चेक के पीछे साइन क्यों करवाता है बैंक, क्या धोखाधड़ी रोकने के आता है काम या फिर है कोई और बात

बैंक चेक के पीछे साइन इसलिए करवाते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि चेक सही व्यक्ति द्वारा जमा या कैश कराया जा रहा है. इसे एंडोर्समेंट कहा जाता है, जो पेयी की पहचान और उसकी मंजूरी साबित करता है. खासकर बेयरर चेक में यह नियम ज्यादा जरूरी होता है क्योंकि उसे कोई भी पेश कर सकता है.

क्यों जरूरी होता है चेक के पीछे साइन. Image Credit:

Bank cheque rules: आज भी देश में लाखों लोग बैंकिंग लेनदेन के लिए चेक का इस्तेमाल करते हैं. चेक जमा करते समय बैंक कई बार ग्राहकों से चेक के पीछे साइन करने को कहता है. बहुत से लोगों को यह प्रक्रिया समझ नहीं आती और वे इसे बेवजह की औपचारिकता मानते हैं. लेकिन इसके पीछे बैंक की एक खास सुरक्षा व्यवस्था होती है. यह नियम धोखाधड़ी रोकने और सही व्यक्ति तक पैसा पहुंचाने के लिए बनाया गया है. खासकर बेयरर चेक के मामलों में इसका महत्व और बढ़ जाता है.

क्यों जरूरी होता है चेक के पीछे साइन

बैंक चेक के पीछे साइन इसलिए करवाते हैं ताकि यह तय हो सके कि चेक वही व्यक्ति जमा कर रहा है जिसका नाम उस पर लिखा है. इसे एंडोर्समेंट कहा जाता है. इससे बैंक को यह भरोसा मिलता है कि पेयी खुद इस लेनदेन की मंजूरी दे रहा है. यह प्रक्रिया गलत इस्तेमाल को रोकने में मदद करती है. साथ ही बैंक के पास लेनदेन का एक रिकॉर्ड भी बन जाता है.

एंडोर्समेंट का असली मतलब

एंडोर्समेंट का मतलब होता है चेक को जमा या कैश कराने की अनुमति देना. जब पेयी चेक के पीछे साइन करता है तो वह यह साबित करता है कि उसे चेक मिल चुका है. बैंक इस साइन को एक सबूत के तौर पर रखता है. भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में यही साइन काम आता है. इससे लेनदेन में ट्रांपेरेंसी बनी रहती है.

बेयरर चेक में ज्यादा सावधानी क्यों

बेयरर चेक ऐसा चेक होता है जिसे कोई भी व्यक्ति बैंक में पेश कर सकता है. इसी वजह से इसमें धोखाधड़ी का खतरा ज्यादा रहता है. इसलिए सुरक्षा के लिए बैंक पीछे साइन अनिवार्य करते हैं. इससे यह रिकॉर्ड बनता है कि चेक किसने कैश कराया. अगर चेक खो जाए या गलत हाथों में चला जाए तो बैंक के पास जांच का आधार रहता है.

अकाउंट पेयी चेक में नियम अलग

अकाउंट पेयी चेक पर दो लाइन खींची होती हैं और यह सीधे उसी खाते में जमा होता है जिसका नाम चेक पर लिखा है. ऐसे चेक में आमतौर पर पीछे साइन जरूरी नहीं होता. कारण यह है कि पैसा सीधे नामित खाते में जाता है. फिर भी कुछ बैंक अतिरिक्त सुरक्षा के लिए साइन मांग सकते हैं. यह पूरी तरह बैंक की आंतरिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है.

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ग्राहकों के लिए सुरक्षा का फायदा

चेक के पीछे साइन करने से ग्राहक खुद भी सुरक्षित रहता है. बैंक साइन का मिलान खाते में मौजूद सिग्नेचर से कर सकता है. इससे चेक चोरी या गुम होने पर नुकसान की आशंका कम हो जाती है. किसी भी तरह के विवाद में यह साइन मजबूत सबूत बनता है. कुल मिलाकर यह नियम ग्राहकों और बैंक दोनों के हित में है.

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