ज्वेलरी सेक्टर के इन 2 स्मॉलकैप शेयरों पर FIIs मेहरबान, हिस्सेदारी 6 से 8 गुना बढ़ाई; एक शेयर में दिखी खास बात
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ज्वेलरी सेक्टर के दो स्मॉलकैप शेयरों स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स और पीएन गाडगिल ज्वेलर्स में हिस्सेदारी कई गुना बढ़ाई है. सितंबर 2026 तक स्काई गोल्ड में हिस्सेदारी 4.7 फीसदी और पीएन गाडगिल में 3.83 फीसदी पहुंच गई. हालांकि, दोनों कंपनियों में विदेशी निवेश की वजह अलग-अलग है.
Highlights
- स्काई गोल्ड में FIIs की हिस्सेदारी बढ़कर 4.7 फीसदी पहुंची
- पीएन गाडगिल में हिस्सेदारी 0.48 से बढ़कर 3.83 फीसदी हुई
- दिसंबर तिमाही में विदेशी निवेशकों की अगली रणनीति पर नजर रहेगी
शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी पर हमेशा नजर रहती है. खासकर जब विदेशी निवेशक किसी स्मॉलकैप कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कई गुना बढ़ा देते हैं, तो बाजार में उसकी चर्चा तेज हो जाती है. ज्वेलरी सेक्टर की दो कंपनियां स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स और पीएन गाडगिल ज्वेलर्स इस समय इसी वजह से चर्चा में हैं. सितंबर 2026 तक दोनों कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, दोनों कंपनियों में FIIs की खरीदारी की वजह अलग-अलग है.
स्काई गोल्ड में FIIs की हिस्सेदारी 6 गुना बढ़ी
Sky Gold and Diamonds में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी दिसंबर 2025 में 0.78 फीसदी थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर करीब 4.7 फीसदी हो गई. यानी विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी लगभग 6 गुना बढ़ा दी.
इस कंपनी की खास बात यह है कि प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 51.74 फीसदी पर स्थिर रही. इसका मतलब है कि FIIs की बढ़ती हिस्सेदारी किसी नई शेयर बिक्री या प्रमोटर की हिस्सेदारी घटने की वजह से नहीं आई है. विदेशी निवेशकों ने बाजार से लगातार शेयर खरीदे हैं. साथ ही, FIIs की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है.
एडवांस गोल्ड मॉडल से बदली कंपनी की तस्वीर
स्काई गोल्ड ज्वेलरी की मैन्युफैक्चरिंग करती है और बड़े रिटेल ब्रांड्स को अपने उत्पाद सप्लाई करती है. कंपनी अब एडवांस गोल्ड मॉडल पर काम कर रही है. इस मॉडल में ज्वेलर्स कंपनी को पहले ही सोना उपलब्ध कराते हैं और स्काई गोल्ड केवल मेकिंग चार्ज लेती है.
इससे कंपनी को सोना खरीदने के लिए बड़ी रकम लगाने की जरूरत कम होती है. नतीजतन, वर्किंग कैपिटल की जरूरत और इन्वेंट्री से जुड़ा जोखिम घटता है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो 136 करोड़ रुपये पॉजिटिव रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 45 करोड़ रुपये निगेटिव था.
पीएन गाडगिल में हिस्सेदारी 8 गुना बढ़ी
दूसरी कंपनी PN Gadgil Jewellers में FIIs की हिस्सेदारी जून 2026 के 0.48 फीसदी से बढ़कर सितंबर 2026 में 3.83 फीसदी हो गई. यानी इसमें करीब 8 गुना की बढ़ोतरी हुई.
हालांकि, यहां कहानी थोड़ी अलग है. कंपनी ने 700 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) किया था. इसी के जरिए संस्थागत निवेशकों ने कंपनी के शेयर खरीदे. इसलिए इसे बाजार से लगातार खरीदारी के बराबर नहीं माना जा सकता.
पीएन गाडगिल के नतीजे भी मजबूत
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 30.5 फीसदी बढ़कर 5,079 करोड़ रुपये रहा. EBITDA में 56.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 417 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. वहीं, नेट प्रॉफिट 52.3 फीसदी बढ़कर 226 करोड़ रुपये रहा.
कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 76.62 फीसदी है, जो न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की 25 फीसदी शर्त के लिहाज से निर्धारित 75 फीसदी की सीमा से अधिक है. सितंबर 2027 तक इस नियम का पालन करना होगा.
दिसंबर तिमाही पर रहेगी निवेशकों की नजर
दोनों कंपनियों के लिए दिसंबर 2026 की शेयरहोल्डिंग रिपोर्ट अहम होगी. इससे पता चलेगा कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी आगे भी बनी रहती है या नहीं. स्काई गोल्ड में बाजार से लगातार खरीदारी जारी रहना अहम संकेत होगा, जबकि पीएन गाडगिल में QIP के बाद FIIs की नई खरीदारी पर नजर रहेगी.
ध्यान रहे कि FIIs की हिस्सेदारी बढ़ना किसी शेयर को खरीदने की गारंटी नहीं है. निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और जोखिम का आकलन जरूर करना चाहिए.
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