भारत से ₹100 का सामान लाने पर भी वसूला जाएगा टैक्स, नेपाल में विरोध प्रदर्शन, बालेन शाह सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
नेपाल के बीरगंज में भारत से आने वाले सामान पर 100 नेपाली रुपये से ऊपर टैक्स लगाने के फैसले के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. इस सख्ती से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं और भारत-नेपाल के व्यापार व सामाजिक रिश्तों पर भी असर पड़ता नजर आ रहा है.
Nepal 100 rupee customs rule: भारत से सटे नेपाल के प्रमुख व्यापारिक केंद्र बीरगंज में इन दिनों तनाव की स्थिति है. नेपाल सरकार ने सीमा पार से आने वाले 100 नेपाली रुपये (लगभग 62 भारतीय रुपये) से अधिक के सामान पर अनिवार्य सीमा शुल्क (Customs Duty) लागू कर दिया है. इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं.
जहां सरकार इसे ‘राजस्व रिसाव’ (Revenue Leakage) रोकने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक आवश्यक कदम बता रही है, वहीं सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों और छोटे व्यापारियों का तर्क है कि इस जमीनी वास्तविकता को नजरअंदाज करने से आम जनजीवन और सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. इस नीतिगत बदलाव और सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता ने सीमा पर व्यापारिक समीकरणों को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है.
क्यों भड़का गुस्सा?
नेपाल के दक्षिणी मैदानी इलाकों (तराई) में रहने वाले लोगों के लिए भारतीय बाजार लाइफलाइन की तरह है. दैनिक जरूरतों के सामान, जैसे राशन, कपड़े और यहां तक कि खाद-बीज के लिए भी स्थानीय लोग भारतीय सीमा पार के बाजारों पर निर्भर रहते हैं. बीरगंज और रूपनदेही जैसे बॉर्डर पॉइंट्स पर इस समय लंबी कतारें और तनाव का माहौल है.
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 100 रुपये की सीमा इतनी कम है कि एक पैकेट बिस्किट या छोटी सी दवा लाने पर भी उन्हें कस्टम विभाग की लंबी लाइनों और कागजी कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है. ‘जन अधिकार पार्टी’ और स्थानीय नागरिक इसे एक ‘अघोषित नाकाबंदी’ करार दे रहे हैं. उनका तर्क है कि जब सरकार समय पर खाद और जरूरी सामान उपलब्ध नहीं करा पाती, तो सीमा पर ऐसी सख्ती आम आदमी का गला घोंटने जैसी है.
सख्ती के पीछे का असली कारण: राजस्व और ‘लीकेज’
नेपाल की बालेन शाह सरकार के इस कदम के पीछे देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और घटता विदेशी मुद्रा भंडार एक बड़ा कारण माना जा रहा है. काठमांडू स्थित सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों के अनुसार:
- राजस्व की चोरी रोकना: सरकार का दावा है कि छोटे सामानों की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध व्यापार हो रहा है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है.
- स्थानीय बाजार को बढ़ावा: सीमा पार से सस्ते सामान आने के कारण नेपाल के स्थानीय व्यापारी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं.
- जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय के निर्देशों के बाद सशस्त्र पुलिस बल (APF) और राजस्व जांच विभाग ने संयुक्त निगरानी शुरू कर दी है.
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भारतीय वाहनों पर भी ‘ब्रेक’
इस नई नीति का असर सिर्फ सामान तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल सरकार ने भारतीय नंबर प्लेट वाली निजी गाड़ियों और मोटरसाइकिलों के प्रवेश पर भी कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. अब बिना पूर्व अनुमति और भारी कागजी प्रक्रिया के भारतीय वाहन नेपाल की सीमा में प्रवेश नहीं कर पाएंगे. मधेस क्षेत्र के निवासियों के लिए यह निर्णय किसी आपदा से कम नहीं है, क्योंकि उनका सामाजिक और आर्थिक जीवन पूरी तरह से सीमा पार आवाजाही पर टिका है.
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