लॉस से प्रॉफिट तक का सफर, Delhivery ने दर्ज किया 141 करोड़ रुपये का मुनाफा; निवेशक रखें नजर

भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां Delhivery ने लंबे समय के घाटे के बाद मुनाफे में वापसी की है. कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल, नेटवर्क और प्राइसिंग रणनीति में बदलाव कर प्रति शिपमेंट कमाई बढ़ाई है. PTL सेगमेंट में बेहतर प्रदर्शन और नेटवर्क के प्रभावी उपयोग से कंपनी को 101 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है. FY25 में मजबूत रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट दर्ज करते हुए Delhivery ने निवेशकों का ध्यान फिर से अपनी ओर खींचा है.

ट्रेंडिंग स्टॉक्स. Image Credit: Canva

Delhivery Profit Turnaround: भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां लंबे समय तक घाटे में रहने के बाद अब एक प्रमुख कंपनी Delhivery ने मुनाफे की राह पकड़ ली है. यह बदलाव सिर्फ ग्रोथ की वजह से नहीं, बल्कि बिजनेस मॉडल में किए गए रणनीतिक सुधारों का नतीजा है. कंपनी ने अपने ऑपरेशंस, नेटवर्क और रेवेन्यू स्ट्रक्चर को इस तरह बदला है कि अब हर शिपमेंट से बेहतर कमाई हो सके. यही वजह है कि अब निवेशकों की नजर इस सेक्टर पर फिर से टिकने लगी है. गुरुवार को कंपनी का शेयर 1.19 फीसदी गिरकर 426.25 रुपये पर पहुंच गया.

स्केल से स्ट्रेंथ तक का सफर

कंपनी ने FY19 से FY22 के बीच तेजी से विस्तार किया और डिलीवरी 148 मिलियन से बढ़कर 582 मिलियन से ज्यादा हो गई. देशभर में नेटवर्क को 18,000 से ज्यादा पिन कोड तक पहुंचाया गया. इस दौरान वेयरहाउस, सॉर्टिंग सेंटर और डिलीवरी सिस्टम में बड़े निवेश किए गए. हालांकि, इतनी तेज ग्रोथ के बावजूद मुनाफा नहीं हो पा रहा था, क्योंकि लागत तेजी से बढ़ रही थी और रिटर्न कम था.

असली चुनौती: कम मार्जिन वाला बिजनेस

कंपनी का बड़ा हिस्सा ई-कॉमर्स डिलीवरी पर आधारित था, जहां मार्जिन काफी कम होता है. तेज प्रतिस्पर्धा और कीमतों के दबाव के कारण कंपनी को हर शिपमेंट पर ज्यादा फायदा नहीं मिल पा रहा था. यही वजह थी कि बड़ी मात्रा में डिलीवरी होने के बावजूद मुनाफा नहीं बन रहा था. FY23 तक ऑपरेटिंग मार्जिन सिर्फ 2 से 6 फीसद के बीच ही रहा और कंपनी लगातार नुकसान में रही.

रणनीति में बड़ा बदलाव

कंपनी ने इसके बाद अपनी रणनीति बदली और केवल वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय प्रति शिपमेंट कमाई पर फोकस किया. कम रिटर्न वाले क्लाइंट्स से दूरी बनाई गई और प्राइसिंग डिसिप्लिन लागू किया गया. इसका असर यह हुआ कि भले ही शिपमेंट ग्रोथ धीमी रही, लेकिन मार्जिन में सुधार देखने को मिला. Q1 FY25 में जहां मार्जिन 4 फीसद था, वहीं Q1 FY26 में यह बढ़कर 6 फीसद हो गया.

PTL से बदली तस्वीर

कंपनी ने Part Truckload यानी PTL सेगमेंट पर भी जोर बढ़ाया, जो ज्यादा स्थिर और बेहतर मार्जिन वाला बिजनेस है. FY24 में जहां इस सेगमेंट में नुकसान था, वहीं FY25 में यह 101 करोड़ रुपये के मुनाफे में आ गया. इस सेगमेंट में बड़े ऑर्डर, कम लागत और बेहतर प्राइसिंग की वजह से कंपनी की कुल कमाई पर सकारात्मक असर पड़ा.

नेटवर्क का बेहतर उपयोग बना गेमचेंजर

पहले कंपनी का नेटवर्क पूरी तरह उपयोग में नहीं आ पा रहा था, जिससे लागत ज्यादा और कमाई कम थी. लेकिन अब जैसे-जैसे वॉल्यूम बढ़ा, उसी नेटवर्क से ज्यादा आउटपुट मिलने लगा. इससे प्रति शिपमेंट लागत घटी और मुनाफा बढ़ा. FY25 में कंपनी ने 8932 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 141 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल के नुकसान से बड़ा बदलाव है.

यह भी पढ़ें: ईरान-इजरायल वॉर के बीच निवेशकों के डूबे ₹41 लाख करोड़, 28 फरवरी से अब तक FII ने भी निकाले ₹1.30 लाख करोड़

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.