मार्च में 1.14 लाख करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली, आउटफ्लो से हिला बाजार, जानें क्यों बढ़ा डर
मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 1.14 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो है. NSDL के अनुसार 2026 में कुल बिकवाली 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. पश्चिम एशिया तनाव, कमजोर रुपया और महंगे कच्चे तेल की वजह से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है.
FPI Outflow India: शेयर बाजार के लिए मार्च 2026 एक बड़ा झटका लेकर आया है. विदेशी निवेशकों ने इस महीने रिकॉर्ड स्तर पर बिकवाली की है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है. आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च में करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो माना जा रहा है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर होता रुपया और महंगे कच्चे तेल की कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में यह महीना निवेशकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है.
इतिहास की सबसे बड़ी बिकवाली
मार्च 2026 में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.14 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है. इससे पहले अक्टूबर 2024 में 94 हजार करोड़ रुपये का आउटफ्लो सबसे ज्यादा था. इस बार यह आंकड़ा उससे भी आगे निकल गया है, जिससे बाजार में भारी दबाव देखने को मिला. NSDL के डेटा के अनुसार 2026 में अब तक कुल आउटफ्लो 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
पूरे महीने लगातार बिकवाली
मार्च महीने में विदेशी निवेशक लगातार शेयर बेचते रहे. 27 मार्च तक ही कैश मार्केट में करीब 1.13 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली हो चुकी थी. यह ट्रेंड दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है. फरवरी में जहां 22 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया था, वहीं मार्च में स्थिति पूरी तरह उलट गई.
क्यों हो रही है इतनी बड़ी बिकवाली
जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और ग्लोबल बाजारों में कमजोरी इसका मुख्य कारण है. इसके अलावा रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी चिंता बढ़ा रही हैं. इन कारणों से भारत की ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं.
ग्लोबल ट्रेंड का भी असर
यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य उभरते बाजारों में भी विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं. अमेरिका में बढ़ते बॉन्ड यील्ड और कम होती लिक्विडिटी के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं. इससे इक्विटी बाजारों में जोखिम लेने की इच्छा कम हो गई है.
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आगे बाजार के लिए क्या संकेत
इतनी बड़ी बिकवाली बाजार के लिए चेतावनी संकेत हो सकती है. हालांकि हाल की गिरावट के बाद वैल्यूएशन कुछ कम हुए हैं, लेकिन अभी भी कई बाजार महंगे माने जा रहे हैं. अगर वैश्विक हालात में सुधार नहीं होता है, तो बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है. ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और सोच समझकर फैसले लेने की जरूरत है.
