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ऐसे टैक्सपेयर्स को टैक्स चोरी के लिए नहीं जाना पड़ेगा जेल, बस चुकाएं पैसा मिलेगी सजा और जुर्माना दोनों से राहत

Budget 2026: वित्त मंत्री ने इज ऑफ लिविंग को फोकस में रखते हुए टैक्स के नियमों में कई बदलाव की घोषणा की. यह देखा गया है कि छोटे टैक्सपेयर्स के मामलों में नियमों का पालन न करना खास तौर पर आम है, जिसमें पुरानी या अनजाने में जानकारी न देना शामिल है.

बजट में ऐसे टैक्सपेयर्स को राहत. Image Credit: Money9

Budget 2026: बजट 2026 में निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स पर किसी भी तरह की राहत तो नहीं दी, लेकिन छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ा ऐलान जरूर किया है. वित्त मंत्री ने विदेशी इनकम या एसेट्स से जुड़े टैक्स के नियम में बदलाव का ऐलान किया. दरअसल, बजट 2026 में छोटे टैक्सपेयर्स, जैसे स्टूडेंट्स, युवा प्रोफेशनल्स, टेक कर्मचारियों, विदेश में रहने वाले NRIs और ऐसे अन्य लोगों की प्रैक्टिकल समस्याओं को दूर करने के लिए एक बार की विदेशी इनकम खुलासा योजना की घोषणा की गई.

इज ऑफ लिविंग

वित्त मंत्री ने इज ऑफ लिविंग को फोकस में रखते हुए टैक्स के नियमों में कई बदलाव की घोषणा की. वित्त मंत्री ने ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए एक बार की छह महीने की विदेशी संपत्ति खुलासा योजना शुरू करने ऐलान किया, ताकि वे एक निश्चित सीमा से कम आय या संपत्ति का खुलासा कर सकें.

स्कीम टैक्सपेयर्स की दो कैटेगरी पर लागू होगी

यह स्कीम टैक्सपेयर्स की दो कैटेगरी पर लागू होगी, यानी A, जिन्होंने अपनी विदेशी इनकम या एसेट्स का खुलासा नहीं किया और B, जिन्होंने अपनी विदेशी इनकम का खुलासा किया है और बकाया टैक्स भी चुकाया है, लेकिन कैटेगरी A के लिए हासिल की गई एसेट का ऐलान नहीं कर पाए हैं. बिना बताई गई इनकम या एसेट की लिमिट एक करोड़ रुपये तक रखने का प्रस्ताव है.

कितना अतिरिक्त टैक्स देना होगा?

ऐसे टैक्सपेयर्स को एसेट की फेयर मार्केट वैल्यू का 30 फीसदी या बिना बताई इनकम का 30 फीसदी टैक्स के तौर पर और पेनल्टी के बदले में 30 फीसदी एक्स्ट्रा इनकम टैक्स देना होगा. इससे उन्हें कैटेगरी B एसेट वैल्यू के लिए प्रॉसिक्यूशन से छूट मिल जाएगी, जिसकी वैल्यू पांच करोड़ रुपये तक होने का प्रस्ताव है. यहां एक लाख रुपये की फीस देने पर पेनाल्टी और प्रॉसिक्यूशन दोनों से छूट मिलेगी.

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आसान भाषा में समझें

दरअसल, इस एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. सरकार ने साफ कर दिया है कि जो टैक्सपेयर्स अपनी विदेशी इनकम या एसेट्स का खुलासा नहीं करते हैं, उन्हें एसेट की फेयर मार्केट वैल्यू का 30 फीसदी या बिना बताई गई इनकम का 30 फीसदी टैक्स के रूप में और 30 फीसदी अतिरिक्त इनकम टैक्स पेनल्टी के बदले देना होगा और इससे उन्हें मुकदमे से छूट मिल जाएगी. यानी उन्हें किसी भी तरह की सजा नहीं भुगतनी पड़ेगी.

ब्लैक मनी और टैक्स लगाने का कानून

ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और टैक्स लगाने का कानून, 2015, निवासी टैक्सपेयर्स द्वारा रखी गई अघोषित विदेशी आय और संपत्ति के मुद्दे को हल करने के लिए बनाया गया था. इसे लागू करते समय 1 जुलाई 2015 से 30 सितंबर 2015 तक एक बार का कंप्लायंस विंडो दिया गया था, ताकि 31 मार्च 2015 तक हासिल की गई बिना बताई गई विदेशी संपत्तियों की टैक्स और पेनल्टी चुकाकर अपनी मर्जी से घोषणा की जा सके.

यह देखा गया है कि छोटे टैक्सपेयर्स के मामलों में नियमों का पालन न करना खास तौर पर आम है, जिसमें पुरानी या अनजाने में जानकारी न देना शामिल है, जैसे कि ESOPs या RSUs जैसे विदेशी रोजगार लाभ से होने वाली होल्डिंग्स, पूर्व छात्रों के निष्क्रिय या कम कीमत वाले विदेशी बैंक खाते, लौटने वाले नॉन-रेजिडेंट्स की बचत या बीमा पॉलिसी, और विदेश में डेपुटेशन पर गए व्यक्तियों द्वारा रखी गई संपत्ति.

टाइम-बाउंड स्कीम

वॉलंटरी कम्प्लायंस को आसान बनाने और छोटे टैक्सपेयर्स के ऐसे पुराने मामलों को सुलझाने के लिए, विदेशी एसेट्स और विदेशी सोर्स से होने वाली इनकम की घोषणा के लिए एक टाइम-बाउंड स्कीम शुरू करने का प्रस्ताव है, जिसमें एसेट हासिल करने के तरीके और सोर्स के आधार पर टैक्स या फीस का पेमेंट करना होगा और घोषणा में शामिल मामलों के संबंध में ब्लैक मनी एक्ट के तहत पेनल्टी और प्रॉसिक्यूशन से सीमित छूट दी जाएगी.

प्रस्तावित योजना फाइनेंस बिल 2026 का हिस्सा होगी और केंद्र सरकार द्वारा नोटिफाई की गई तारीख से लागू होगी.

यह स्कीम टैक्सपेयर्स की दो कैटेगरी पर लागू होगी

  • (A) जिन्होंने अपनी विदेशी इनकम या एसेट का खुलासा नहीं किया.
  • (B) जिन्होंने अपनी विदेशी इनकम का खुलासा किया और/या बकाया टैक्स का पेमेंट किया, लेकिनहासिल की गई एसेट को घोषित नहीं कर पाए.
  • कैटेगरी (A) के लिए, बिना बताई गई इनकम/एसेट की लिमिट 1 करोड़ रुपये तक रखने का प्रस्ताव है. उन्हें एसेट की फेयर मार्केट वैल्यू का 30 फीसदी या बिना बताई गई इनकम का 30 फीसदी टैक्स के रूप में और 30 फीसदी अतिरिक्त इनकम टैक्स पेनल्टी के बदले देना होगा और इससे उन्हें मुकदमे से छूट मिल जाएगी.
  • कैटेगरी (B) के लिए, एसेट की वैल्यू 5 करोड़ रुपये तक रखने का प्रस्ताव है. यहां, 1 लाख रुपये की फीस के पेमेंट पर पेनल्टी और मुकदमे दोनों से छूट मिलेगी.

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