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129000 करोड़ घट गया रिलायंस का मार्केट कैप, 52 वीक लो पर शेयर, जानें- क्यों हुआ ऐसा हाल

RIL Share: लगातार नौवें दिन RIL के शेयर के भाव गिरे. इस साल अब तक RIL के शेयर की कीमत में 19 फीसदी की गिरावट आई है, जो BSE के बेंचमार्क इंडेक्स 'सेंसेक्स' के मुकाबले खराब प्रदर्शन है. RIL ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से पैदा होने वाली चुनौतियों को लेकर सावधानी जताई है.

रिलायंस इंडस्ट्री के शेयर में गिरावट. Image Credit: Getty image

RIL Share: देश की की दिग्गज और मार्केट कैपिटलाइजेशन (m-cap) के हिसाब से भारत की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में लगातार भारी गिरावट देखने को मिल रही है. सोमवार 8 जून को लगातार नौवें दिन RIL के शेयर के भाव गिरे. यह गिरावट भारतीय शेयर बाजार में आम कमजोरी और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के दबाव के चलते आई.

52 वीक लो पर शेयर

आज इंट्राडे ट्रेडिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर की कीमत 1.5 फीसदी से अधिक गिरकर 1270.60 रुपये के 52 वीक के लो लेवल पर आ गई. लगातार नौ दिनों की गिरावट में मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी के शेयरों में 7 फीसदी की कमी आई है, जिससे निवेशकों की 1,29,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कम हो गई. गिरावट से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप 18.49 लाख करोड़ रुपये था, जो आज घटकर 17.10 लाख करोड़ रुपये रह गया है.

19 फीसदी तक की गिरावट

इस साल अब तक RIL के शेयर की कीमत में 19 फीसदी की गिरावट आई है, जो BSE के बेंचमार्क इंडेक्स ‘सेंसेक्स’ के मुकाबले खराब प्रदर्शन है.

RIL का परफॉर्मेंस सेंसेक्स के मुकाबले कम क्यों है?

RIL ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से पैदा होने वाली चुनौतियों को लेकर सावधानी जताई है. कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि 2026-27 (FY27) के लिए आउटलुक ‘भू-राजनीतिक, मैक्रो-इकोनॉमिक और पॉलिसी से जुड़े जोखिमों के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील’ बना हुआ है.

तेल की मांग स्लो रहने की उम्मीद

कंपनी ने यह भी कहा कि निकट भविष्य में रिटेल कंजम्पशन की मांग मैक्रो-इकोनॉमिक हालात से प्रभावित हो सकती है. गुरुवार, 28 मई 2026 को जारी अपनी सालाना रिपोर्ट में RIL ने कहा कि तेल की ऊंची कीमतों और आर्थिक सुस्ती के कारण ग्लोबल स्तर पर तेल की मांग में बढ़ोतरी धीमी रहने की संभावना है.

अनिश्चित बना हुआ है आउटलुक

RIL ने कहा कि FY27 के लिए आउटलुक जियोपॉलिटिकल, मैक्रो-इकोनॉमिक और पॉलिसी से जुड़े जोखिमों के कारण काफी अनिश्चित बना हुआ है. FY 2026-27 में, प्रोडक्ट और फीडस्टॉक की कीमतों में उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया से सप्लाई में रुकावट, SAED पर भारत सरकार के निर्देश, पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक का इस्तेमाल और मुख्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी छूट का असर घरेलू मांग और मार्जिन पर पड़ सकता है.

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