कोयले से बनेगा नया ईंधन, हर साल 4.04 बिलियन डॉलर की होगी बचत, LPG में 20% ब्लेंडिंग से बदल जाएगी भारत की तस्वीर

भारत LPG आयात कम करने के लिए DME ब्लेंडिंग पर बड़ा कदम उठा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, LPG में 20 फीसदी DME ब्लेंडिंग लागू होने पर भारत सालाना 6.3 मिलियन टन LPG आयात घटा सकता है. इससे करीब 34,200 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचत संभव है. BIS ने 20 फीसदी ब्लेंडिंग की मंजूरी दे दी है.

एलपीजी सिलेंडर Image Credit: money9live

LPG Blending: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर LPG आयात करता है. इसी बीच एक रिपोर्ट आई है, जो भारत के लिए काफी अहम मानी जा रही है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर देश कोल-बेस्ड DME (डाइमेथाइल ईथर) का इस्तेमाल बढ़ाता है, तो हर साल हजारों करोड़ रुपये की बचत संभव है. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि LPG में 20 फीसदी DME ब्लेंडिंग लागू की जाती है, तो भारत सालाना करीब 6.3 मिलियन टन LPG आयात कम कर सकता है. इससे विदेशी मुद्रा में लगभग 4.04 बिलियन डॉलर यानी करीब 34,200 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब वैश्विक तनाव, खासकर वेस्ट एशिया में युद्ध के कारण LPG सप्लाई चेन पर दबाव देखा गया है.

क्या है DME और कैसे होगा फायदा

DME यानी डाइमेथाइल ईथर एक क्लीन-बर्निंग फ्यूल माना जाता है, जिसे कोल गैसीफिकेशन प्रक्रिया के जरिए तैयार किया जा सकता है. इस तकनीक में कोयले को सिनगैस में बदला जाता है और फिर उससे DME तैयार होता है. यह ईंधन LPG के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है.

EY-पार्थेनॉन और न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन लिमिटेड की कोल गैसीफिकेशन फॉर एनर्जी एंड केमिकल सिक्योरिटी रिपोर्ट के मुताबिक, अगर 20 फीसदी DME-LPG blend लागू किया जाता है, तो भारत के LPG आयात में बड़ी कमी आ सकती है. इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी.

BIS ने दी 20 फीसदी ब्लेंडिंग की मंजूरी

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) पहले ही भारत में 20 फीसदी तक DME-LPG ब्लेंडिंग की अनुमति देने वाले मानक जारी कर चुका है. यानी तकनीकी और नियामकीय स्तर पर इस दिशा में शुरुआती रास्ता साफ हो चुका है. हालांकि, अभी भारत में DME का उत्पादन सीमित स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट्स तक ही है. बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए निवेश, नीति समर्थन और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी.

चीन है सबसे आगे

वैश्विक स्तर पर DME उत्पादन में चीन सबसे आगे है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की कुल DME उत्पादन क्षमता का लगभग 90 फीसदी हिस्सा चीन के पास है. इसका मुख्य कारण वहां का बड़े पैमाने पर कोल-टू-केमिकल्स उद्योग है. भारत के पास भी पर्याप्त कोयला भंडार है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि देश इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ सकता है.

सरकार की नीति बनेगी निर्णायक

न्यू एरा क्लीनटेक के एमडी बालासाहेब दराडे ने कहा कि यदि स्पष्ट ब्लेंडिंग पॉलिसी लाई जाती है, तो इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा और घरेलू DME उत्पादन तेजी से बढ़ सकेगा. विशेषज्ञों के अनुसार, DME न सिर्फ आयात बिल घटा सकता है, बल्कि यह कम उत्सर्जन वाला ईंधन होने के कारण पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प बन सकता है. अगर भारत इस दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो आने वाले वर्षों में LPG आयात पर निर्भरता घटाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम हो सकती है.

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