TV9 NETWORK
User
Sign In

By signing in or creating an account, you agree with Associated Broadcasting Company's Terms & Conditions and Privacy Policy.

विदेशी निवेशकों ने भारत से क्यों मोड़ा मुंह, LTCG टैक्स में राहत से भी क्‍यों नहीं बनी बात?

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों ने पिछले दो वर्षों में करीब 64 अरब डॉलर निकाल लिए हैं. अब LTCG टैक्स में राहत देकर उन्हें वापस लाने की तैयारी है. अनुमान है कि टैक्स खत्म होने से 3 से 5 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है. लेकिन विदेशी निवेशकों की वापसी के लिए सिर्फ टैक्स राहत काफी नहीं होगी.

विदेशी निवेशक

Highlights

  • विदेशी निवेशकों ने दो वर्षों में भारतीय बाजार से 64 अरब डॉलर निकाले
  • LTCG टैक्स खत्म होने पर 3-5 अरब डॉलर निवेश आने का अनुमान
  • रुपये की कमजोरी और महंगा कच्चा तेल विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने चिंता बढ़ा दी है. पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से करीब 64 अरब डॉलर (लगभग 5.6 लाख करोड़ रुपये) निकाल चुके हैं. अब सरकार विदेशी निवेशकों को वापस आकर्षित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में राहत देने पर विचार कर रही है. हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि सिर्फ टैक्स घटाने से विदेशी निवेशकों की वापसी आसान नहीं होगी.

टैक्स में राहत से कितना पैसा आ सकता है?

जेएम फाइनेंशियल के विश्लेषकों के मुताबिक, अगर सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए LTCG टैक्स पूरी तरह खत्म कर देती है, तो वित्त वर्ष 2028 में भारतीय शेयर बाजार में 3 से 5 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त निवेश आ सकता है.

हालांकि, पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशक करीब 64 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं. ऐसे में 3 से 5 अरब डॉलर का संभावित निवेश इस भारी निकासी की भरपाई के लिए काफी नहीं होगा.

फिलहाल भारतीय शेयरों में एक साल से ज्यादा समय तक निवेश रखने पर मिलने वाले मुनाफे पर 12.5 फीसदी LTCG टैक्स लगता है. वहीं, एक साल से कम समय में शेयर बेचने पर 20 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स देना पड़ता है.

सिर्फ टैक्स नहीं, इन वजहों से भी दूर हैं विदेशी निवेशक

विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी निवेशक किसी देश में पैसा लगाने से पहले कई बातों को देखते हैं. इनमें कंपनियों की कमाई, शेयरों की कीमत, रुपये की स्थिति और दूसरे देशों के बाजारों से मिलने वाला रिटर्न शामिल है.

जेएम फाइनेंशियल का अनुमान है कि LTCG टैक्स खत्म होने से विदेशी निवेशकों के सालाना डॉलर रिटर्न में करीब 2.2 फीसदी का सुधार हो सकता है. लेकिन शेयर बाजार की वैल्यूएशन में सुधार का असर इससे कहीं ज्यादा हो सकता है.

इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी विदेशी निवेशकों के फैसले को प्रभावित करती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ने की आशंका रहती है. महंगा कच्चा तेल भारत के आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ाता है.

किन सेक्टरों में लौट सकता है विदेशी निवेश?

अगर विदेशी निवेशकों की वापसी होती है तो बैंकिंग, एनर्जी, यूटिलिटी और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों को फायदा मिल सकता है. पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सेक्टर में की है.

विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए टैक्स राहत के साथ कंपनियों की कमाई में सुधार, आकर्षक वैल्यूएशन और रुपये की स्थिरता जरूरी होगी. यानी सरकार की टैक्स राहत मददगार हो सकती है, लेकिन विदेशी निवेशकों की वापसी की गारंटी नहीं है.

यह भी पढ़ें- 300% रिटर्न देने वाले टाटा ग्रुप के शेयर ने हिट किया 52 वीक हाई, ब्रोकरेज ने दी Buy की सलाह, जानें- कितना आएगा उछाल