसका मतलब है कि अब तय समय के भीतर ही इन बकायों की वसूली करनी होगी.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और समय सीमा

इस पूरे संकट की जड़ अगस्त 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश में है, जिसमें सभी राज्यों के बिजली नियामकों को सख्त आदेश दिए गए थे. अदालत ने कहा था कि अप्रैल 2024 से लंबित बकाया राशि की वसूली शुरू की जाए और अप्रैल 2028 तक इस प्रक्रिया को हर हाल में पूरा किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि नियामक इन बकायों को चुकाने के लिए बिजली की दरों में संशोधन (बढ़ोतरी) जैसे सभी उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

दिल्ली में क्यों बढ़ रही है टेंशन?

दिल्ली में यह मुद्दा काफी संवेदनशील है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर बिजली मिलती रही है, जबकि सिस्टम में बकाया राशि लगातार बढ़ती गई. दिल्ली की स्थिति अन्य राज्यों से दो मामलों में अलग है:

  • निजी डिस्कॉम: दिल्ली में बिजली वितरण का काम निजी कंपनियों के हाथ में है, जबकि तमिलनाडु जैसे राज्यों में सरकारें खुद यह बोझ उठाने का संकेत दे चुकी हैं.
  • सीधा असर: निजी मॉडल होने के कारण दिल्ली में इस भारी-भरकम बकाया की भरपाई या तो बिजली के बिल बढ़ाकर की जाएगी, या फिर सरकार को सब्सिडी का बजट बढ़ाना होगा.

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क्या होगा आम जनता पर असर?

अब गेंद दिल्ली सरकार और नियामक के पाले में है. अगर सरकार भारी सब्सिडी देकर इस बोझ को नहीं संभालती है, तो घरेलू और व्यावसायिक (कमर्शियल) दोनों तरह के उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. जानकारों का कहना है कि ₹30,000 करोड़ की बड़ी रकम की वसूली के लिए टैरिफ में इजाफा करना अब मजबूरी बन सकता है. नतीजतन, दिल्ली वालों को अब आने वाले महीनों में महंगे बिजली बिलों के लिए तैयार रहना चाहिए.