इन 25000 के भरोसे आपकी LPG, सरकार को बॉटलिंग प्लांट की टेंशन, जानें डेली कितनी करते हैं गैस रीफिलिंग
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने एलपीजी आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की है. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों व डीजीपी के साथ बैठक कर बॉटलिंग प्लांट और वितरण नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही एलपीजी आपूर्ति की दैनिक निगरानी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए. आइये जानते हैं कि देश कितने प्लांट हैं.
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और डीजीपी के साथ समीक्षा बैठक की है. केंद्र ने राज्यों को बॉटलिंग प्लांट, वितरण नेटवर्क (गैस एजेंसी) और सिलेंडर ट्रांसपोर्टेशन की सुरक्षा कड़ी करने के आदेश दिए हैं. साथ ही सप्लाई की रोजाना निगरानी रखने और कालाबाजारी या नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. आइये जानते हैं कि देश में कितने बॉटलिंग प्लांट हैं और देश में रोजाना कितनी गैस रीफिलिंग की जाती है.
देश भर में हैं कितने बॉटलिंग प्लांट
- देश में घरेलू रसोई गैस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एलपीजी बॉटलिंग प्लांट का बड़ा नेटवर्क मौजूद है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 1 नवंबर 2024 तक कुल 210 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट संचालित हो रहे हैं. जिनकी कुल बॉटलिंग क्षमता करीब 22,626 हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष (TMTPA) है. इस हिसाब से रोजाना लगभग 62,000 मीट्रिक टन LPG रिफिल की जाती है.
- क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर भारत में सबसे ज्यादा 64 बॉटलिंग प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 6,935 टीएमटीपीए है. इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां अकेले 27 प्लांट और 3,030 टीएमटीपीए क्षमता मौजूद है. इसके अलावा राजस्थान में 12 प्लांट (1,170 टीएमटीपीए) और पंजाब में 8 प्लांट (900 टीएमटीपीए) संचालित हैं.
- दक्षिण भारत में कुल 52 बॉटलिंग प्लांट हैं, जिनकी क्षमता करीब 5,830 टीएमटीपीए है. इस क्षेत्र में तमिलनाडु में 19 प्लांट के साथ सबसे बड़ा नेटवर्क है, जबकि कर्नाटक में 11 प्लांट और 1,570 टीएमटीपीए क्षमता दर्ज की गई है.
- पश्चिम भारत में 50 बॉटलिंग प्लांट हैं और इनकी कुल क्षमता 5,280 टीएमटीपीए है. यहां महाराष्ट्र 22 प्लांट और 2,670 टीएमटीपीए क्षमता के साथ सबसे आगे है, जबकि गुजरात में 11 प्लांट संचालित हैं.
- पूर्वी भारत में 32 प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 3,805 टीएमटीपीए है. इस क्षेत्र में पश्चिम बंगाल (11 प्लांट) और बिहार (9 प्लांट) प्रमुख केंद्र हैं.
- वहीं उत्तर-पूर्वी राज्यों में 12 बॉटलिंग प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 776 टीएमटीपीए है. इनमें असम इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र है.
देश भर में कितने हैं LPG डिस्ट्रीब्यूटर
देश में घरेलू गैस की आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए एलपीजी वितरकों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 नवंबर 2024 तक देशभर में कुल 25,449 एलपीजी वितरक सक्रिय हैं. इनमें शहरी, ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में वितरक शामिल हैं जो उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की सप्लाई सुनिश्चित करते हैं.
- राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 4,142 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर हैं. इसके बाद महाराष्ट्र में 2,239, तमिलनाडु में 1,642, गुजरात में 1,068 और राजस्थान में 1,385 वितरक काम कर रहे हैं.
- उत्तर भारत में कुल 8,177 एलपीजी वितरक हैं. इस क्षेत्र में दिल्ली में 317, हरियाणा में 625, पंजाब में 859, राजस्थान में 1,385 और उत्तराखंड में 318 वितरक सक्रिय हैं.
- पूर्वी भारत में 5,178 एलपीजी वितरक हैं जिनमें बिहार में 2,030, पश्चिम बंगाल में 1,588, ओडिशा में 963 और झारखंड में 587 वितरक शामिल हैं.
- पश्चिम भारत में कुल 5,419 एलपीजी वितरक हैं. यहां महाराष्ट्र में 2,239, गुजरात में 1,068, मध्य प्रदेश में 1,551, छत्तीसगढ़ में 535 और गोवा में 55 वितरक मौजूद हैं.
- दक्षिण भारत में 5,574 एलपीजी वितरक सक्रिय हैं. इस क्षेत्र में तमिलनाडु में 1,642, कर्नाटक में 1,270, आंध्र प्रदेश में 1,134, तेलंगाना में 800 और केरल में 619 वितरक काम कर रहे हैं.
- वहीं उत्तर-पूर्वी राज्यों में कुल 1,101 एलपीजी वितरक हैं. इनमें असम में 597, त्रिपुरा में 83, नागालैंड में 49 और मणिपुर में 102 वितरक शामिल हैं.
