18% टैरिफ से पलटी बाजी, US बाजार में वापसी को तैयार ये भारतीय टेक्सटाइल दिग्गज, 5 साल में दिया 870% तक का रिटर्न
India और US के बीच ट्रेड डील के बाद कपड़ा निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पहले 50 प्रतिशत तक लगने वाला टैक्स अब घटकर 18 प्रतिशत के आसपास आ गया है. अमेरिका भारत के लिए टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स का सबसे बड़ा बाजार है और कुल निर्यात का करीब एक तिहाई हिस्सा वहीं जाता है.
3 textile Stocks: 18 प्रतिशत टैरिफ की नई दिशा ने भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री में नई उम्मीद जगा दी है. India और US के बीच ट्रेड डील के बाद कपड़ा निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पहले 50 प्रतिशत तक लगने वाला टैक्स अब घटकर 18 प्रतिशत के आसपास आ गया है. अमेरिका भारत के लिए टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स का सबसे बड़ा बाजार है और कुल निर्यात का करीब एक तिहाई हिस्सा वहीं जाता है. ऊंचे टैरिफ के कारण बीते समय में कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर दबाव आया था. तीन बड़ी कंपनियां सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, जो अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ दोबारा मजबूत करने की तैयारी कर रही हैं.
अमेरिका में भारत की स्थिति क्यों अहम है
भारत से अमेरिका को टेक्सटाइल और कपड़ों का निर्यात सालाना करीब 11 अरब डॉलर का है. यह भारत के लिए सबसे बड़ा विदेशी बाजार है. हालांकि अमेरिका के कुल आयात में भारत की हिस्सेदारी अभी करीब 9 प्रतिशत ही है. ऊंचे टैरिफ ने भारत की Competition को कमजोर किया था, खासकर बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले. अब 18 प्रतिशत टैरिफ से भारतीय कंपनियों को फिर से कीमतों में बढ़त मिलने की संभावना है. इसके साथ ही यूरोप के साथ होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भी भविष्य में नई राह खुल सकती है.
Indo Count Industries
इंडो काउंट होम टेक्सटाइल सेक्टर की बड़ी कंपनी है और उसकी करीब 70 प्रतिशत कमाई अमेरिका से आती है. ऊंचे टैरिफ के समय कंपनी को कुछ दबाव झेलना पड़ा, हालांकि ऑर्डर पूरी तरह खत्म नहीं हुए. कंपनी ने हाल में अपने घरेलू कारोबार और नए ब्रांडों पर फोकस बढ़ाया है. अमेरिका में नया प्लांट लगाने और प्रीमियम ब्रांड खरीदने के जरिए वह ज्यादा मुनाफे वाले सेगमेंट में जाना चाहती है. प्रबंधन का कहना है कि आने वाले सालों में कंपनी की आमदनी दोगुनी करने की योजना है.
Welspun Living
वेलस्पन लिविंग अमेरिका को तौलिए और बेडशीट सप्लाई करने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. उसकी 60 प्रतिशत से ज्यादा एक्सपोर्ट आय वहीं से आती है. हालांकि हाल के महीनों में मुनाफा घटा था, लेकिन अमेरिका में मौजूद फैक्ट्री और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर ने कंपनी को कुछ हद तक बचाए रखा. अब टैरिफ घटने के बाद कंपनी को फिर से ग्रोथ की उम्मीद है. इसके साथ ही वह ब्रिटेन और यूरोप जैसे बाजारों में भी विस्तार पर काम कर रही है.
Gokaldas Exports
गोकलदास एक्सपोर्ट्स की करीब 70 प्रतिशत कमाई अमेरिका से आती है. ऊंचे टैरिफ के दौरान कंपनी ने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए कुछ नुकसान खुद उठाया था. इसके बावजूद उसने लागत कम करने और उत्पादन बेहतर बनाने पर ध्यान दिया, जिससे ऑपरेटिंग मुनाफा सुधर सका. अब कंपनी ब्रिटेन और यूरोप में हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है और आने वाले समय में मार्जिन फिर मजबूत होने की उम्मीद जता रही है.
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