जनवरी में अबतक FPI ने निकाले 33,598 करोड़, कमजोर रुपया और Q3 नतीजे से बाजार में हलचल; 16 लाख करोड़ घटा मार्केट कैप

जनवरी 2026 में विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 33,598 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे निफ्टी 2.5% गिरा और मार्केट कैप में 16 लाख करोड़ रुपये कम हुए. सबसे बड़ा कारण रुपये की कमजोरी (91.96/USD) और Q3 तिमाही नतीजों का कमजोर होना है. US-India ट्रेड डील की अनिश्चितता ने भी निवेशकों की सतर्कता बढ़ाई.

FPI ने मार्केट से रिकॉर्ड 33,598 करोड़ रुपये की बिकवाली की है. Image Credit: FreePik

FPI outflows in January: जनवरी में भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. 23 जनवरी तक FPIs ने 33,598 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जो अगस्त 2025 के बाद सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो है. इस बिकवाली का असर बाजार पर साफ दिखा, जहां एक हफ्ते में करीब 16 लाख करोड़ रुपये की मार्केट कैप साफ हो गई और निफ्टी करीब 2.5 फीसदी गिर गया. सवाल यह है कि आखिर विदेशी निवेशक अचानक इतने आक्रामक क्यों हो गए.

कमजोर रुपया बना सबसे बड़ा ट्रिगर

FPIs की बिकवाली की सबसे बड़ी वजह रुपये की तेज गिरावट मानी जा रही है. 23 जनवरी को डॉलर के मुकाबले रुपया 91.96 के स्तर तक फिसल गया. कमजोर करेंसी का मतलब है कि विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर डॉलर रिटर्न घटने का डर रहता है. ऐसे माहौल में वे जोखिम लेने के बजाय पैसा निकालना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं. लगातार गिरता रुपया भारत की मैक्रो इकॉनमी को लेकर उनकी चिंता बढ़ा रहा है.

तिमाही नतीजों ने भी नहीं बढ़ाया भरोसा

रुपये के अलावा कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने भी FPIs का भरोसा तोड़ा है. Q3 के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे कॉरपोरेट अर्निंग्स को लेकर अनिश्चितता बढ़ी. विदेशी निवेशक आमतौर पर मजबूत ग्रोथ और कमाई की साफ तस्वीर देखना चाहते हैं. फिलहाल उन्हें यह भरोसा नहीं मिल पा रहा, हालांकि उम्मीद है कि Q4 में नतीजे कुछ बेहतर हो सकते हैं.

US-India ट्रेड डील की देरी से बढ़ी अनिश्चितता

एक और बड़ी वजह अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील पर कोई साफ संकेत न मिलना है. बाजार को डर है कि अगर यह समझौता और लटकता है तो भारत का ट्रेड डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है. इससे रुपये पर और दबाव आएगा. निवेशकों के लिए यह सबसे बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि अभी तक इस डील की टाइमलाइन पर कोई स्पष्टता नहीं है.

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आगे क्या लौटेंगे विदेशी निवेशक

जानकारों का मानना है कि FPIs की वापसी के लिए दो शर्तें अहम होंगी. पहली, कॉरपोरेट अर्निंग्स में साफ सुधार दिखे और दूसरी, US-India ट्रेड डील को लेकर स्पष्टता आए. फिलहाल पहली पर थोड़ी उम्मीद है, लेकिन दूसरी पर तस्वीर धुंधली बनी हुई है. जब तक ये दोनों फैक्टर साफ नहीं होते, विदेशी निवेशकों की सतर्कता बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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