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टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब झुकेगी नहीं! बजट में सेक्टर को बड़ा बूस्ट; इन 8 स्टॉक्स को मिलेगा सीधा फायदा

भारत के टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़ा और लेदर इंडस्ट्री को नई रफ्तार देने की कोशिश की है. इस बार बजट में सिर्फ छोटी राहत नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने का रोडमैप सामने रखा गया है. सरकार का मकसद है कि भारत ग्लोबल बाजार में कपड़ों के मामले में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से बेहतर मुकाबला कर सके

Textile sector Image Credit: Money9 live

Textile sector: बजट में सरकार ने भारत के टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़ा और लेदर इंडस्ट्री को नई रफ्तार देने की कोशिश की है. यह ऐसा सेक्टर है जो लाखों लोगों को रोजगार देता है और देश के एक्सपोर्ट में बड़ी भूमिका निभाता है. इस बार बजट में सिर्फ छोटी राहत नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने का रोडमैप सामने रखा गया है. सरकार का मकसद है कि भारत ग्लोबल बाजार में कपड़ों के मामले में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से बेहतर मुकाबला कर सके और चीन से हटकर होने वाली सप्लाई शिफ्ट का फायदा उठा सके.

बजट में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए क्या खास रहा

बजट 2026 में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए एक Joint policy framework पेश किया गया है. इसमें मेगा टेक्सटाइल पार्क बनाने, पूरे इंडस्ट्री को जोड़ने वाले कार्यक्रम और Exporters को राहत देने जैसे कदम शामिल हैं. सरकार ने कपड़ा, लेदर और फुटवियर एक्सपोर्ट के लिए समय सीमा 6 महीने से बढ़ाकर एक साल कर दी है. इससे Exporters को ऑर्डर पूरे करने में ज्यादा सुविधा मिलेगी.

सरकार मैन मेड फाइबर, टेक्निकल टेक्सटाइल, पर्यावरण अनुकूल प्रोडक्शन और स्किल ट्रेनिंग पर भी जोर दे रही है. मेगा टेक्सटाइल पार्क में एक ही जगह फैक्ट्री, टेस्टिंग लैब, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं होंगी. इससे कंपनियों का खर्च कम होगा और डिलीवरी जल्दी हो सकेगी. नियमों का पालन करना भी आसान बनेगा.

बजट 2026 में टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़ी घोषणाएं

  • नेशनल फाइबर मिशन शुरू किया जाएगा ताकि रेशम, मैन-मेड फाइबर और खास किस्म के फाइबर में देश आत्मनिर्भर बन सके.
  • महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना लाई जाएगी ताकि खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा मिल सके.
  • समर्थ 2.0 के जरिए कपड़ा इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों को नई तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी और फैक्ट्रियों को आधुनिक बनाया जाएगा.
  • टेक्सटाइल इंडस्ट्री और रोजगार योजना का विस्तार किया जाएगा ताकि पुराने कपड़ा क्लस्टर को नया रूप दिया जा सके और ज्यादा नौकरियां बनें.
  • नेशनल हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत मौजूदा योजनाओं को जोड़कर उन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा.
  • टेक्सटाइल इको पहल शुरू होगी ताकि पर्यावरण के अनुकूल और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कपड़े और गारमेंट बनाए जा सकें.
  • मिशन मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क बनाए जाएंगे, जहां एक ही जगह फैक्ट्री, टेस्टिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी सुविधाएं मिलेंगी.

किन कंपनियों को हो सकता है फायदा

Gokaldas Exports, KPR Mill, Pearl Global, Welspun Living, Trident, Vardhman Textiles, SP Apparel और Raymond जैसी कंपनियों को नई योजनाओं से मदद मिल सकती है. ये कंपनियां बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन करती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से मौजूद हैं. इसलिए सरकारी सुविधाओं का लाभ इन्हें जल्दी मिल सकता है. छोटे और Unorganized manufacturers, खासकर जो सिर्फ कपास पर निर्भर हैं, उन्हें इसका फायदा धीरे-धीरे मिलेगा.

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

इस नीति का असर राज्यों और क्लस्टर स्तर पर लागू होने की गति पर भी डिपेंड करेगा. ICC के नेशनल टेक्सटाइल चेयर Sanjay K Jain ने कहा कि बजट के ऐलान इंडस्ट्री की क्षमता बढ़ाने की दिशा में हैं. इससे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए आने वाले मौकों का फायदा उठाया जा सकेगा.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.