1 साल में 6% गिरावट के बावजूद DII का भरोसा कायम, 30x PE पर ट्रेड कर रहा है यह PSU स्टॉक, रखें नजर
CONCOR के शेयर में बीते एक साल में करीब 6 फीसदी की गिरावट आई है, फिर भी DIIs ने Q3FY26 में अपनी हिस्सेदारी 2.9 फीसदी बढ़ाकर 28.7 प्रतिशत कर ली है. मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, 55 फीसदी रेल फ्रेट बाजार हिस्सेदारी, डबल स्टैक ट्रेनों में बढ़ोतरी और Western DFC से जुड़ी संभावनाओं को देखते हुए संस्थागत निवेशक लंबी अवधि की ग्रोथ पर दांव लगा रहे हैं.
CONCOR STOCK: पब्लिक सेक्टर कंपनियों में आमतौर पर हालिया रिटर्न देखकर निवेश का रुख तय होता है. लेकिन कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी CONCOR के मामले में तस्वीर अलग है. बीते एक साल में शेयर ने करीब 6 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है, फिर भी DIIs ने इसमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. Q3FY26 में DIIs ने 2.9 फीसदी हिस्सेदारी बढ़ाकर कुल होल्डिंग 28.7 फीसदी तक पहुंचा दी. सवाल यह है कि गिरते रिटर्न के बावजूद संस्थागत निवेशक इसमें क्या देख रहे हैं.
कमजोर रिटर्न के बावजूद बढ़ी हिस्सेदारी
जहां कई PSE कंपनियों में DIIs ने हिस्सेदारी घटाई, वहीं CONCOR अपवाद बनकर उभरी. ICICI Prudential Balanced Advantage Fund ने करीब 1.98 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी, जबकि Nippon Life India Trustee Ltd ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई. यह खरीदारी ऐसे समय में हुई जब शेयर का एक साल का प्रदर्शन नेगेटिव रहा और तिमाही मुनाफे में भी गिरावट दर्ज हुई.
लॉजिस्टिक्स में मजबूत स्थिति
CONCOR भारत की मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स कंपनी है, जो 57 हजार से ज्यादा कंटेनर के बेड़े के साथ काम करती है. रेल फ्रेट सेगमेंट में इसका करीब 55 फीसदी बाजार हिस्सा है. पिछले दशक में यह हिस्सेदारी 75 फीसदी से ज्यादा थी, लेकिन अब भी कंपनी अपने नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर लीडिंग स्थिति में है.
ऑपरेशनल मजबूती पर दांव
FY26 में फरवरी तक डबल स्टैक ट्रेनों की संख्या 7 फीसदी बढ़कर 4933 हो गई. कंपनी ने 31 हाई स्पीड ट्रेनें जोड़ीं, जिससे कुल संख्या 413 तक पहुंची. खाली रनों में 12 फीसदी की कमी आई है, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी का संकेत है. एक्सपोर्ट इम्पोर्ट सेगमेंट में खाली रनों में 21 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई. DIIs शायद इन सुधारों को भविष्य की ऑपरेटिंग लीवरेज के रूप में देख रहे हैं.
DFC और JNPT लिंक से उम्मीद
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और JNPT के बीच प्रस्तावित लिंक को गेम चेंजर माना जा रहा है. DFC पर 25 टन एक्सल लोड और 80 टन पेलोड की सुविधा से कंपनी अपने वैगनों का बेहतर उपयोग कर सकेगी. इससे प्रति ट्रेन लागत घट सकती है और मार्जिन सुधर सकते हैं. मैनेजमेंट को उम्मीद है कि FY26 के अंत तक यह लिंक तैयार हो सकता है.
चुनौतियां भी कम नहीं
कंपनी के कुल वॉल्यूम का लगभग 76 फीसदी हिस्सा एक्सपोर्ट इम्पोर्ट कार्गो से आता है, जो वैश्विक व्यापार पर निर्भर है. साथ ही, भारतीय रेलवे के हाउलेज रेट्स कुल ऑपरेटिंग खर्च का करीब 73 फीसदी हिस्सा हैं. इन दरों में बदलाव सीधे मुनाफे को प्रभावित कर सकता है. Q3FY26 में बिक्री 4.5 फीसदी बढ़ी, लेकिन नेट प्रॉफिट 9 फीसदी घटा. कंपनी के शेयरों में सोमवार को 1.31 फीसदी की तेजी के साथ 509 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.
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प्रीमियम वैल्यूएशन के बावजूद दिलचस्पी
शेयर लगभग 30 गुना PE पर ट्रेड कर रहा है, जो इंडस्ट्री मीडियन से ज्यादा है. PEG रेशियो भी हाई है, जिससे यह प्रीमियम वैल्यूएशन दिखाता है. इसके बावजूद DIIs की बढ़ती हिस्सेदारी संकेत देती है कि वे मौजूदा आंकड़ों से आगे जाकर स्ट्रक्चरल ग्रोथ पर दांव लगा रहे हैं.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
