Closing Bell: सेंसेक्स 790 अंक उछलकर और निफ्टी 23700 के करीब बंद, बैंक-मेटल चमके; निवेशकों ने कमाए 5 लाख करोड़
Closing Bell: गुरुवार 14 मई के कारोबार में भारतीय शेयरों ने जोरदार वापसी की. फार्मा और मेटल शेयरों में ज़ोरदार खरीदारी की बदौलत बेंचमार्क इंडेक्स 1% से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए. फाइनेंशियल शेयरों में आई तेजी ने भी इस रैली को सहारा दिया, जिससे दलाल स्ट्रीट पर एक बार फिर बेहद जरूरी उम्मीद लौट आई.
Closing Bell: भारतीय शेयर बाजारों में लगातार दूसरे सत्र में भी बढ़त जारी रही. गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान पर खुले, जबकि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जो कल पहली बार 95.7 के स्तर को पार कर गया था.
Nifty 50 और Sensex, दोनों ही 1 फीसदी से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए. हालांकि, ब्रॉडर मार्केट मिले-जुले रुख के साथ बंद हुआ. Nifty Midcap 100 इंडेक्स में 1.10% की तेजी आई, जबकि Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 0.08% की मामूली गिरावट के साथ नीचे बंद हुआ.
सेंसेक्स 790 अंक या 1.06% की बढ़त के साथ 75,398.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 277 अंक या 1.18% की बढ़त के साथ 23,689.60 पर क्लोज हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
Nifty 50 इंडेक्स में 38 स्टॉक्स बढ़त के साथ बंद हुए. Adani Enterprises (9% की बढ़त), Cipla (8% की बढ़त) और Bharti Airtel (5% की बढ़त) इस इंडेक्स में सबसे अधिक बढ़त वाले स्टॉक्स रहे. दूसरी ओर, Infosys, Tech Mahindra, HCL Tech, Coal India और TCS के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे, और 1-2% तक गिर गए.
सेक्टोरल इडेक्स
विभिन्न सेक्टर्स में, निफ्टी फार्मा इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला रहा, जिसमें 2.73% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मेटल इंडेक्स में 2% का लाभ हुआ. निफ्टी PSU बैंक, निफ्टी केमिकल्स और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सहित अन्य सेक्टरों में भी 1% से अधिक की बढ़त देखने को मिली. दूसरी ओर, निफ्टी IT एकमात्र ऐसा सेक्टर रहा जो पीछे रहा, जिसमें लगभग 2% की गिरावट आई.
5 लाख करोड़ की कमाई
निवेशकों ने एक ही सत्र में 5 लाख करोड़ रुपये की कमाई की, क्योंकि BSE-लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के 458 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 463 लाख करोड़ रुपये हो गया.
भू-राजनीतिक तनाव
इस बीच, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की शर्तों को अस्वीकार्य बताए जाने के बाद पश्चिम एशिया में शांति समझौते की संभावनाएं कमजोर पड़ गई हैं. निवेशक वैश्विक व्यापार और आर्थिक नीति के बारे में आगे के संकेतों के लिए ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली आगामी बैठक पर भी बारीकी से नजर रख रहे हैं.
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