NSE IPO की मंजूरी के और करीब पहुंचा, SEBI पैनल ने 1800 करोड़ के सेटलमेंट प्रस्ताव को दी हरी झंडी
इस IPO का इंतजार लंबे समय से हो रहा है. अब जाकर इसकी लिस्टिंग के रास्ते साफ होते हुए नजर आ रहे हैं. NSE के आईपीओ के लिए लिए पहला आवेदन 18 अक्टूबर, 2016 को सेबी के पास जमा किया गया था. इसके बाद, पिछले साल जून में NSE ने सेबी के पास दो आवेदन जमा किए थे.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का लंबे समय से रुका हुआ इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) अब फिर से आगे बढ़ सकता है. एक एक्सपर्ट पैनल ने देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के एक प्रस्ताव पर सहमति दे दी है. इस प्रस्ताव के तहत, एक्सचेंज उन मामलों को निपटाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा पेमेंट करेगा, जो IPO के रास्ते में एक बड़ी रुकावट बने हुए थे.
एक्सपर्ट पैनल ने आवेदन को दी मंजूरी
इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के सेटलमेंट ऑर्डर पर बनी एक्सपर्ट पैनल ने NSE के उस आवेदन को मंजूरी दे दी है, जिसमें को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों को लगभग 1,800 करोड़ रुपये में सेटल करने की बात कही गई थी. रेगुलेटरी और कानूनी रुकावटों की वजह से इस IPO में बार-बार देरी हुई थी.
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि हाल ही में एक हाई-पावर्ड सलाहकार समिति की बैठक हुई और उसने NSE के सेटलमेंट आवेदनों को मंजूरी दे दी. अब उनकी सिफारिशों को Sebi के दो पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के सामने रखा जाएगा.
एक्सपर्ट कमिटी में कौन-कौन है शामिल
सेटलमेंट ऑर्डर्स पर बनी चार सदस्यों वाली एक्सपर्ट कमिटी की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जय नारायण पटेल कर रहे हैं. इसके दूसरे सदस्य कनाडाई पेंशन फंड CDPQ के कंट्री चेयर एन वेंकटरम, सेबी के पूर्व सदस्य एस.के. मोहंती और पूर्व डिप्टी कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल सरित जफा हैं.़
NSE के IPO का इंतजार
इस IPO का इंतजार लंबे समय से हो रहा है. अब जाकर इसकी लिस्टिंग के रास्ते साफ होते हुए नजर आ रहे हैं. NSE के आईपीओ के लिए लिए पहला आवेदन 18 अक्टूबर, 2016 को सेबी के पास जमा किया गया था. शुरुआत में रेगुलेटर ने कुछ चिंताओं के चलते इस IPO को मंजूरी नहीं दी थी. इन चिंताओं में को-लोकेशन से जुड़ा एक मामला, स्टॉक एक्सचेंज में गवर्नेंस से जुड़ी कमियां और उसकी तकनीकी बुनियादी सुविधाओं में मौजूद दिक्कतें शामिल थीं.
तब से लेकर अब तक, NSE ने मंजूरी पाने के लिए कई बार सेबी से संपर्क किया है. मार्च 2025 में जब तुहिन कांत पांडे ने सेबी प्रमुख का पदभार संभाला, तो उन्होंने NSE के IPO से जुड़े मामले की जांच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया.
पिछले साल से प्रोसेस में आई तेजी
इसके बाद, पिछले साल जून में NSE ने सेबी के पास दो आवेदन जमा किए. इन आवेदनों के जरिए NSE ने लंबे समय से लंबित को-लोकेशन और ‘डार्क फाइबर’ से जुड़े मामलों को निपटाने का प्रस्ताव रखा. इसके लिए NSE ने 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का भुगतान करने की पेशकश की थी, जिसमें पहले मामले के लिए 1,165 करोड़ रुपये और दूसरे मामले के लिए 223 करोड़ रुपये शामिल थे. इस साल जनवरी में, पांडे ने बताया कि रेगुलेटर ने NSE के इस निपटान प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है.
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